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India First Scope 2 Emission Free Port- वी.ओ.सी. पोर्ट बना भारत का पहला स्कोप-2 उत्सर्जन-मुक्त बंदरगाह

India First Scope 2 Emission Free Port- वी.ओ.सी. पोर्ट बना भारत का पहला स्कोप-2 उत्सर्जन-मुक्त बंदरगाह

India First Scope 2 Emission Free Port

संदर्भ:

हाल ही में तमिलनाडु के थूथुकुडी में स्थित वी.ओ. चिदंबरनार पोर्ट अथॉरिटी (V.O. Chidambaranar Port Authority) को भारत का पहला स्कोप-2 उत्सर्जन-मुक्त बंदरगाह (India First Scope 2 Emission Free Port) घोषित किया गया।

वी.ओ. चिदंबरनार पोर्ट (V.O. Chidambaranar Port) के बारे मे:

  • स्थान: यह बंदरगाह तमिलनाडु के दक्षिण-पूर्वी तट पर थूथुकुडी (पुराना नाम तूतीकोरिन) में स्थित है।
    • यह मन्नार की खाड़ी (Gulf of Mannar) के शांत जलक्षेत्र में अवस्थित है, जो श्रीलंका द्वारा प्रदान की जाने वाली प्राकृतिक सुरक्षा के कारण चक्रवातों और ऊंची लहरों से सुरक्षित रहता है।
    • यह अंतरराष्ट्रीय पूर्व-पश्चिम शिपिंग मार्गों (East-West Shipping Routes) के अत्यंत निकट है, जो इसे दक्षिण भारत का एक प्रमुख समुद्री प्रवेश द्वार बनाता है। 
  • श्रेणी: यह भारत के 12 प्रमुख बंदरगाहों (Major Ports) में से एक है।
  • प्रकार: यह एक कृत्रिम, हर मौसम में संचालित होने वाला (Artificial, All-weather Deep-sea Port) गहरा समुद्री बंदरगाह है।
  • कार्गो हैंडलिंग: यह मुख्य रूप से कंटेनर, शुष्क थोक (Dry Bulk), तरल थोक (Liquid Bulk) और कोयले का बड़े पैमाने पर प्रबंधन करता है। 
  • लॉन्चिंग: इसे आधिकारिक तौर पर 11 जुलाई 1974 को भारत के एक प्रमुख बंदरगाह के रूप में कमीशन (प्रचालित) किया गया था।
  • नामकरण: वर्ष 2011 में केंद्र सरकार द्वारा इसका नाम बदलकर प्रसिद्ध स्वतंत्रता सेनानी वी.ओ. चिदंबरम पिल्लई के नाम पर रखा गया, जिन्होंने ब्रिटिश एकाधिकार को चुनौती देने के लिए ‘स्वदेशी स्टीम नेविगेशन कंपनी’ की स्थापना की थी।
  • विशेषताएं: 
    • डिजिटल ट्विन तकनीक: वी.ओ.सी. पोर्ट परिचालन दक्षता बढ़ाने के लिए डिजिटल ट्विन पहल (Digital Twin Initiative) शुरू करने वाला भारत का पहला बंदरगाह है। 
    • एंटी-ड्रोन सुरक्षा: इसकी सुरक्षा अवसंरचना आधुनिक एंटी-ड्रोन प्रणालियों (Anti-drone Security Systems) से लैस है। 
    • आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI): बंदरगाह ने दैनिक प्रशासनिक और परिचालन कार्यों के सुदृढ़ीकरण के लिए ‘PortGPT’ नामक एक एंटरप्राइज-ग्रेड जेनरेटिव एआई मोबाइल एप्लिकेशन लॉन्च किया है। 
    • स्कोप-2 उत्सर्जन-मुक्त: अंतरराष्ट्रीय प्रमाणन निकाय ब्यूरो वेरिटास (Bureau Veritas) ने पुष्टि की है कि वी.ओ.सी. पोर्ट ने वित्त वर्ष 2025-26 की चौथी तिमाही में शून्य स्कोप-2 उत्सर्जन का लक्ष्य हासिल किया है।
      • ये वे अप्रत्यक्ष ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन (Indirect Emissions) हैं जो किसी संस्थान द्वारा बाहरी ग्रिड से खरीदी गई बिजली, हीटिंग या कूलिंग के उपभोग से उत्पन्न होते हैं।
      • इसके साथ ही, यह ISO 50001:2018 (ऊर्जा प्रबंधन प्रणाली) प्रमाणन प्राप्त करने वाला देश का पहला बंदरगाह बन गया है।
    • हरित पोत परिवहन का केंद्र: वी.ओ.सी. पोर्ट अथॉरिटी (VOCPA) ने किसी भी प्रमुख भारतीय बंदरगाह पर देश का पहला ग्रीन हाइड्रोजन पायलट प्रोजेक्ट (10 Nm³/hr क्षमता) सफलतापूर्वक चालू किया है।
      • इसके साथ ही, यहां एक बड़े 3 मेगावाट ग्रीन हाइड्रोजन उत्पादन संयंत्र और दो 750 घन मीटर क्षमता वाले ग्रीन मेथॉल बंकरिंग व रीफ्यूलिंग स्टेशन का विकास किया जा रहा है। 
      • बंदरगाह ने इसके निर्यात गलियारों को विकसित करने के लिए वैश्विक संस्था ‘H2Global’ और स्वच्छ ऊर्जा गलियारों के लिए ‘पोर्ट ऑफ एंटवर्प-ब्रूजेस’ के साथ समझौता ज्ञापनों पर हस्ताक्षर किए हैं।

स्कोप-2 उत्सर्जन को कैसे समाप्त किया गया?

  • अक्षय ऊर्जा का उपयोग (VOC Port Green Energy): बंदरगाह ने अपनी कुल बिजली खपत का 93.89% भाग खुद के नवीकरणीय ऊर्जा स्रोतों से पूरा किया। चौथी तिमाही में इसकी हरित ऊर्जा का उत्पादन कुल बिजली खपत से अधिक हो गया, जिससे इसका ‘नेट स्कोप-2 उत्सर्जन’ शून्य हो गया।
  • हरित बुनियादी ढांचा (Green Infrastructure): वर्तमान में बंदरगाह के पास 7.04 मेगावाट सौर ऊर्जा (1.04 MW रूफटॉप और 6 MW ग्राउंड-माउंटेड) तथा 2 मेगावाट पवन ऊर्जा की स्थापित क्षमता चालू है।
  • भावी विस्तार योजना: इसके अतिरिक्त 2 मेगावाट सौर ऊर्जा, 17 मेगावाट पवन ऊर्जा परियोजना और 5 मेगावाट-घंटा (MWh) बैटरी स्टोरेज सिस्टम पाइपलाइन में हैं।

महत्व:

  • अमृत काल विज़न 2047 के साथ संरेखण: यह उपलब्धि भारत सरकार के मैरीटाइम अमृत काल विज़न 2047 और ‘हरित नौका’ (Harit Nauka) पहल के लक्ष्यों को पूरा करने की दिशा में मील का पत्थर है।
  • कार्बन सघनता में कमी (Carbon Reduction): बंदरगाह की पहली आधिकारिक सततता रिपोर्ट (Sustainability Report 2026) के अनुसार, इन प्रयासों से कुल शुद्ध कार्बन उत्सर्जन में 45% की कमी आई है और प्रति टन कार्गो पर कार्बन सघनता लगभग आधी (50% कम) हो गई है।
  • हरित वित्तपोषण और कार्बन क्रेडिट: यह बंदरगाह अपने नवीकरणीय ऊर्जा पोर्टफोलियो से कार्बन क्रेडिट (Carbon Credits) उत्पन्न करके ₹50 करोड़ तक का अतिरिक्त राजस्व अर्जित करने की दिशा में काम कर रहा है, जो ‘हरित अर्थव्यवस्था’ (Green Economy) का बेहतरीन उदाहरण है।
  • वैश्विक मानक (Global Benchmark): भारत के अन्य 11 प्रमुख बंदरगाहों के लिए वी.ओ.सी. पोर्ट ने पूर्ण कार्बन तटस्थता (Carbon Neutrality) हासिल करने का एक अनुकरणीय मॉडल प्रस्तुत किया है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

प्रश्न 1: V.O.C. Port भारत का पहला Scope-2 emission-free port कैसे बना?

उत्तर: वित्तीय वर्ष 2025-26 में अपनी कुल बिजली आवश्यकताओं का 93.89% सौर और पवन ऊर्जा जैसे स्वदेशी नवीकरणीय स्रोतों से पूरा करके यह स्कोप-2 मुक्त बना।

प्रश्न 2: Scope-2 emissions क्या होती हैं?

उत्तर: ये वे अप्रत्यक्ष पर्यावरण उत्सर्जन (Indirect Greenhouse Gas Emissions) हैं, जो किसी परिसर द्वारा बाहर से खरीदकर उपयोग की जाने वाली बिजली या ऊर्जा के कारण पैदा होते हैं। 

प्रश्न 3: V.O. Chidambaranar Port कहां स्थित है?

उत्तर: यह रणनीतिक प्रमुख बंदरगाह भारत के दक्षिणी राज्य तमिलनाडु के थूथुकुडी (तूतीकोरिन) में मन्नार की खाड़ी के तट पर स्थित है।

प्रश्न 4: VOC Port ने Scope-2 emissions को कैसे खत्म किया?

उत्तर: बंदरगाह ने 7.04 मेगावाट सौर ऊर्जा और 2 मेगावाट पवन ऊर्जा का ऐसा ढांचा तैयार किया जिसका उत्पादन इसके कुल बिजली उपभोग से अधिक हो गया।

प्रश्न 5: Port को renewable energy से क्या फायदा हुआ?

उत्तर: इससे बंदरगाह का शुद्ध कार्बन उत्सर्जन 45% कम हो गया, बिजली खर्च में भारी बचत हुई और यह कार्बन क्रेडिट से राजस्व कमाने के योग्य बना।

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