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India BioE3 Policy- जानिए पॉलिसी के बारे में, भारत के बायो क्षेत्र के लिए इसका महत्व

India BioE3 Policy- जानिए पॉलिसी के बारे में, भारत के बायो क्षेत्र के लिए इसका महत्व

India BioE3 Policy

संदर्भ:

हाल ही में भारत की बायोE3 नीति (India BioE3 Policy) ने अपने सफल क्रियान्वयन के अंतर्गत जैव-विनिर्माण केंद्रों की स्थापना और नवीन बायोफाउंड्री नेटवर्क की शुरुआत करके देश की टिकाऊ हरित अर्थव्यवस्था को एक नई दिशा प्रदान की. 

बायोE3 नीति (BioE3 Policy) के बारे में:

  • परिचय: यह नीति पारंपरिक जीवाश्म-आधारित (Fossil-based) और उपभोग-आधारित विनिर्माण प्रणालियों के स्थान पर पुनर्योजी सिद्धांतों (Regenerative Principles) पर आधारित “उच्च प्रदर्शन जैव-विनिर्माण” (High-Performance Biomanufacturing) को बढ़ावा देने की भारत की पहली समर्पित राष्ट्रीय जैव प्रौद्योगिकी नीति है.
    • बायोE3 का अर्थ है अर्थव्यवस्था, पर्यावरण और रोजगार के लिए जैव प्रौद्योगिकी (Biotechnology for Economy, Environment, and Employment). 
  • लागू: केंद्रीय मंत्रिमंडल द्वारा इस नीति को आधिकारिक मंजूरी 24 अगस्त 2024 को दी गई थी. 
  • नोडल मंत्रालय: यह नीति भारत सरकार के विज्ञान और प्रौद्योगिकी मंत्रालय (Ministry of Science & Technology) के जैव प्रौद्योगिकी विभाग (Department of Biotechnology – DBT) द्वारा कार्यान्वित की जा रही है.
  • सहयोगी संस्था: इसकी सार्वजनिक क्षेत्र की उद्यम इकाई जैव प्रौद्योगिकी उद्योग अनुसंधान सहायता परिषद (BIRAC) स्टार्ट-अप्स और उद्योगों को ढांचागत सहयोग देने में मुख्य भागीदार है.
  • प्रमुख विषयगत क्षेत्र: इस नीति के कुशल संचालन के लिए 6 मुख्य विषयगत क्षेत्रों की पहचान की गई है:
  • जैव-आधारित रसायन और एंजाइम (Bio-based Chemicals and Enzymes)
  • कार्यात्मक खाद्य पदार्थ और स्मार्ट प्रोटीन (Functional Foods and Smart Proteins)
  • सटीक चिकित्सा/बायो-थेराप्यूटिक्स (Precision Medicine)
  • जलवायु-अनुकूल कृषि (Climate-Resilient Agriculture)
  • जैव-ईंधन और कार्बन कैप्चर (Biofuels and Carbon Capture)
  • समुद्री और चरम जैव संसाधन (Marine and Extreme Bio-resources)
  • घटक:
    • जैव-विनिर्माण और जैव फाउंड्री का विकास: भारत में स्वदेशी विनिर्माण क्षमताओं को बढ़ाने के लिए अत्याधुनिक बायोफाउंड्री (Biofoundries) और जैव-विनिर्माण केंद्रों (Bio-manufacturing Hubs) का एक एकीकृत जाल स्थापित किया जा रहा है.
    • बायो-एआई हब (Bio-AI Hubs): यह नीति उन्नत जैव प्रौद्योगिकी (Biotechnology) प्रणालियों के साथ कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) और डिजिटलीकरण का समन्वय स्थापित करती है, जिससे जैविक अनुसंधान की गति तीव्र हो सके.
    • सह-वित्तपोषण मॉडल: विनिर्माण क्षेत्र को आर्थिक रूप से व्यवहार्य बनाने के लिए शोध संस्थानों और निजी क्षेत्र के बीच एक पारदर्शी मूल्यांकन और 70:30 सह-वित्तपोषण मॉडल (70:30 Co-funding Model) लागू किया गया है.
    • केंद्र-राज्य साझेदारी: देश के प्रत्येक राज्य में बायोE3 सेल (BioE3 Cells) की स्थापना की जा रही है ताकि क्षेत्रीय संसाधनों के आधार पर स्थानीय स्तर पर जैव-उत्पादों का व्यावसायीकरण (Commercialization) किया जा सके.
    • नैतिक जैव सुरक्षा और विनियामक संरेखण: बड़े पैमाने पर सूक्ष्मजीवों और जैविक अणुओं के उत्पादन के दौरान वैश्विक स्तर के सुरक्षा मानकों (Global Regulatory Alignment) का कड़ाई से पालन सुनिश्चित किया जाता है. 
  • उपलब्धियां:
    • 300 बिलियन डॉलर का लक्ष्य: वर्ष 2014 में मात्र 10 बिलियन डॉलर की भारतीय जैव-अर्थव्यवस्था (Bioeconomy India) वर्ष 2024 में 130 बिलियन डॉलर को पार कर चुकी है और इस नीति के माध्यम से वर्ष 2030 तक 300 बिलियन अमेरिकी डॉलर का विशाल लक्ष्य प्राप्त करने की दिशा में अग्रसर है.
    • नेशनल बायोफाउंड्री नेटवर्क का शुभारंभ: भारत के प्रथम राष्ट्रीय बायोफाउंड्री नेटवर्क (National Biofoundry Network) को सफलतापूर्वक लॉन्च किया गया है, जो शोध से लेकर प्रोटोटाइप विकास तक की सुगमता प्रदान करता है.
    • युवाओं के लिए बायोE3 चैलेंज: देश के नागरिकों और स्टार्ट-अप्स में नवाचार को प्रेरित करने के लिए “डिज़ाइन रोगाणु, अणु और अधिक” (Design Microbes, Molecules & More) थीम के साथ मासिक BioE3 चैलेंज का संचालन किया जा रहा है.
    • अनुसंधानों को प्रोत्साहन: विभिन्न विषयगत कार्यक्षेत्रों के तहत अब तक 2,000 से अधिक धन-पोषण प्रस्ताव प्राप्त हुए हैं और कई अग्रणी बायो-स्टार्टअप्स को बाजार तक पहुंच प्रदान की गई है.

महत्व:

  • नेट जीरो उत्सर्जन का लक्ष्य: यह नीति कार्बन कैप्चर और उपयोग प्रणालियों को मजबूत करके भारत के ‘नेट जीरो’ (Net Zero) कार्बन फुटप्रिंट लक्ष्य को वर्ष 2047 तक समय से पहले हासिल करने में मदद करेगी.
  • कौशल विकास और रोजगार: बायो-मैन्युफैक्चरिंग केंद्रों की स्थापना से ग्रामीण और अर्ध-शहरी क्षेत्रों में जैव-प्रौद्योगिकी क्षेत्र के तकनीशियनों और वैज्ञानिकों के लिए उच्च मूल्य वाले हजारों नए रोजगार सृजित होंगे.
  • सर्कुलर बायोइकोनॉमी (Circular Bioeconomy): कृषि अवशेषों, औद्योगिक अपशिष्टों और कचरे को मूल्यवान जैव-उत्पादों (Bio-Based Products) में परिवर्तित कर यह नीति देश में पर्यावरण के अनुकूल टिकाऊ जीवन शैली (Mission LiFE) को बढ़ावा देती है.
  • आयात निर्भरता में कमी: कच्चे तेल, पेट्रोकेमिकल्स और सिंथेटिक रसायनों के आयात पर भारत की रणनीतिक निर्भरता को जैविक विकल्पों (Bio-Based Alternatives) द्वारा प्रतिस्थापित कर आत्मनिर्भर भारत की संकल्पना को साकार किया जा सकता है. 

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

प्रश्न 1: भारत की BioE3 Policy क्या है?

उत्तर: यह उच्च प्रदर्शन वाले जैव-विनिर्माण (Biomanufacturing India) को बढ़ावा देने और जीवाश्म ईंधन के स्थान पर टिकाऊ जैविक उत्पादों के उपयोग को प्रोत्साहित करने की राष्ट्रीय नीति है. 

प्रश्न 2: BioE3 का पूरा नाम क्या है?

उत्तर: इसका पूरा नाम Biotechnology for Economy, Environment and Employment (अर्थव्यवस्था, पर्यावरण और रोजगार के लिए जैव प्रौद्योगिकी) है.

प्रश्न 3: BioE3 Policy का उद्देश्य क्या है?

उत्तर: इसका मुख्य उद्देश्य देश की जैव-अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देना, पर्यावरण चुनौतियों से निपटना और जैव प्रौद्योगिकी उद्योग (Biotech Industry India) में व्यापक रोजगार पैदा करना है. 

प्रश्न 4: भारत सरकार ने BioE3 Policy क्यों शुरू की?

उत्तर: देश में जलवायु परिवर्तन के शमन, खाद्य सुरक्षा, कार्बन उत्सर्जन में कमी लाने और भारत को वैश्विक जैव-विनिर्माण का हब बनाने के लिए इसे शुरू किया गया है.

प्रश्न 5: BioE3 Policy से भारत की Bioeconomy को क्या फायदा होगा?

उत्तर: इसके माध्यम से भारत की जैव-अर्थव्यवस्था (Bio Economy Growth India) को गति मिलेगी, जिससे वर्ष 2030 तक 300 बिलियन डॉलर के लक्ष्य को आसानी से प्राप्त किया जा सकेगा. 

प्रश्न 6: Biomanufacturing क्या है?

उत्तर: सूक्ष्मजीवों, पौधों और जानवरों की कोशिकाओं का उपयोग करके व्यावसायिक स्तर पर उपयोगी दवाओं, रसायनों और सामग्रियों को न्यूनतम कार्बन फुटप्रिंट के साथ विकसित करने की उन्नत प्रक्रिया जैव-विनिर्माण (Biomanufacturing) कहलाती है. 

प्रश्न 7: BioE3 Policy से Biotechnology Industry को कैसे बढ़ावा मिलेगा?

उत्तर: यह राष्ट्रीय बायोफाउंड्री नेटवर्क, बायो-एआई हब और साझा बुनियादी ढांचा सुविधाएं प्रदान करके देश के बायो-स्टार्टअप्स और अनुसंधान को मजबूती प्रदान करती है.

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