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NTA Exam Reforms Committees- परीक्षा सुधार हेतु राधाकृष्णन समिति और नंदन नीलेकणि समिति

NTA Exam Reforms Committees- परीक्षा सुधार हेतु राधाकृष्णन समिति और नंदन नीलेकणि समिति

NTA Exam Reforms Committees

संदर्भ:

हाल ही में उच्चतम न्यायालय (Supreme Court) ने देश की परीक्षा प्रणाली में सुधार के लिए केंद्र सरकार को राधाकृष्णन समिति (Radhakrishnan Committee NTA) और नंदन नीलेकणि कार्य बल (Nandan Nilekani Task Force) की सिफारिशों को लागू करने हेतु उठाए गए कदमों की समयबद्ध विस्तृत रिपोर्ट देने का सख्त निर्देश दिया।

डॉ. के. राधाकृष्णन समिति (Dr. K. Radhakrishnan Committee):

  • पृष्ठभूमि: नीट-यूजी (NEET-UG) तथा यूजीसी-नेट परीक्षाओं में कथित पेपर लीक (Paper leak) और प्रक्रियागत कमियों के बाद देश की परीक्षा सुरक्षा को अभेद्य बनाने के लिए इस समिति का गठन किया गया था।
  • गठन: इसका गठन जून 2024 में भारत सरकार के शिक्षा मंत्रालय (Education Ministry) द्वारा किया गया था। 
  • संरचना:
    • अध्यक्षता: इस उच्च स्तरीय विशेषज्ञ समिति की अध्यक्षता भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) के पूर्व अध्यक्ष डॉ. के. राधाकृष्णन ने की। 
    • सदस्य: समिति में एम्स (AIIMS) दिल्ली के पूर्व निदेशक डॉ. रणदीप गुलेरिया, हैदराबाद केंद्रीय विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. बी.जे. राव, आईआईटी मद्रास के प्रोफेसर राममूर्ति और पीपुलस्ट्रॉन्ग के सह-संस्थापक पंकज बंसल सहित कुल 7 प्रमुख सदस्य शामिल थे।
  • समिति की सिफारिश: समिति ने राष्ट्रीय परीक्षण एजेंसी सुधार (National Testing Agency Reform) के लिए 41 दीर्घकालिक ढांचागत बदलावों की सिफारिश की थी, जिनके मुख्य बिंदु निम्नलिखित हैं:
  • कंप्यूटर-सहायता प्राप्त सुरक्षित पेन-एंड-पेपर टेस्ट (CPPT): भौतिक पेपर परिवहन (Physical paper transport) के दौरान लीक के जोखिम को कम करने के लिए एन्क्रिप्टेड डिजिटल ट्रांसमिशन (Encrypted digital transmission) और परीक्षा केंद्र पर ही उसी दिन ऑन-साइट प्रिंटिंग (On-site printing) की वकालत की गई।
  • बहु-चरणीय परीक्षा मॉडल (Multi-stage format for NEET-UG): नीट-यूजी परीक्षा को केवल एक स्तर पर कराने के बजाय जेईई (JEE) की तरह दो चरणों (प्रीलिम्स और मेन्स) में और कंप्यूटर-आधारित टेस्ट (CBT) मॉडल में स्थानांतरित करने का सुझाव दिया।
  • ओएमआर मिलान और डेटा सुरक्षा (OMR Reconciliation): परीक्षा के तुरंत बाद इस्तेमाल की गई और अप्रयुक्त ओएमआर शीटों (OMR sheets) का वास्तविक समय में मिलान (Reconciliation) कर उन्हें टैम्पर-प्रूफ सील (Tamper-proof sealed) करने की सिफारिश की गई।
  • संस्थागत पुनर्गठन (NTA Institutional Reform): एनटीए को चार समर्पित कार्यक्षेत्रों (Dedicated verticals) में विभाजित करने की सलाह दी गई, जिनमें परीक्षण केंद्र, सूचना सुरक्षा, उम्मीदवार अनुभव और डिजिटल बुनियादी ढांचा (Digital infrastructure) शामिल हैं।

नंदन नीलेकणि उच्च-स्तरीय टास्क फोर्स (Nandan Nilekani Task Force):

  • गठन: इसका गठन केंद्र सरकार द्वारा वर्ष 2026 में एक विशेष तकनीकी कार्य बल (High-Powered Task Force) के रूप में किया गया। 
  • पृष्ठभूमि: राधाकृष्णन समिति के सुझावों को उन्नत और तकनीकी रूप से लागू करने के लिए सरकार ने एक नए उच्च-स्तरीय कार्य बल का गठन किया।
  • संरचना:
    • अध्यक्षता: इसकी कमान इंफोसिस (Infosys) के सह-संस्थापक और आधार (UIDAI) के पूर्व अध्यक्ष नंदन नीलेकणि को सौंपी गई।
    • सदस्य: इस बहु-विषयक टास्क फोर्स में इसरो के पूर्व अध्यक्ष एस. सोमनाथ, आईआईटी मद्रास के निदेशक वी. कामाकोटी, और खुफिया ब्यूरो (IB) के पूर्व निदेशक तपन डेका जैसे विशेषज्ञ शामिल हैं।
  • उद्देश्य: इसका मुख्य उद्देश्य आधुनिक प्रौद्योगिकियों का लाभ उठाकर परीक्षाओं के लिए ‘एंड-टू-एंड’ (शुरुआत से अंत तक) फुलप्रूफ तकनीकी ढांचा तैयार करना है। 
  • टास्क फोर्स के मुख्य फोकस:
    • एआई और ब्लॉकचेन का उपयोग (AI and Blockchain): प्रश्नपत्रों के निर्माण, वितरण और गोपनीय लॉजिस्टिक्स की सुरक्षा के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और ब्लॉकचेन (Blockchain) जैसी अत्याधुनिक तकनीकों को जोड़ने पर ध्यान केंद्रित किया जाना।
    • डिजिटल परीक्षा प्रणाली (Digital Examination System): संपूर्ण डेटा सुरक्षा और साइबर सुरक्षा (Cybersecurity) को मजबूत करने के लिए स्वदेशी तकनीकी टूल्स और एल्गोरिदम विकसित करना।
    • आइडेंटिटी वेरिफिकेशन (DIGI-EXAM): परीक्षा केंद्रों पर किसी भी प्रकार के प्रतिरूपण (Impersonation/फर्जी परीक्षार्थी) को रोकने के लिए चेहरे की पहचान (Facial Recognition) और बहु-स्तरीय बायोमेट्रिक प्रमाणीकरण प्रणाली लागू करना.

उच्चतम न्यायालय के निर्देश और टिप्पणियाँ:

न्यायमूर्ति पी.एस. नरसिम्हा और न्यायमूर्ति आलोक अराधे की पीठ ने 19 अगस्त 2026 को सुनवाई करते हुए केंद्र सरकार और एनटीए को कड़े निर्देश दिए:

  • संस्थागत स्मृति का निर्माण (Building Institutional Memory): कोर्ट ने कड़ी टिप्पणी करते हुए कहा कि “ऐसा नहीं होना चाहिए कि एक समिति सिफारिशें दे, और फिर एक नई समिति आकर पुरानी सिफारिशों को पूरी तरह से हटा दे”।
    • अदालत ने जोर दिया कि अधिकारियों के तबादलों से संचित ज्ञान (Accumulated knowledge) नष्ट नहीं होना चाहिए; 
    • एनटीए को संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) की तरह एक वैज्ञानिक रूप से सुसज्जित और स्थायी विशेषज्ञ निकाय बनना होगा।
  • एड-हॉक उपायों पर रोक: अदालत ने कहा कि कागजों पर सुरक्षा प्रोटोकॉल बनाने के बजाय सुधारों को परीक्षा प्रणाली में स्थायी और संस्थागत रूप (Institutionalisation) दिया जाना चाहिए।
  • 3 सप्ताह में हलफनामा प्रस्तुत करने का आदेश: कोर्ट ने संबंधित सचिव को निर्देश दिया कि वे 3 सप्ताह के भीतर एक व्यापक हलफनामा (Comprehensive Affidavit) दाखिल करें,
    • जिसमें राधाकृष्णन समिति के सुझावों को नंदन नीलेकणि समिति के तकनीकी इनपुट्स के साथ लागू करने की स्पष्ट समय-सीमा (Indicative Timelines) दर्ज हो।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

प्रश्न 1: Radhakrishnan and Nandan Nilekani Committees NTA Reforms क्या हैं?

उत्तर: ये दोनों समितियां भारत सरकार द्वारा एनटीए (NTA) की प्रतियोगी परीक्षाओं में पारदर्शिता (Transparency), डेटा सुरक्षा और पेपर लीक को रोकने हेतु प्रशासनिक और तकनीकी सुधार सुझाने के लिए गठित की गई थीं।

प्रश्न 2: Radhakrishnan Committee ने NTA के लिए क्या सुझाव दिए?

उत्तर: इस समिति ने एनटीए के बुनियादी ढांचे के पुनर्गठन, कंप्यूटर-आधारित दो-चरणीय नीट परीक्षा (CBT), डिजिटल प्रश्नपत्र संचरण और ऑन-साइट प्रिंटिंग (CPPT) की सिफारिश की थी।

प्रश्न 3: Nandan Nilekani Committee का उद्देश्य क्या है?

उत्तर: इसका मुख्य उद्देश्य परीक्षाओं की सुरक्षा और अखंडता को अभेद्य बनाने के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और ब्लॉकचेन जैसी उन्नत तकनीकों पर आधारित डिजिटल ढांचा विकसित करना है।

प्रश्न 4: Nandan Nilekani को NTA Reform Task Force का नेतृत्व क्यों दिया गया?

उत्तर: भारत के सफल डिजिटल बुनियादी ढांचे (जैसे ‘आधार’) के निर्माण में उनके तकनीकी अनुभव और विशेषज्ञता को देखते हुए उन्हें एंड-टू-एंड तकनीकी सुधारों की कमान दी गई।

प्रश्न 5: NTA में Examination Reforms की जरूरत क्यों पड़ी?

उत्तर: नीट-यूजी और यूजीसी-नेट परीक्षाओं में पेपर लीक (Paper leak), अनियमितताओं और प्रशासनिक विफलता के बाद छात्र कल्याण (Student welfare) को सुरक्षित करने हेतु इन सुधारों की तत्काल आवश्यकता पड़ी।

प्रश्न 6: NEET Paper Leak के बाद कौन-कौन से सुधार प्रस्तावित हैं?

उत्तर: प्रमुख सुधारों में ऑफलाइन पेपर परिवहन को समाप्त करना, परीक्षा केंद्रों पर ही कोड-एन्क्रिप्टेड पेपर प्रिंट करना, और त्रि-स्तरीय बायोमेट्रिक जांच शामिल हैं।

प्रश्न 7: NTA Exam Security को कैसे मजबूत किया जाएगा?

उत्तर: इसे सीआईएसएफ (CISF) सुरक्षा, जीपीएस लॉजिस्टिक्स ट्रैकिंग, अत्याधुनिक साइबर सुरक्षा ऑडिट और एआई-संचालित परीक्षा केंद्र निगरानी प्रणालियों के एकीकरण से मजबूत किया जाएगा।

प्रश्न 8: Radhakrishnan और Nandan Nilekani Committees में क्या अंतर है?

उत्तर: राधाकृष्णन समिति ने मुख्य रूप से एनटीए के प्रशासनिक पुनर्गठन और परीक्षा प्रक्रिया के लॉजिस्टिक्स पर ध्यान केंद्रित किया, जबकि नीलेकणि टास्क फोर्स का ध्यान शुद्ध तकनीकी समाधानों (Tech-driven exams) पर केंद्रित है।

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