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National Disaster Response Force: परिचय, गठन, संरचना एवं कार्य 

National Disaster Response Force: परिचय, गठन, संरचना एवं कार्य 

National Disaster Response Force

संदर्भ:

हाल ही में नेपाल में आई अचानक बाढ़ (Flash Floods) के बाद, राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया बल (National Disaster Response Force – NDRF) ने बिहार और उत्तर प्रदेश के सीमावर्ती क्षेत्रों में किसी भी संभावित बाढ़ जैसी स्थिति से निपटने के लिए अपनी 20 अत्याधुनिक टीमों (9 बिहार में और 11 उत्तर प्रदेश में) को रणनीतिक रूप से तैनात किया।

राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया बल (NDRF) के बारे में:

  • परिचय: एनडीआरएफ (NDRF) प्राकृतिक और मानव निर्मित आपदाओं (Natural and Man-made Disasters) के दौरान त्वरित और कुशल खोज एवं बचाव अभियान चलाने के लिए भारत का एक विशेषीकृत बहु-विषयक बल है।
  • ध्येय वाक्य (Motto): इसका ध्येय वाक्य “आपदा सेवा सदैव सर्वत्र” (Aapda Sewa Sadaiv Sarvatra) है, जिसका अर्थ है—हर समय, हर जगह आपदा पीड़ितों की निःस्वार्थ सेवा करना।
  • गठन: इस बल का वैधानिक गठन आपदा प्रबंधन अधिनियम, 2005 (NDRF Act 2005) की धारा 44 के तहत किया गया है।
  • स्थापना: इस बल को आधिकारिक तौर पर 19 जनवरी 2006 को अस्तित्व में लाया गया था। प्रतिवर्ष 19 जनवरी को एनडीआरएफ का स्थापना दिवस (Raising Day) मनाया जाता है।
    • एनडीआरएफ का राष्ट्रीय मुख्यालय (NDRF Headquarters) नई दिल्ली में स्थित है।
  • आवश्यकता: अतीत में आई विनाशकारी प्राकृतिक आपदाओं (जैसे 1999 का ओडिशा सुपर चक्रवात और 2004 की हिंद महासागर सुनामी) ने यह सिद्ध किया कि सामान्य कानून-व्यवस्था बलों के पास तकनीकी आपदाओं और जटिल खोज अभियानों के लिए विशेषज्ञता नहीं थी। अतः एक समर्पित और तकनीकी रूप से सक्षम बल की आवश्यकता महसूस की गई। 
  • नोडल मंत्रालय: यह बल भारत सरकार के गृह मंत्रालय (Ministry of Home Affairs – MHA) के प्रशासनिक नियंत्रण के अधीन आता है।
  • नियंत्रण प्राधिकरण: यह राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (National Disaster Management Authority – NDMA) के तहत काम करता है। एनडीएमए (NDMA) के पदेन अध्यक्ष भारत के प्रधानमंत्री होते हैं।
  • नेतृत्व: एनडीआरएफ का नेतृत्व एक महानिदेशक (Director General – DG) करते हैं, जो भारतीय पुलिस सेवा (IPS) के तीन-सितारा (थ्री-स्टार) रैंक के वरिष्ठ अधिकारी होते हैं।
  • कुल बटालियन: वर्तमान में देश भर में एनडीआरएफ की 16 बटालियन (16 Battalions) रणनीतिक रूप से तैनात हैं।
  • कार्मिकों की संख्या (NDRF Personnel): बल की कुल स्वीकृत क्षमता लगभग 18,500 कार्मिकों की है।
    • एनडीआरएफ में नागरिकों की सीधी भर्ती (Direct Entry) नहीं होती है। इसके सभी जवान और अधिकारी केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों (CAPF) जैसे: BSF, CRPF, CISF, ITBP, SSB और असम राइफल्स (Assam Rifles) से निश्चित अवधि की प्रतिनियुक्ति (Deputation) पर चुने जाते हैं।
  • टीम की आंतरिक ढांचा: प्रत्येक बटालियन में 1149 जवान होते हैं। प्रत्येक बटालियन के भीतर 18 विशिष्ट खोज और बचाव टीमें (Search & Rescue Teams) होती हैं, जिनमें विशेषज्ञ इंजीनियर, डॉग स्क्वाड, तकनीशियन, इलेक्ट्रीशियन और पैरामेडिकल स्टाफ शामिल होते हैं। 
  • प्रशिक्षण ढांचा: नागपुर में स्थित NDRF एकेडमी (Nagpur) इस बल का सर्वोच्च प्रशिक्षण संस्थान है, जहाँ जवानों को वैश्विक मानकों के अनुरूप आपदा राहत तकनीकों का प्रशिक्षण (NDRF Training) दिया जाता है। 
  • आपदा प्रतिक्रिया: आपदा प्रबंधन चक्र (Disaster Management Cycle) के दौरान एनडीआरएफ की भूमिका बहुआयामी होती है:
  • विशिष्ट खोज एवं बचाव (Search and Rescue Operations): भूकंप, चक्रवात, भूस्खलन और इमारतों के ढहने (CSSR) जैसी आपातकालीन स्थितियों में मलबे के नीचे फंसे जीवन को सुरक्षित बाहर निकालना।
  • बाढ़ जल बचाव (Flood Water Rescue): वर्तमान में बिहार और उत्तर प्रदेश की तरह, बाढ़ या नाव पलटने (Boat Capsize) की घटनाओं में त्वरित प्रतिक्रिया देना और फंसे हुए नागरिकों को सुरक्षित स्थानों पर पहुँचाना।
  • सीबीआरएन आपदाओं का मुकाबला (CBRN Contingencies): यह बल रासायनिक, जैविक, रेडियोलॉजिकल और परमाणु (CBRN) खतरों या औद्योगिक गैस रिसाव आपदाओं से निपटने के लिए भारत का एकमात्र विशिष्ट रूप से प्रशिक्षित नागरिक सुरक्षा बल है।
  • समुदाय का क्षमता निर्माण (Capacity Building): आपदाओं के अतिरिक्त, यह बल स्थानीय नागरिकों, गैर-सरकारी संगठनों और राज्य आपदा प्रतिक्रिया बलों (SDRF) को आपदा तैयारियों के लिए मॉक ड्रिल और सामुदायिक जागरूकता कार्यक्रम आयोजित कर प्रशिक्षित करता है। 
  • राष्ट्रीय महत्व:
    • लाखों जिंदगियों की रक्षा: एनडीआरएफ ने अब तक देश के भीतर विभिन्न अभियानों (NDRF Rescue Operations) के माध्यम से 1.59 लाख से अधिक बहुमूल्य मानव जीवन को बचाया है और 8.64 लाख से अधिक फंसे हुए लोगों को सुरक्षित निकाला है।
    • अंतरराष्ट्रीय कूटनीति और HADR: भारत की ‘वसुधैव कुटुंबकम’ नीति के तहत एनडीआरएफ ने कई वैश्विक मानवीय सहायता और आपदा राहत (HADR) अभियानों में भाग लिया है:
      • 2011: जापान के फुकुशिमा में ट्रिपल आपदा (भूकंप-सुनामी) राहत अभियान।
      • 2015: नेपाल में आए विनाशकारी भूकंप के दौरान मलबे से लोगों को निकालना।
      • 2023 (ऑपरेशन दोस्त): तुर्की और सीरिया में आए भीषण भूकंप के दौरान मलबे में दबे पीड़ितों को बचाना।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

प्रश्न 1: National Disaster Response Force यानी NDRF क्या है?

उत्तर: यह भारत सरकार का एक विशेष तकनीकी सुरक्षा बल (Special Forces) है, जो देश में आने वाली किसी भी प्राकृतिक या मानव निर्मित आपदा के समय त्वरित राहत अभियान चलाता है। 

प्रश्न 2: NDRF का गठन कब और क्यों किया गया?

उत्तर: इसका गठन 19 जनवरी 2006 को किया गया था ताकि आपदाओं के समय सामान्य पुलिस बलों के स्थान पर एक विशेषज्ञ और प्रशिक्षित तकनीकी बल से तुरंत जीवन बचाया जा सके। 

प्रश्न 3: NDRF किस Act के तहत बनाया गया है?

उत्तर: एनडीआरएफ का गठन वैधानिक रूप से संसद द्वारा पारित आपदा प्रबंधन अधिनियम, 2005 (Disaster Management Act 2005) के तहत किया गया है। 

प्रश्न 4: NDRF की संरचना कैसी है?

उत्तर: यह गृह मंत्रालय के अधीन NDMA की देखरेख में कार्य करता है। इसका प्रशासनिक प्रमुख महानिदेशक (DG) होता है और इसके सभी कर्मी अर्धसैनिक बलों से प्रतिनियुक्ति पर आते हैं।

प्रश्न 5: NDRF में कितनी Battalions हैं?

उत्तर: वर्तमान में पूरे भारत के संवेदनशील क्षेत्रों में एनडीआरएफ की कुल 16 बटालियन (16 Battalions) रणनीतिक रूप से तैनात की गई हैं।

प्रश्न 6: NDRF का मुख्यालय कहां है?

उत्तर: एनडीआरएफ का राष्ट्रीय मुख्यालय (NDRF Headquarters) नई दिल्ली में स्थित है, जहाँ से देश भर के राहत अभियानों की निगरानी की जाती है।

प्रश्न 7: NDRF के प्रमुख कार्य क्या हैं?

उत्तर: इसके प्रमुख कार्यों में संकट के समय मलबे से जीवन बचाना, बाढ़ प्रभावितों का रेस्क्यू (NDRF Rescue Operations), सीबीआरएन (CBRN) खतरों को संभालना और आपदा प्रबंधन कूटनीति का संचालन शामिल है। 

प्रश्न 8: NDRF किस प्रकार की आपदाओं में Rescue Operation करता है?

उत्तर: यह बल बाढ़, भूकंप, चक्रवात, बादल फटने, भूस्खलन, रेल दुर्घटनाओं और रासायनिक या गैस रिसाव जैसी जटिल औद्योगिक आपदाओं में रेस्क्यू ऑपरेशन करता है।

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