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UNEP Limiting Overshoot Report जारी, वैश्विक तापमान बढ़ोतरी की चिंताजनक स्थिति उजागर

UNEP Limiting Overshoot Report जारी, वैश्विक तापमान बढ़ोतरी की चिंताजनक स्थिति उजागर

UNEP Limiting Overshoot Report

संदर्भ:

हाल ही में संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम (UNEP) ने ‘लिमिटिंग ओवरशूट’ (UNEP Limiting Overshoot Report) नामक एक विशेष जलवायु रिपोर्ट (UNEP Climate Report) जारी की। इस रिपोर्ट में चेतावनी दी गई है कि वैश्विक तापमान बढ़ोतरी (Global Temperature Rise) अगले कुछ वर्षों में पेरिस समझौते की 1.5°C की सीमा को पार कर जाएगी।

UNEP Limiting Overshoot Report के मुख्य निष्कर्ष:

  • क्लाइमेट ओवरशूट: जब वैश्विक औसत तापमान अस्थायी रूप से औद्योगिक क्रांति से पहले के स्तर से 1.5°C की निर्धारित सीमा को पार कर जाता है, तो उसे ‘क्लाइंडेट ओवरशूट’ (Climate Overshoot) कहा जाता है।
    • रिपोर्ट में “ओवरशूट, पीक और गिरावट” (Overshoot, Peak and Decline) मार्ग की रूपरेखा दी गई है। इसके तहत अब प्राथमिकता केवल उल्लंघन को रोकने की नहीं, बल्कि तापमान वृद्धि के इस उल्लंघन की अवधि को कम करने की होनी चाहिए।
  • अपरिहार्य उल्लंघन: वैश्विक स्तर पर ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन (Greenhouse Gas Emissions) में धीमी कटौती के कारण 1.5°C की सीमा का टूटना अब लगभग अपरिहार्य हो चुका है। 
  • सर्वश्रेष्ठ स्थिति (Best-case Scenario): यदि सभी देश अपनी नेट-जीरो प्रतिबद्धताओं को पूरी तरह लागू भी कर लें, तो भी मध्य शताब्दी तक अधिकतम वैश्विक तापमान वृद्धि 1.8°C तक पहुँच सकती है। 
  • वर्तमान नीतियां: मौजूदा वैश्विक नीतियों के परिणाम स्वरूप वर्ष 2100 तक पृथ्वी का तापमान 2.6°C (संभावित दायरा 1.9°C से 3.6°C) तक बढ़ सकता है। 
  • सीमित कार्बन बजट: वर्ष 2026 से आगे 1.5°C के लक्ष्य की 50% संभावना बनाए रखने के लिए दुनिया के पास केवल 130 गीगाटन (Gt) का अतिरिक्त कार्बन बजट शेष बचा है।
  • मीथेन उत्सर्जन पर विशेष बल:
    • तात्कालिक प्रभाव: यह यूएनईपी की पहली ऐसी रिपोर्ट है जो मीथेन (Methane) शमन पर विशेष बल देती है, जो वर्तमान में लगभग 0.5°C तापमान वृद्धि के लिए जिम्मेदार है।
    • शमन क्षमता: कृषि और अपशिष्ट क्षेत्रों से होने वाले मीथेन उत्सर्जन में से केवल 60-70 मिलियन टन की कमी करना वायुमंडल से 220 गीगाटन कार्बन डाइऑक्साइड हटाने जितना प्रभावी परिणाम दे सकता है। 
  • अपरिवर्तनीय पारिस्थितिक क्षति: 1.5°C से ऊपर जाने पर ग्लेशियरों का पिघलना (Glacier Melt), समुद्र के जलस्तर में वृद्धि (Sea Level Rise) और जैव विविधता की हानि इतनी तीव्र होगी कि तापमान दोबारा कम होने पर भी उसे सुधारा नहीं जा सकेगा।
  • खाद्य और जल असुरक्षा: तीव्र ग्रीष्म लहरों (Heat Waves) और जानलेवा बाढ़ के कारण वैश्विक कृषि अवसंरचना चरमरा जाएगी, जिससे विकासशील देशों में भुखमरी का खतरा बढ़ेगा।
  • अनुकूलन की सीमाएं (Adaptation Limits): तापमान वृद्धि की लंबी अवधि कई मानव बस्तियों को पूरी तरह रहने के अयोग्य (Uninhabitable) बना देगी, जहां कोई भी सुरक्षात्मक अनुकूलन कार्य नहीं कर पाएगा। 
  • पेरिस समझौते के लक्ष्यों की चुनौतियाँ:
  • बहुपक्षवाद का संकट: ऐतिहासिक रूप से सबसे बड़ा उत्सर्जक संयुक्त राज्य अमेरिका (USA) पेरिस समझौते (Paris Agreement) और ग्रीन क्लाइमेट फंड (GCF) से बाहर हो चुका है, जिससे वैश्विक सहयोग कमजोर हुआ है।
  • भू-राजनीतिक और ऊर्जा संकट: पश्चिम एशिया में होर्मुज जलडमरूमध्य की तेल आपूर्ति बाधाओं के कारण वैश्विक स्तर पर ऊर्जा की कीमतें बढ़ी हैं, जो सरकारों को कोयले जैसे सस्ते जीवाश्म ईंधन (Fossil Fuels) की ओर धकेल रही हैं। 
  • प्रमुख सुझाव:
    • तीव्र उत्सर्जन कटौती: जीवाश्म ईंधन से नवीकरणीय ऊर्जा की ओर संक्रमण (Energy Transition) को अत्यधिक तेज करना होगा।
    • शुद्ध नकारात्मक उत्सर्जन (Net-negative Emissions): कार्बन डाइऑक्साइड को वायुमंडल से हटाने की तकनीकों (Carbon Dioxide Removal – CDR) को बड़े पैमाने पर बढ़ाना होगा ताकि शताब्दी के अंत तक तापमान को वापस 1.5°C के नीचे लाया जा सके।
    • जलवायु न्याय और वित्त: जलवायु परिवर्तन के लिए ऐतिहासिक रूप से जिम्मेदार अमीर देशों को विकासशील देशों के लिए वित्तीय सहायता (Climate Finance) को बड़े पैमाने पर बढ़ाना चाहिए। 

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

प्रश्न 1: UNEP Limiting Overshoot Report क्या है और इसमें global warming को लेकर क्या चेतावनी दी गई है?

उत्तर: यह यूएनईपी की नवीनतम रिपोर्ट है जो चेतावनी देती है कि आने वाले कुछ वर्षों में वैश्विक तापमान वृद्धि 1.5°C की सुरक्षित सीमा को पार कर जाएगी. 

प्रश्न 2: Limiting Overshoot report के अनुसार global temperature rise की स्थिति कितनी चिंताजनक है?

उत्तर: स्थिति गंभीर है; वर्तमान वैश्विक नीतियों के चलते वर्ष 2100 तक पृथ्वी का तापमान 2.6°C तक बढ़ने का अनुमान है, जो तबाही ला सकता है.

प्रश्न 3: climate overshoot क्या होता है और इसका global warming से क्या संबंध है?

उत्तर: जब वैश्विक तापमान अस्थायी रूप से 1.5°C की सीमा का उल्लंघन करता है, तो उसे ओवरशूट कहते हैं. इसके बढ़ने से चरम मौसमी आपदाएं तीव्र हो जाती हैं.

प्रश्न 4: global temperature rise को सीमित करना दुनिया के लिए क्यों जरूरी है?

उत्तर: तापमान को सीमित करना मानव स्वास्थ्य, खाद्य सुरक्षा, और ग्लेशियरों को पूरी तरह पिघलने व अपरिवर्तनीय पारिस्थितिक विनाश से बचाने के लिए अनिवार्य है.

प्रश्न 5: UNEP climate report में greenhouse gas emissions को लेकर क्या कहा गया है?

उत्तर: रिपोर्ट के अनुसार वैश्विक उत्सर्जन कटौती बहुत धीमी है. त्वरित सुधार के लिए कार्बन उत्सर्जन के साथ-साथ मीथेन कटौती पर तुरंत ध्यान देना होगा. 

प्रश्न 6: Paris Agreement के climate targets को हासिल करने में global warming की मौजूदा स्थिति कितनी बड़ी चुनौती है?

उत्तर: शेष बचा कार्बन बजट (130 Gt) बहुत कम है. अमेरिका के हटने और जीवाश्म ईंधन पर बढ़ती निर्भरता के कारण पेरिस लक्ष्य हासिल करना बेहद कठिन हो गया है.

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