केकड़े की नई प्रजाति “Ghatiana karnataka” की खोज
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संदर्भ:
हाल ही में कर्नाटक स्थित मुकांबिका वन्यजीव अभयारण्य (Mookambika Wildlife Sanctuary) में मीठे पानी के केकड़े की दुर्लभ और नई प्रजाति खोजी गई। इस नई प्रजाति का वैज्ञानिक नाम घाटियाना कर्नाटक (Ghatiana karnataka) रखा गया है।
केकड़े की नई प्रजाति “Ghatiana karnataka” के बारे में:
- खोज स्थल: यह नवीन प्रजाति कर्नाटक के उडुपी जिले (Upi District) में कोल्लूर के निकट माविनाकारु नामक स्थान पर पाई गई है, जो मुकांबिका वन्यजीव अभयारण्य के अंतर्गत आता है.
- खोजकर्ता: इस प्रजाति की खोज वन्यजीव प्रभाग के बीट वन रक्षक (Beat Forester) अजमेर के. द्वारा अपने क्षेत्रीय गश्त के दौरान की गई.
- वैज्ञानिक नाम: Ghatiana karnataka sp. nov. (सामान्य नाम: कर्नाटक घाट केकड़ा).
- वर्गीकरण: यह केकड़ा गेकार्सिनुसिडे (Gecarcinucidae) परिवार और घाटियाना (Ghatiana) वंश से संबंधित है। इस वंश की स्थापना वर्ष 2014 में हुई थी।
- यह पश्चिमी घाट (Western Ghats) में खोजी गई घाटियाना वंश की 15वीं प्रजाति है। इस वंश की 15 प्रजातियों में से 8 प्रजातियां केवल कर्नाटक में ही स्थानिक (Endemic) हैं।
- विशेषताएं:
- अद्वितीय रंग (Distinct Live Coloration): वयस्क नर केकड़े का मुख्य शरीर (Carapace) गहरे बैंगनी (Dark Purple) रंग का होता है, जिसके अग्र भाग पर हल्के गुलाबी से लेकर मौव (Mauve) रंग का स्पष्ट ‘V’ आकार का निशान होता है। इसके पंजे (Claws) हल्के गुलाबी (Light Pink) और उँगलियाँ पूरी तरह सफेद होती हैं। मादाओं का रंग थोड़ा भिन्न, स्लेटी-बैंगनी (Grey-Violet) होता है।
- शारीरिक आकार: नर होलोटाइप (Holotype) के कैरापेस की चौड़ाई लगभग 21.3 मिमी मापी गई है, जबकि मादाओं की चौड़ाई 21.1 से 24.4 मिमी के बीच होती है।
- बारहमासी उपस्थिति: यह सभी मौसमों (All Seasons) में सक्रिय अवस्था में रिकॉर्ड की गई है। अन्य घाटियाना प्रजातियाँ आमतौर पर शुष्क मौसम में छिप जाती हैं और उन्हें ढूंढना बेहद कठिन होता है।
- सूक्ष्म-आवास (Micro-habitat): यह केकड़ा अत्यधिक नमी वाले वन वातावरण पर निर्भर रहता है। यह बारहमासी जलधाराओं (Perennial Streams) के समीप, लेटराइट चट्टानों के छिद्रों, बोल्डरों के बीच की दरारों और नम वृक्षों के कोटरों (Tree Cavities) के भीतर निवास करता है।
- यह मुख्य रूप से पश्चिमी घाट के उष्णकटिबंधीय सदाबहार और अर्ध-सदाबहार वनों (Tropical Evergreen and Semi-evergreen Forests) में पाया जाता है।
- आहार: घाटियाना वंश के अन्य केकड़ों की तरह यह भी सर्वाहारी (Omnivorous) होता है। यह सड़ती हुई पत्तियों, काई (Moss), छोटे कीड़ों और दीमकों को अपना आहार बनाता है।
- पारिस्थितिकी महत्व:
- जैव-सूचक प्रजाति (Bio-indicator Species): यह प्रजाति पर्यावरणीय परिवर्तनों और प्रदूषण के प्रति अत्यधिक संवेदनशील है। वैज्ञानिक रूप से इसकी उपस्थिति इस बात का प्रतीक है कि वह वन पारिस्थितिकी तंत्र पूरी तरह से अदूषित, प्राचीन और स्वस्थ (Pristine and Undisturbed Forest Ecosystem) है।
- पारिस्थितिक तंत्र की कड़ी: यह मीठे पानी के खाद्य जाल (Freshwater Food Web) में पोषक तत्वों के चक्रण (Nutrient Cycling) को बनाए रखने में मदद करता है।
विशेष: मुकांबिका वन्यजीव अभयारण्य कर्नाटक के उडुपी जिले में पश्चिमी घाट पर स्थित है। यह लगभग 370 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में फैला है।
- इसका नाम प्रसिद्ध कोल्लूर मुकांबिका मंदिर की देवी के नाम पर रखा गया है।
- यह पश्चिमी घाट का एक समृद्ध जैव विविधता क्षेत्र है। इसके उत्तर में शरावती और दक्षिण में सोमेश्वर अभयारण्य है।
- इसके बीच में पवित्र कोदाचद्री चोटी स्थित है। यहाँ से चक्र और सौपर्णिका नदियाँ बहती हैं।
- कुशाली और बेलकल तीर्थ जैसे सुंदर झरने यहाँ मौजूद हैं।
- पेड़-पौधे: सदाबहार और अर्ध-सदाबहार घने जंगल।
- जानवर: बाघ, तेंदुआ, सुस्त भालू, गौर और जंगली सूअर।
- दुर्लभ प्रजातियाँ: शेर-पूंछ वाला मकाक और स्लेंडर लोरिस।
- पक्षी और सरीसृप: किंग कोबरा, अजगर और विभिन्न प्रकार के हॉर्नबिल।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)
प्रश्न 1: Ghatiana karnataka क्या है?
उत्तर: यह भारत के केंद्रीय पश्चिमी घाट (Central Western Ghats) क्षेत्र में खोजी गई मीठे पानी के केकड़े (Freshwater Crab) की एक नई प्रजाति है।
प्रश्न 2: Ghatiana karnataka Crab की नई प्रजाति कहां खोजी गई?
उत्तर: यह दुर्लभ प्रजाति कर्नाटक के उडुपी जिले में स्थित मुकांबिका वन्यजीव अभयारण्य के माविनाकारु वन क्षेत्र में खोजी गई है।
प्रश्न 3: इस नई Crab Species की खोज किसने की?
उत्तर: इस केकड़े की खोज मुकांबिका वन्यजीव अभयारण्य के एक स्थानीय बीट वन रक्षक (Beat Forester) अजमेर के. द्वारा गश्त के दौरान की गई।
प्रश्न 4: Ghatiana karnataka को नई प्रजाति क्यों माना गया?
उत्तर: इसके अनूठे गहरे बैंगनी शरीर, हल्के गुलाबी पंजों और विशिष्ट प्रजनन अंगों (Gonopod) की संरचना के कारण यह अपने वंश की अन्य 14 प्रजातियों से भिन्न है।
प्रश्न 5: यह Crab Species किस क्षेत्र में पाई जाती है?
उत्तर: यह प्रजाति केवल कर्नाटक के पश्चिमी घाट के सदाबहार वनों में बारहमासी जलधाराओं और लेटराइट चट्टानों के छिद्रों में पाई जाती है।
