Asiatic Lion Population India- भारत में एशियाई शेरों की आबादी बढ़कर हुई 891
संदर्भ:
हाल ही में केंद्रीय पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्री भूपेंद्र यादव ने विश्व शेर दिवस (World Lion Day) के अवसर पर ऐतिहासिक घोषणा करते हुए बताया कि भारत में एशियाई शेरों की आबादी (Asiatic Lion Population India) वर्ष 2015 के 523 से बढ़कर 2025 की गणना में 891 हो गई है.
- जनसंख्या में अभूतपूर्व वृद्धि: 16वीं एशियाई शेर जनसंख्या आकलन (16th Asiatic Lion Population Estimation) के अनुसार शेरों की संख्या बढ़कर 891 हो गई है. यह वर्ष 2020 की आबादी (674 शेर) की तुलना में 32.20 प्रतिशत की वृद्धि को दर्शाता है.
- दशकीय विकास दर (Decadal Growth): पिछले 10 वर्षों में एशियाई शेरों की आबादी में (Asiatic Lion Population Increase) 70.36 प्रतिशत की भारी बढ़ोतरी दर्ज की गई है, जो 2015 में केवल 523 थी.
- भौगोलिक विस्तार (Habitat Range Expansion): शेरों का प्राकृतिक आवास क्षेत्र वर्ष 2020 के लगभग 30,000 वर्ग किमी से बढ़कर अब गुजरात के 11 जिलों में लगभग 35,000 वर्ग किलोमीटर (Greater Gir Landscape) तक फैल चुका है.
- प्रजनन क्षमता और जनसांख्यिकी: नवीनतम 2025 के आंकड़ों में 330 वयस्क मादा शेर (Adult Females) शामिल हैं, जो इस लुप्तप्राय प्रजाति (Endangered Asiatic Lion) की मजबूत प्रजनन क्षमता और पारिस्थितिक सुरक्षा का संकेत है.
एशियाई शेर (Asiatic Lion) के बारे में:
- वैज्ञानिक नाम: इसे तकनीकी रूप से पैंथेरा लियो पर्सिका (Panthera leo persica) कहा जाता है.
- शारीरिक भिन्नता: ये अफ्रीकी शेरों की तुलना में आकार में थोड़े छोटे होते हैं. इनके नर शेरों के पास कम विकसित अयाल (Less Developed Mane) होता है, जिसके कारण उनके कान स्पष्ट दिखाई देते हैं.
- विशिष्ट पहचान: एशियाई शेर के पेट पर त्वचा की एक अनूठी और स्पष्ट अनुदैर्ध्य परत (Distinctive Fold of Skin along the Belly) पाई जाती है, जो इसे अफ्रीकी शेरों से अलग करती है.
- प्राकृतिक आवास: वर्तमान में पूरे विश्व में भारत का सौराष्ट्र क्षेत्र (गुजरात) ही एकमात्र ऐसा प्राकृतिक स्थान है जहाँ जंगली एशियाई शेर जीवित बचे हैं.
- यह प्रजाति मुख्य रूप से शुष्क पर्णपाती वनों (Dry Deciduous Forests) और कँटीली झाड़ियों वाले अर्ध-शुष्क क्षेत्रों में निवास करती है.
- संरक्षण स्थिति:
- आईयूसीएन रेड लिस्ट (IUCN Red List): ‘लुप्तप्राय’ (Endangered) श्रेणी में वर्गीकृत.
- वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 1972: अनुसूची-I (Schedule-I) के तहत सर्वोच्च कानूनी सुरक्षा प्राप्त.
- साइट्स (CITES): इसके अंतर्राष्ट्रीय व्यापार पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने के लिए इसे परिशिष्ट-I (Appendix-I) में शामिल किया गया है.
भारत में शेर संरक्षण के प्रमुख क्षेत्र एवं योजनाएं:
- क्षेत्र: गुजरात सरकार और वन विभाग ने शेरों के बढ़ते कुनबे को सुरक्षित रखने के लिए ‘ग्रेटर गिर लैंडस्केप’ के तहत कई क्षेत्रों को प्रबंधित किया है:
- गिर राष्ट्रीय उद्यान (Gir National Park): 258.71 वर्ग किमी में फैला यह क्षेत्र शेरों का मुख्य और सबसे सुरक्षित कोर हैबिटेट (Core Habitat) है.
- गिर वन्यजीव अभयारण्य (Gir Wildlife Sanctuary): कोर राष्ट्रीय उद्यान के चारों ओर 1,151.59 वर्ग किमी का बफर क्षेत्र जो शेरों को स्वतंत्र रूप से घूमने की सुविधा देता है.
- महत्वपूर्ण सहायक अभयारण्य: गिर के जंगलों से जुड़े पनिया (Pania), मतियाला (Mitiyala), और गिरनार वन्यजीव अभयारण्य भी शेरों के नियमित गलियारे (Wildlife Corridors) हैं.
- बरडा वन्यजीव अभयारण्य (Barda Wildlife Sanctuary) – दूसरा सुरक्षित ठिकाना: शेरों को किसी महामारी (जैसे कैनाइन डिस्टेंपर वायरस) या आपदा से बचाने के लिए पोरबंदर के पास स्थित बरडा अभयारण्य को दूसरे सुरक्षित आवास (Second Safe Haven) के रूप में विकसित किया गया है. वर्ष 2023 में प्राकृतिक प्रवासन के बाद यहाँ शेरों की संख्या बढ़कर 17 हो गई है.
- संरक्षण योजनाएं:
- प्रोजेक्ट लॉयन (Project Lion): प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा 15 अगस्त 2020 को ‘प्रोजेक्ट लॉयन’ की शुरुआत की गई थी. इसके तहत अत्याधुनिक चिकित्सा देखभाल, पर्यावास बहाली और उन्नत वन्यजीव प्रबंधन प्रणालियों को एकीकृत किया गया है.
- इंटरनेशनल बिग कैट्स एलायंस (IBCA): अप्रैल 2023 में भारत द्वारा शुरू किए गए इस वैश्विक संगठन के तहत शेर सहित दुनिया की 7 बड़ी बिल्ली प्रजातियों के संरक्षण के लिए 90 से अधिक देशों को एक मंच पर लाया गया है.
- एशियाई शेर संरक्षण परियोजना: केंद्रीय वित्त पोषित इस योजना के तहत रोग निगरानी, फोरेंसिक लैब की स्थापना और ‘लायन एम्बुलेंस’ नेटवर्क का विकास किया गया है.
- सामुदायिक भागीदारी (धारी मॉडल): गिर के स्थानीय ‘मालधारी’ (Maldhari) समुदाय ने शेरों के साथ सह-अस्तित्व (Coexistence) की अनूठी मिसाल पेश की है.
- खुले कुओं को सुरक्षित बनाना: शेरों के कुएं में गिरकर होने वाली मौतों को रोकने के लिए सरकार ने खेतों के 55,000 से अधिक खुले कुओं को कंक्रीट की दीवारों से घेरा (Parapet Walls) है.
- त्वरित मुआवजा प्रणाली: शेरों द्वारा मवेशियों के शिकार पर ग्रामीणों को डिजिटल माध्यम से तुरंत वित्तीय मुआवजा दिया जाता है, जिससे इंसानी प्रतिशोध (Retaliatory Killing) की घटनाएं समाप्त हो गई हैं.
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)
प्रश्न 1: भारत में एशियाई शेरों की आबादी कितनी हो गई है?
उत्तर: भारत के गुजरात में एशियाई शेरों की नवीनतम आधिकारिक संख्या (Gir Lion Population) बढ़कर 891 हो गई है, जो 2025 की गणना पर आधारित है.
प्रश्न 2: भारत में एशियाई शेरों की संख्या बढ़कर 891 कैसे हुई?
उत्तर: यह सफलता कड़े कानूनी संरक्षण, प्रोजेक्ट लॉयन (Project Lion) के तहत बेहतर स्वास्थ्य देखभाल, शिकार आधार (Prey Base) में वृद्धि और स्थानीय समुदायों के सक्रिय सहयोग से संभव हुई है.
प्रश्न 3: एशियाई शेर भारत में मुख्य रूप से कहां पाए जाते हैं?
उत्तर: वैश्विक स्तर पर जंगली एशियाई शेर (Asiatic Lions Population 891) केवल भारत के गुजरात राज्य के सौराष्ट्र क्षेत्र (Greater Gir Landscape) के 11 जिलों में पाए जाते हैं.
प्रश्न 4: गिर राष्ट्रीय उद्यान एशियाई शेरों के लिए क्यों महत्वपूर्ण है?
उत्तर: गिर राष्ट्रीय उद्यान (Gir National Park Lions) पृथ्वी पर एशियाई शेरों का एकमात्र प्राकृतिक आवास और मुख्य प्रसव केंद्र है, जो इन्हें पूर्ण सुरक्षा प्रदान करता है.
प्रश्न 5: एशियाई शेरों की आबादी में कितनी वृद्धि हुई है?
उत्तर: शेरों की आबादी में वर्ष 2020 की तुलना में 32.20 प्रतिशत की वृद्धि हुई है, जबकि पिछले एक दशक में यह संख्या 70% से अधिक बढ़ी है.
प्रश्न 6: एशियाई शेरों के संरक्षण के लिए भारत क्या कदम उठा रहा है?
उत्तर: भारत सरकार प्रोजेक्ट लॉयन चला रही है, खुले कुओं को ढक रही है, बरडा अभयारण्य को दूसरे घर के रूप में विकसित कर रही है और जीपीएस आधारित ट्रैकिंग का उपयोग कर रही है.
