भारत का पहला उद्योग-अकादमिक परमाणु प्रौद्योगिकी कार्यक्रम “Anugyaan”
संदर्भ:
हाल ही में भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान हैदराबाद (IIT Hyderabad) ने पुणे की प्रौद्योगिकी फर्म क्रिम्सन एनर्जी एक्सपर्ट्स के सहयोग से भारत का पहला उद्योग-अकादमिक नागरिक परमाणु कार्यक्रम “अनुग्यान” (Anugyaan Programme) शुरू किया।
अनुग्यान कार्यक्रम (Anugyaan Programme) के बारे में:
- परिचय: अनुग्यान—परमाणु प्रौद्योगिकी ओरिएंटेशन कार्यक्रम (Nuclear Technology Orientation Programme – NTOP) भारत का पहला उद्योग-अकादमिक परमाणु कार्यक्रम (Industry Academia Nuclear Programme) है।
- यह 3 महीने का पूर्णतः आवासीय कार्यक्रम है, जिसे आईआईटी हैदराबाद परिसर में संचालित किया जा रहा है।
- यह अकादमिक शिक्षा (Academic Learning) और वास्तविक औद्योगिक अभ्यास के बीच के अंतर को कम करने में सहायक है।
- सहयोगी संस्थाएँ: आईआईटी हैदराबाद और क्रिम्सन एनर्जी एक्सपर्ट्स प्राइवेट लिमिटेड (CEEPL)।
- इस कार्यक्रम की नींव फ्रांस में आयोजित भारत इनोवेट 2026 के दौरान आईआईटी हैदराबाद, डसॉल्ट सिस्टम्स और क्रिम्सन एनर्जी के बीच हस्ताक्षरित एक समझौता ज्ञापन (MoU) पर आधारित है।
- संस्थान की स्थापना: इस साझेदारी के तहत अत्याधुनिक डिजिटल सिमुलेशन और अनुसंधान के लिए परमाणु इंजीनियरिंग में डिजाइन उत्कृष्टता केंद्र (CODENE) की स्थापना की जा रही है।
- लक्ष्य:
- तैनाती-तैयार प्रतिभा (Deployment-ready Talent): नागरिक परमाणु ऊर्जा क्षेत्र के लिए व्यावहारिक ज्ञान से लैस पेशेवर तैयार करना।
- क्षमता विस्तार का समर्थन: भारत के परमाणु ऊर्जा लक्ष्य (वर्ष 2047 तक क्षमता को 8.8 गीगावाट से बढ़ाकर 100 गीगावाट करना) के लिए मानव संसाधन विकसित करना।
- परमाणु शिक्षा का स्वदेशीकरण: विदेशी प्रशिक्षण प्रणालियों पर निर्भरता कम करके भारत में ही विश्वस्तरीय परमाणु शिक्षा अवसंरचना बनाना।
- विशेषताएं:
- रिएक्टर भौतिकी और थर्मल हाइड्रोलिक्स (Reactor Physics & Thermal Hydraulics): परमाणु रिएक्टर के मुख्य कोर संचालन और ताप नियंत्रण प्रणालियों का गहन तकनीकी अध्ययन।
- छोटे मॉड्यूलर रिएक्टर (Small Modular Reactors – SMRs): उभरती हुई कॉम्पैक्ट और सुरक्षित एसएमआर प्रौद्योगिकियों पर विशेष प्रशिक्षण।
- नियामक अनुपालन (AERB Compliance): परमाणु ऊर्जा नियामक बोर्ड (Atomic Energy Regulatory Board) के सुरक्षा मानकों और कानूनी नियमों की समझ।
- सिम्युलेटर-आधारित प्रशिक्षण (Simulator-Based Training): छात्रों को वास्तविक परमाणु संयंत्र के नियंत्रण कक्ष (Control Room) जैसा व्यावहारिक अनुभव देने के लिए डिजिटल सिमुलेशन टूल्स का उपयोग।
- सर्टिफिकेशन: सफल प्रतिभागियों को आईआईटी हैदराबाद और क्रिम्सन एनर्जी द्वारा संयुक्त प्रमाण पत्र (Joint Certification) प्रदान किया जाता है।
भारत का परमाणु प्रौद्योगिकी क्षेत्र:
- वर्तमान स्थिति: भारत की वर्तमान स्थापित परमाणु ऊर्जा क्षमता 8.78 गीगावाट (GW) है, जो देश के कुल विद्युत उत्पादन का लगभग 3% हिस्सा प्रदान करती है।
- देश के 7 प्रमुख संयंत्रों में कुल 24-25 परमाणु रिएक्टर सक्रिय रूप से कार्यरत हैं।
- हालिया वित्तीय वर्ष में परमाणु संयंत्रों ने लगभग 56,681 मिलियन यूनिट बिजली का उत्पादन किया है।
- क्षमता को 2031-32 तक 22.38 गीगावाट तक ले जाने के लिए कई स्वदेशी (700 मेगावाट) और सहयोगात्मक रिएक्टरों पर तेजी से निर्माण कार्य जारी है।
- उपलब्धियाँ: कलपक्कम में स्वदेशी रूप से विकसित प्रोटोटाइप फास्ट ब्रीडर रिएक्टर के क्रिटिकल होने से भारत रूस के बाद इस उन्नत वाणिज्यिक तकनीक को अपनाने वाला दुनिया का दूसरा देश बन गया है।
- यह तकनीक भविष्य में यूरेनियम पर निर्भरता कम करके भारत के विशाल थोरियम भंडारों के उपयोग के तीसरे चरण के मार्ग को प्रशस्त करती है।
- रोडमैप:
- नेट जीरो 2070: भारत ने वर्ष 2070 तक शुद्ध शून्य कार्बन उत्सर्जन (Net Zero Emissions) का लक्ष्य रखा है, जिसमें परमाणु ऊर्जा एक स्वच्छ और विश्वसनीय आधार-लोड (Base-load) स्रोत है।
- शांति अधिनियम 2025 (SHANTI Act, 2025): सरकार ने हाल ही में ‘सतत ऊर्जा हस्तांतरण और परमाणु उन्नति अधिनियम’ (SHANTI Act) लागू किया है। यह विनियामक निरीक्षण के तहत परमाणु क्षेत्र में सीमित निजी भागीदारी (Private Participation) की अनुमति देता है। [8]
- एसएमआर मिशन: भारत ने स्वदेशी छोटे मॉड्यूलर रिएक्टरों (SMRs) के डिजाइन और विकास के लिए ₹20,000 करोड़ का वित्तीय बजट आवंटित किया है, जिसके तहत वर्ष 2033 तक कम से कम 5 स्वदेशी एसएमआर चालू करने का लक्ष्य है।
- भाभा परमाणु अनुसंधान केंद्र (BARC) इसके लिए 200 मेगावाट के भारत स्मॉल मॉड्यूलर रिएक्टर (BSMR-200) पर काम कर रहा है।
अनुग्यान कार्यक्रम का रणनीतिक महत्व:
- औद्योगिक आपूर्ति श्रृंखला का सुदृढ़ीकरण: सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों (PSUs), ईपीसी (EPC) फर्मों और विनिर्माण उद्योगों को कुशल इंजीनियर मिलने से परमाणु संयंत्रों के निर्माण में तेजी आएगी।
- सुरक्षा और जोखिम प्रबंधन: उन्नत परमाणु सुरक्षा (Nuclear Safety) और विकिरण परिरक्षण (Radiation Shielding) के कड़े विनियामक नियमों को जानने वाले पेशेवरों से दुर्घटनाओं की संभावना न्यूनतम होगी।
- उद्योग-अकादमिक सहयोग (Industry Academia Collaboration) का मॉडल: यह कार्यक्रम भारत के अन्य रणनीतिक क्षेत्रों (जैसे रक्षा और अंतरिक्ष) के लिए भी अकादमिक और निजी उद्योगों के बीच सहयोग का एक आदर्श उदाहरण प्रस्तुत करता है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)
प्रश्न 1: “अनुग्यान” कार्यक्रम क्या है?
उत्तर: यह आईआईटी हैदराबाद और क्रिम्सन एनर्जी द्वारा नागरिक परमाणु ऊर्जा क्षेत्र के लिए शुरू किया गया भारत का पहला 3-महीने का आवासीय ओरिएंटेशन कार्यक्रम है।
प्रश्न 2: भारत का पहला उद्योग-अकादमिक परमाणु प्रौद्योगिकी कार्यक्रम क्यों शुरू किया गया?
उत्तर: भारत के तेजी से बढ़ते परमाणु ऊर्जा क्षेत्र में कुशल इंजीनियरों और तकनीकी विशेषज्ञों की भारी कमी को दूर करने के लिए इसे शुरू किया गया है।
प्रश्न 3: अनुग्यान कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य क्या है?
उत्तर: इसका मुख्य उद्देश्य थ्योरिटिकल ज्ञान और व्यावहारिक परमाणु संयंत्र संचालन के बीच की खाई को पाटकर उद्योग के लिए सीधे तैनाती-योग्य इंजीनियर तैयार करना है।
प्रश्न 4: इस कार्यक्रम में उद्योग और अकादमिक संस्थानों की क्या भूमिका होगी?
उत्तर: आईआईटी हैदराबाद अकादमिक अनुसंधान (Nuclear Research India) व बुनियादी ढांचा देगा, जबकि क्रिम्सन एनर्जी के अनुभवी परमाणु विशेषज्ञ छात्रों को व्यावहारिक और सिमुलेशन प्रशिक्षण प्रदान करेंगे।
प्रश्न 5: परमाणु प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में इससे क्या लाभ होगा?
उत्तर: इससे भारत को वर्ष 2047 तक अपनी परमाणु क्षमता 100 गीगावाट करने के लक्ष्य हेतु कुशल जनशक्ति मिलेगी और स्वदेशी एसएमआर (SMR) तकनीकों का तेजी से विकास होगाकारिक पुरस्कार वेबसाइट पर ऑनलाइन किया जाता है।
