Elephant Corridor Protection- हाथी गलियारा के संरक्षण हेतु सर्वोच्च न्यायालय के निर्देश
संदर्भ:
हाल ही में सर्वोच्च न्यायालय (Supreme Court of India) ने वन्यजीव संरक्षण की दिशा में ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए केंद्र सरकार को देश भर में हाथी गलियारों (Elephant Corridors) का नए सिरे से राष्ट्रव्यापी सर्वेक्षण (Nationwide Survey) करने का निर्देश दिया। इसका उद्देश्य Elephant Corridor Protection को बढ़ावा देना है।
हाथी गलियारा (Elephant Corridor): परिभाषा, भौगोलिक स्थिति और आवश्यकता
- परिचय: हाथी गलियारे (Elephant Corridors) खंडित वन क्षेत्रों या दो बड़े आवासों को जोड़ने वाली संकीर्ण आवासीय पट्टियाँ (Narrow Habitat Strips) हैं।
- ये मार्ग हाथियों को बिना किसी मानवीय बाधा के एक सुरक्षित आवागमन (Safe Passage) प्रदान करते हैं।
- वर्तमान स्थिति: ‘एलीफेंट कॉरिडोर, भारत, 2023’ (Elephant Corridors India) की आधिकारिक रिपोर्ट के अनुसार, वर्तमान में 15 हाथी बहुल राज्यों में 150 प्रमाणित हाथी गलियारे हैं। वर्ष 2010 में इनकी संख्या मात्र 88 थी।
- पश्चिम बंगाल में सबसे अधिक 26 गलियारे हैं।
- इस राष्ट्रीय नेटवर्क में 19 अंतर-राज्यीय कॉरिडोर (Inter-State Corridors) और 6 अंतर्राष्ट्रीय सीमा पार कॉरिडोर (Trans-national Corridors) शामिल हैं, जो भारत को नेपाल और भूटान से जोड़ते हैं।
- भारत में हाथियों के संरक्षण के लिए 14 प्रमुख राज्यों में 80,777 वर्ग किमी क्षेत्र में फैले 33 हाथी अभ्यारण्य (Elephant Reserves) हैं।
- समकालिक अखिल भारतीय हाथी जनसंख्या आकलन के अनुसार, वर्तमान में भारत में जंगली हाथियों की अनुमानित संख्या 22,446 है।
- वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972, भारतीय हाथी को इस कानून की अनुसूची-I (Schedule I) में रखा गया है, जो इन्हें भारत में विधिक संरक्षण का सर्वोच्च स्तर प्रदान करता है।
- आवश्यकता:
- आनुवंशिक विविधता (Genetic Diversity): यदि हाथी एक ही संकुचित जंगल में कैद रहेंगे, तो अंतःप्रजनन (Inbreeding) से उनकी आनुवंशिक गुणवत्ता कमजोर होगी। कॉरिडोर उन्हें अन्य झुंडों से मिलने और आनुवंशिक आदान-प्रदान (Genetic Exchange) की सुविधा देते हैं।
- संसाधनों की खोज: हाथी एक खानाबदोश और विशाल जीव है, जिसे भोजन और प्रचुर पानी (Food and Water) के लिए मौसमी प्रवास (Seasonal Migration) करना पड़ता है।
- कीस्टोन प्रजाति (Keystone Species): हाथी जंगलों के ‘इंजीनियर’ हैं। उनके प्रवास मार्ग से जंगलों में नए रास्तों का निर्माण होता है, बीजों का प्रकीर्णन (Seed Dispersal) होता है और पारिस्थितिक तंत्र (Ecosystem) संतुलित रहता है।
सर्वोच्च न्यायालय की हालिया टिप्पणी और निर्देश:
मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत (Chief Justice Surya Kant), न्यायमूर्ति जोयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहाना की तीन सदस्यीय पीठ ने 17 अगस्त 2026 को हाथियों के प्राकृतिक मार्गों में बाधाओं (Elephant Corridor Barriers) से जुड़े एक मामले पर सुनवाई करते हुए कड़े निर्देश जारी किए:
- कोर्ट ने साफ तौर पर कहा कि कोई भी राज्य केवल फसल के नुकसान (Crop Damage) या मानव-वन्यजीव संघर्ष (Human-Elephant Conflict) का बहाना बनाकर हाथियों के पारंपरिक मार्गों को अवरुद्ध नहीं कर सकता है।
- सीजेआई सूर्यकांत ने टिप्पणी की: “हाथी एक राज्य की सीमा तक सीमित नहीं रहते; वे लंबी दूरी तय करते हैं। एक राज्य उनके रास्ते में आकर ब्लॉक नहीं बना सकता”।
- कोर्ट ने हाथियों को भगाने के लिए स्थानीय स्तर पर इस्तेमाल की जाने वाली क्रूर प्रथाओं जैसे लोहे की नुकीली छड़ें (Spikes), जलती हुई मशालें (Mashaals) और आग के गोले (Fireballs) फेंकने पर तत्काल प्रभाव से पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया है।
- राज्यों द्वारा जंगलों में बनाई गई लोहे की बाड़, दीवारें और गहरी खाइयाँ (Walls and trenches) हाथियों की मौत और उनके भटकाव का कारण बनती हैं। कोर्ट ने पर्यावरण मंत्रालय को इन्हें चिह्नित कर हटाने का आदेश दिया।
- सर्वोच्च न्यायालय ने केंद्रीय पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय (MoEFCC) को 6 सप्ताह के भीतर एक नए सिरे से राष्ट्रव्यापी सर्वेक्षण (Fresh Nationwide Survey) पूरा करने और व्यापक अनुपालन रिपोर्ट सौंपने का निर्देश दिया।
- इससे पहले सुप्रीम कोर्ट ने वर्ष 2018 और 2020 के अपने ऐतिहासिक फैसलों में तमिलनाडु के सिगुर हाथी कॉरिडोर (Segur Elephant Corridor) में बने अवैध वाणिज्यिक रिसॉर्ट्स और निर्माणों को ध्वस्त करने के मद्रास हाई कोर्ट के आदेश को बरकरार रखा। कोर्ट ने तब भी ‘राइट ऑफ पैसेज’ (Right of Passage/आवागमन का अधिकार) को प्रकृति का मौलिक नियम माना था।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)
प्रश्न 1: Supreme Court Elephant Corridor Conservation मामले में क्या निर्देश दिए गए?
उत्तर: सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को हाथी गलियारों का राष्ट्रव्यापी सर्वेक्षण करने, सभी अवैध अवरोध हटाने और आग के गोलों जैसी क्रूर प्रथाओं को प्रतिबंधित करने का निर्देश दिया है।
प्रश्न 2: Supreme Court ने Elephant Corridors की सुरक्षा पर जोर क्यों दिया?
उत्तर: क्योंकि जंगलों के विखंडन, रेलवे लाइनों, दीवारों और मानवीय अतिक्रमण (Elephant Corridor Encroachment) के कारण हाथियों के प्राकृतिक मार्ग अवरुद्ध हो रहे हैं, जिससे उनकी मृत्यु हो रही है।
प्रश्न 3: Elephant Corridor क्या होता है?
उत्तर: यह दो या दो से अधिक बड़े वन आवासों (Protected areas) को जोड़ने वाली एक संकीर्ण भू-पट्टी होती है, जिसका उपयोग हाथी सुरक्षित प्रवास के लिए करते हैं।
प्रश्न 4: Elephant Corridors Elephants के लिए क्यों जरूरी हैं?
उत्तर: हाथियों के मौसमी प्रवास, भोजन-पानी की खोज, और विभिन्न झुंडों के बीच आनुवंशिक आदान-प्रदान (Genetic exchange) को बनाए रखने के लिए कॉरिडोर आवश्यक हैं।
प्रश्न 5: Supreme Court ने Elephant Movement को लेकर क्या कहा?
उत्तर: कोर्ट ने स्पष्ट किया कि हाथियों का आवागमन अंतर-राज्यीय और अंतर्राष्ट्रीय होता है, इसलिए कोई भी राज्य अपनी सीमा पर उनके प्राकृतिक मार्ग को नहीं रोक सकता।
प्रश्न 8: Elephant Corridor Conservation से Human-Elephant Conflict कैसे कम हो सकता है?
उत्तर: यदि कॉरिडोर सुरक्षित और अतिक्रमण मुक्त रहेंगे, तो हाथी मानव बस्तियों और खेतों में नहीं जाएंगे, जिससे जान-माल का नुकसान स्वतः कम हो जाएगा।
प्रश्न 8: भारत में कितने Elephant Corridors हैं?
उत्तर: पर्यावरण मंत्रालय की वर्ष 2023 की नवीनतम रिपोर्ट के अनुसार, भारत के 15 राज्यों में कुल 150 प्रमाणित हाथी गलियारे मौजूद हैं।
