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खतरनाक कीटनाशक कार्बोसल्फान पर पूर्ण प्रतिबंध का प्रस्ताव, क्या हैं कार्बोसल्फान?

खतरनाक कीटनाशक कार्बोसल्फान पर पूर्ण प्रतिबंध का प्रस्ताव, क्या हैं कार्बोसल्फान?

Carbosulfan Ban

संदर्भ:

कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय ने व्यापक रूप से उपयोग होने वाले कीटनाशक कार्बोसल्फान (Carbosulfan) पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने का एक मसौदा आदेश (Draft Order) जारी किया।

कार्बोसल्फान क्या है? (What is Carbosulfan?)

  • परिचय: कार्बोसल्फान एक व्यापक-स्पेक्ट्रम (Broad-spectrum), प्रणालीगत (Systemic) कार्बामेट समूह का कीटनाशक, एकैरिसाइड (Acaricide) और नेमाटाइड (Nematide) है।
  • कार्यप्रणाली (Mode of Action): यह कीटों के तंत्रिका तंत्र में मौजूद महत्वपूर्ण एंजाइम एसिटाइलकोलिनेस्टेरेज (Acetylcholinesterase – AChE) को बाधित कर देता है।
    • इससे तंत्रिका तंत्र में एसिटाइलकोलीन का अत्यधिक संचय होता है, जिससे कीटों में निरंतर उत्तेजना, तीव्र पक्षाघात (Paralysis) और अंततः मृत्यु हो जाती है। 
  • प्रणालीगत विशेषता: इसे पौधों की जड़ों और पत्तियों द्वारा आसानी से अवशोषित कर लिया जाता है। इसके बाद यह पूरे पौधे के ऊतकों में फैल जाता है, जिससे चबाने वाले (Chewing) और रस चूसने वाले दोनों प्रकार के कीट नष्ट हो जाते हैं। 
  • कृषि में इसका उपयोग: भारतीय कृषि में रासायनिक कीट प्रबंधन के तहत कार्बोसल्फान का बड़े पैमाने पर उपयोग किया जाता रहा है:
  • प्रमुख फसलें: इसका सर्वाधिक उपयोग धान (Paddy), कपास (Cotton), मिर्च, बैंगन और जीरे जैसी नकदी फसलों में कीटों के नियंत्रण के लिए होता है।
  • बाजार हिस्सेदारी: कृषि रसायन उद्योग के अनुसार, भारत में लगभग 32 लाख एकड़ कृषि भूमि पर कीट प्रबंधन के लिए इसका उपयोग होता है और इसका घरेलू बाजार लगभग ₹400 करोड़ का है। 
  • प्रतिबंध का प्रस्ताव: कृषि मंत्रालय ने कीटनाशक अधिनियम, 1968 के तहत गठित एक उच्च स्तरीय विशेषज्ञ समिति (जिसका गठन 14 जनवरी 2026 को हुआ था और रिपोर्ट 12 जून 2026 को आई) तथा पंजीकरण समिति (Registration Committee) की सिफारिशों के आधार पर इस प्रतिबंध का प्रस्ताव रखा है। इसके मुख्य कारण निम्नलिखित हैं:
    • घातक ‘कार्बोफ्यूरान’ में रूपांतरण (Metabolism into Carbofuran): कार्बोसल्फान की सबसे बड़ी वैज्ञानिक चिंता यह है कि मिट्टी, पानी और पौधों के ऊतकों में जाने के बाद यह तेजी से कार्बोफ्यूरान (Carbofuran) में परिवर्तित (Metabolize) हो जाता है। कार्बोफ्यूरान एक अत्यधिक विषाक्त रसायन है, जो अपनी चरम घातकता के कारण दुनिया के अधिकांश हिस्सों में पहले से ही पूरी तरह प्रतिबंधित है।
  • मानव स्वास्थ्य पर गंभीर प्रभाव (Carbosulfan Health Risks): 
    • तीव्र विषाक्तता (Acute Toxicity): खेतों में छिड़काव के दौरान सांस के जरिए या त्वचा के संपर्क में आने से किसानों और मजदूरों में गंभीर कोलिनेस्टेरेज अवरोध (Cholinesterase Inhibition) और तीव्र प्रणालीगत विषाक्तता देखी जाती है।
    • कोई विशिष्ट मारक (No Specific Antidote): विशेषज्ञ समिति ने रेखांकित किया है कि कार्बोसल्फान के कारण होने वाले जहर (Poisoning) को बेअसर करने के लिए कोई विशिष्ट एंटीडोट उपलब्ध नहीं है, जिससे आकस्मिक जोखिम के मामलों में मृत्यु दर का खतरा बढ़ जाता है।
    • खाद्य अवशेष (Dietary Residues): फसलों की कटाई के बाद भी इसके अवशेष अनाजों और सब्जियों में बने रहते हैं, जो उपभोक्ताओं के स्वास्थ्य के लिए दीर्घकालिक न्यूरोटॉक्सिक खतरे पैदा करते हैं। 
  • पर्यावरणीय और पारिस्थितिक नुकसान:
    • गैर-लक्षित जीवों के लिए खतरा: यह केवल हानिकारक कीटों को ही नहीं, बल्कि पारिस्थितिकी तंत्र के मित्र कीटों जैसे मधुमक्खियों (परागणकों), मिट्टी के सूक्ष्मजीवों और पक्षियों के लिए अत्यंत घातक है。
    • जलीय प्रदूषण: धान के खेतों से निकलने वाला कृषि अपवाह (Agricultural Runoff) जब आसपास के जल निकायों में जाता है, तो यह मछलियों और जलीय अकशेरुकी जीवों में व्यापक मृत्यु का कारण बनता है। यह रिसकर भूजल (Groundwater) को भी संदूषित करता है।
  • वैश्विक परिदृश्य: यूरोपीय संघ (EU) सहित कई विकसित और विकासशील देशों ने कार्बोसल्फान को पहले ही प्रतिबंधित कर दिया है।
    • हाल ही में वियतनाम (2022) और थाईलैंड जैसे देशों ने भी इस रसायन पर कड़े प्रतिबंध लगाए हैं। भारत द्वारा लगाया जाने वाला यह प्रतिबंध वैश्विक हरित कृषि मानकों (Global Green Agricultural Standards) के अनुरूप भारत की प्रतिबद्धता को दर्शाता है।

भारत में कीटनाशक विनियमन ढांचा:

भारत में कीटनाशकों का विनियमन मुख्य रूप से कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय के अधीन होता है:

  • नियामक अधिनियम: कीटनाशक अधिनियम, 1968 (Insecticides Act, 1968) और कीटनाशक नियम, 1971 के तहत भारत में कीटनाशकों के आयात, निर्माण, बिक्री, परिवहन और उपयोग को विनियमित किया जाता है।
  • केंद्रीय कीटनाशक बोर्ड और पंजीकरण समिति (CIB&RC): यह निकाय सुरक्षा और प्रभावकारिता के आधार पर कीटनाशकों के पंजीकरण और उनके सुरक्षित उपयोग की समीक्षा करता है।
  • ऐतिहासिक संदर्भ (अनुपम वर्मा समिति): भारत इससे पहले भी डॉ. अनुपम वर्मा समिति की सिफारिशों के आधार पर मानव और पर्यावरणीय स्वास्थ्य के लिए हानिकारक पाए गए दर्जनों कीटनाशकों (जैसे मोनोक्रोटोफॉस, फोरेट आदि) को चरणबद्ध तरीके से प्रतिबंधित या सीमित कर चुका है।

उद्योग की चिंताएँ और सुरक्षित विकल्प:

सरकार के इस फैसले का भारतीय कृषि-रसायन उद्योग (जैसे एग्रोकेम फेडरेशन ऑफ इंडिया – ACFI) द्वारा विरोध किया जा रहा है:

  • चुनौतियाँ: उद्योग का तर्क है कि अचानक प्रतिबंध से कीट प्रतिरोध (Pest Resistance) की समस्या बढ़ सकती है और किसानों की लागत में वृद्धि होगी क्योंकि इसके विकल्प महंगे हो सकते हैं। 
  • समाधान और विकल्प (Alternatives):
    • एकीकृत कीट प्रबंधन (Integrated Pest Management – IPM): रासायनिक कीटनाशकों पर निर्भरता कम करने के लिए जैविक नियंत्रण, फसल चक्र और फेरोमोन ट्रैप जैसी तकनीकों को बढ़ावा देना।
    • कम विषाक्त जैव-कीटनाशक (Bio-pesticides): नीम आधारित फॉर्मूलेशन और मित्र कवक/बैक्टीरिया (जैसे ट्राइकोडर्मा, बैसिलस थुरिंगिएंसिस) का उपयोग।
    • सुरक्षित नई रसायन अणु (Newer Chemistries): ऐसे कीटनाशकों को बढ़ावा देना जिनकी पर्यावरण में ठहरने की अवधि (Persistence) कम हो और जो लक्षित कीटों के प्रति विशिष्ट (Target-specific) हों।

बार-बार पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

प्रश्न 1: Carbosulfan क्या है?

उत्तर: कार्बोसल्फान (Carbosulfan) एक तीव्र और व्यापक-स्पेक्ट्रम कार्बामेट कीटनाशक है, जो कीटों के तंत्रिका तंत्र में एसिटाइलकोलिनेस्टेरेज एंजाइम को बाधित कर उन्हें पूरी तरह नष्ट कर देता है।

यह जल निकायों में घुलकर मछलियों को मारता है, भूजल को संदूषित करता है और परागण करने वाली मधुमक्खियों तथा मिट्टी के मित्र जीवाणुओं को नष्ट करता है।

प्रश्न 2: Carbosulfan का इस्तेमाल किस काम के लिए किया जाता है?

उत्तर: इसका इस्तेमाल मुख्य रूप से धान, कपास, मिर्च और बैंगन की फसलों में रस चूसने वाले कीटों, एफिड्स, थ्रिप्स और कृमियों के प्रभावी नियंत्रण के लिए किया जाता है। 

प्रश्न 3: Carbosulfan को खतरनाक Pesticide क्यों माना जाता है?

उत्तर: यह खतरनाक है क्योंकि पर्यावरण में जाकर यह अत्यधिक विषैले ‘कार्बोफ्यूरान’ में बदल जाता है और इसके मानव शरीर में जाने पर कोई विशिष्ट एंटीडोट उपलब्ध नहीं है। 

प्रश्न 4: Carbosulfan पर Complete Ban का प्रस्ताव क्यों दिया गया है?

उत्तर: मानव स्वास्थ्य, वन्यजीवों पर गंभीर खतरे, मित्र कीटों की सामूहिक मृत्यु और खाद्य पदार्थों में इसके न्यूरोटॉक्सिक अवशेष मिलने के कारण इस पर पूर्ण प्रतिबंध का प्रस्ताव है। 

प्रश्न 5: Carbosulfan से Health पर क्या असर पड़ सकता है?

उत्तर: इसके संपर्क में आने से मनुष्यों में सिरदर्द, चक्कर आना, दृष्टि धुंधली होना, श्वसन पक्षाघात (सांस रुकना) और गंभीर न्यूरोलॉजिकल विकार जैसी घातक समस्याएं पैदा हो सकती हैं।

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