31st Southern Zonal Council Meeting 2026- परिचय, वैधानिक आधार, कार्य एवं मुख्य निष्कर्ष
संदर्भ:
हाल ही में तमिलनाडु के महाबलीपुरम (कोवलम) में 31वीं दक्षिणी क्षेत्रीय परिषद बैठक 2026 (31st Southern Zonal Council Meeting 2026) का सफल आयोजन किया गया। इस उच्च-स्तरीय बैठक की अध्यक्षता केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने की।
क्षेत्रीय परिषद (Zonal Councils) क्या होती है?
- परिचय: क्षेत्रीय परिषदें (Zonal Councils) राज्यों के बीच आपसी सहयोग, समन्वय और केंद्र-राज्य संबंधों को बेहतर बनाने के लिए बनाई गई वैधानिक (स्टैच्यूटरी) संस्थाएं हैं।
- अधिनियम: इनका गठन संसद द्वारा पारित राज्य पुनर्गठन अधिनियम, 1956 (States Reorganisation Act, 1956) के भाग-III (धारा 15 से 22) के अंतर्गत किया गया है।
- प्रकृति: ये पूर्ण रूप से सलाहकार निकाय (Advisory Bodies) हैं, जिनका उद्देश्य अंतर-राज्यीय सहयोग को बढ़ावा देना है।
- क्षेत्रीय परिषदें: मूल अधिनियम के तहत देश को पांच क्षेत्रों में विभाजित किया गया था। बाद में एक और परिषद जोड़ी गई:
- उत्तरी क्षेत्रीय परिषद (Northern Zonal Council)
- केंद्रीय क्षेत्रीय परिषद (Central Zonal Council)
- पूर्वी क्षेत्रीय परिषद (Eastern Zonal Council)
- पश्चिमी क्षेत्रीय परिषद (Western Zonal Council)
- दक्षिणी क्षेत्रीय परिषद (Southern Zonal Council)
- विशेष नोट: पूर्वोत्तर राज्यों के लिए एक अलग अधिनियम के तहत पूर्वोत्तर परिषद (North Eastern Council – NEC) का गठन 1971 में किया गया था।
- दक्षिणी क्षेत्रीय परिषद: दक्षिणी परिषद (Southern Zonal Council) के अंतर्गत निम्नलिखित राज्य और केंद्र शासित प्रदेश शामिल हैं:
- राज्य: तमिलनाडु (Tamil Nadu), आंध्र प्रदेश (Andhra Pradesh), कर्नाटक (Karnataka), केरल (Kerala) और तेलंगाना (Telangana)।
- केंद्र शासित प्रदेश: पुडुचेरी, अंडमान और निकोबार द्वीप समूह तथा लक्षद्वीप।
- संरचना और संचालन:
- अध्यक्ष (Chairman): भारत सरकार के केंद्रीय गृह मंत्री (Union Home Minister) सभी क्षेत्रीय परिषदों के पदेन अध्यक्ष होते हैं।
- उपाध्यक्ष (Vice-Chairman): मेजबान राज्य के मुख्यमंत्री उस वर्ष के लिए इसके उपाध्यक्ष होते हैं। यह पद रोटेशन (घूर्णन) पद्धति पर काम करता है।
- इस 31वीं बैठक में तमिलनाडु के मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय उपाध्यक्ष थे।
- सदस्य: प्रत्येक राज्य के मुख्यमंत्री और राज्यपाल/प्रशासक द्वारा नामित दो अन्य वरिष्ठ मंत्री इसमें शामिल होते हैं।
- सलाहकार: नीति आयोग द्वारा नामित एक प्रतिनिधि और प्रत्येक राज्य के मुख्य सचिव इसके सलाहकार के रूप में कार्य करते हैं।
- कार्य एवं उत्तरदायित्व:
- अंतर-राज्यीय समन्वय (Inter-State Coordination): दो या दो से अधिक राज्यों के बीच आर्थिक और सामाजिक योजना, सीमा विवाद, भाषाई अल्पसंख्यकों और अंतर-राज्यीय परिवहन से जुड़े सामान्य हितों के मामलों पर चर्चा करना।
- विवाद समाधान: केंद्र और राज्यों (Centre-State Coordination Meeting) या पड़ोसी राज्यों के बीच के तनावों को सौहार्दपूर्ण संवाद के माध्यम से सुलझाना।
- राष्ट्रीय सुरक्षा: तटीय सुरक्षा, आतंकवाद और साइबर अपराध जैसे साझा सुरक्षा खतरों से निपटने के लिए क्षेत्रीय रणनीति बनाना।
31वीं दक्षिणी क्षेत्रीय परिषद बैठक 2026 के मुख्य हाइलाइट्स (Key Highlights of 31st SZC Meeting 2026):
- मेकेदातु परियोजना विवाद (Mekedatu Project Dispute): बैठक में कर्नाटक (Karnataka) ने कावेरी नदी पर प्रस्तावित मेकेदातु बांध परियोजना के त्वरित क्रियान्वयन का मुद्दा उठाया।
- तमिलनाडु ने इस पर अपनी पुरानी चिंताओं को दोहराया, जिसके बाद केंद्र ने तकनीकी समाधान के लिए एक समिति गठित करने का आश्वासन दिया।
- मुल्लापेरियार बांध मुद्दा (Mullaperiyar Dam Issue): केरल (Kerala) ने सुरक्षा चिंताओं का हवाला देते हुए मुल्लापेरियार बांध के स्थान पर एक नए बांध के निर्माण का प्रस्ताव रखा। इस पर तमिलनाडु के साथ विस्तृत तकनीकी समीक्षा करने पर सहमति बनी।
- कृष्णा नदी जल विवाद: आंध्र प्रदेश और तेलंगाना के बीच कृष्णा नदी के जल बंटवारे को लेकर जारी मतभेदों के प्रशासनिक समाधान पर चर्चा हुई।
- परिसीमन और लोकसभा सीटों का मुद्दा: कर्नाटक के मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार ने परिषद के समक्ष एक महत्वपूर्ण राजनीतिक प्रस्ताव रखा। उन्होंने आग्रह किया कि आगामी परिसीमन (Delimitation) प्रक्रिया में दक्षिण भारतीय राज्यों के हितों की रक्षा के लिए लोकसभा की कुल सीट संख्या (543 सीटों) को 1971 की जनगणना के आधार पर अगले 25 वर्षों के लिए यथावत रखा जाए।
- तटीय और क्षेत्रीय सुरक्षा: दक्षिणी राज्यों की लंबी तटरेखा को देखते हुए सागर सुरक्षा और तटीय पुलिसिंग तंत्र को और आधुनिक बनाने पर सहमति बनी।
- साइबर सुरक्षा नेटवर्क: देश में बढ़ते डिजिटल लेन-देन को देखते हुए दक्षिणी राज्यों के बीच वित्तीय साइबर वित्तीय धोखाधड़ी को रोकने के लिए एक एकीकृत रियल-टाइम डेटा शेयरिंग नेटवर्क स्थापित करने का निर्णय लिया गया।
- प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण): इस योजना के तहत दक्षिणी राज्यों में लंबित आवासों के निर्माण को गति देने और केंद्रीय फंड के समय पर हस्तांतरण को लेकर व्यापक सहमति बनी।
- आंध्र प्रदेश पुनर्गठन अधिनियम: वर्ष 2014 के विभाजन के बाद आंध्र प्रदेश और तेलंगाना के बीच परिसंपत्तियों (Assets) के लंबित बंटवारे को तेजी से अंतिम रूप देने के निर्देश दिए गए।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)
प्रश्न 1: 31वीं दक्षिणी क्षेत्रीय परिषद बैठक 2026 कहां आयोजित हुई?
उत्तर: यह महत्वपूर्ण बैठक 20 अगस्त 2026 को तमिलनाडु के चेंगलपट्टू जिले के अंतर्गत महाबलीपुरम (कोवलम) में आयोजित की गई।
प्रश्न 2: 31वीं Southern Zonal Council Meeting की अध्यक्षता किसने की?
उत्तर: इस बैठक की अध्यक्षता केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने की, जो इन परिषदों के पदेन अध्यक्ष हैं।
प्रश्न 3: Southern Zonal Council Meeting में कौन-कौन से राज्य शामिल हुए?
उत्तर: इसमें मुख्य रूप से तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश, कर्नाटक, केरल, तेलंगाना और केंद्र शासित प्रदेश पुडुचेरी के मुख्यमंत्रियों एवं वरिष्ठ मंत्रियों ने भाग लिया।
प्रश्न 4: बैठक में किन प्रमुख मुद्दों पर चर्चा हुई?
उत्तर: बैठक में अंतर-राज्यीय नदी जल विवाद, लोकसभा परिसीमन, तटीय सुरक्षा, साइबर अपराध नियंत्रण और आंध्र प्रदेश पुनर्गठन अधिनियम के लंबित मुद्दों पर चर्चा हुई।
प्रश्न 5: Karnataka ने Mekedatu Project का मुद्दा क्यों उठाया?
उत्तर: कर्नाटक ने बेंगलुरु शहर की पेयजल आवश्यकताओं को पूरा करने और बिजली उत्पादन के लिए मेकेदातु संतुलित जलाशय परियोजना (Mekedatu Project) को शीघ्र मंजूरी देने की मांग उठाई।
प्रश्न 6: Kerala ने Mullaperiyar Dam को लेकर क्या प्रस्ताव रखा?
उत्तर: केरल ने 100 वर्ष से अधिक पुराने मुल्लापेरियार बांध (Mullaperiyar Dam) की ढांचागत सुरक्षा को देखते हुए उसके स्थान पर एक नया और सुरक्षित बांध बनाने का प्रस्ताव रखा।
प्रश्न 7: Southern Zonal Council का मुख्य उद्देश्य क्या है?
उत्तर: इसका मुख्य उद्देश्य केंद्र और राज्यों के बीच सहकारी संघवाद (Cooperative Federalism) को मजबूत करना तथा आपसी विवादों को बातचीत से सुलझाना है।
प्रश्न 8: बैठक में Centre-State Relations से जुड़े किन मुद्दों पर चर्चा हुई?
उत्तर: इसमें केंद्रीय योजनाओं के सुचारू क्रियान्वयन, परिसीमन के वित्तीय प्रभावों और आपदा प्रबंधन में केंद्रीय सहयोग जैसे महत्वपूर्ण आयामों पर व्यापक चर्चा हुई।
