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गुजरात में MISHTI Scheme के तहत मैंग्रोव पौधे लगाने का बना रिकॉर्ड, जानिए क्या हैं मायने?

गुजरात में MISHTI Scheme के तहत मैंग्रोव पौधे लगाने का बना रिकॉर्ड, जानिए क्या हैं मायने?

MISHTI Scheme

संदर्भ:

हाल ही में गुजरात ने मिष्टी योजना (MISHTI Scheme) के तहत कच्छ क्षेत्र में 27,652 हेक्टेयर से अधिक तटीय क्षेत्र में अभूतपूर्व मैंग्रोव रोपण (Mangrove Plantation Gujarat) कर एक नया रिकॉर्ड स्थापित किया। यह उपलब्धि राज्य के 29,250 हेक्टेयर के कुल बजटीय लक्ष्य का लगभग 95% हिस्सा पूरा करती है।

What is MISHTI Scheme?

  • परिचय: MISHTI Scheme (मिष्टी योजना) भारत सरकार की एक महत्वपूर्ण पर्यावरण पहल है, जिसके तहत तटीय क्षेत्रों में मैंग्रोव (Mangrove) वनों के वृक्षारोपण और संरक्षण में पर ध्यान दिया जाता है।
    • MISHTI का पूरा नाम Mangrove Initiative for Shoreline Habitats & Tangible Incomes (तटीय आवास और मूर्त आय के लिए मैंग्रोव पहल) है। 
  • शुरुआत: इस महत्वाकांक्षी योजना की घोषणा केंद्रीय बजट 2023-24 में की गई थी और इसे आधिकारिक तौर पर विश्व पर्यावरण दिवस (5 जून 2023) को लॉन्च किया गया था।
  • प्रशासनिक मंत्रालय: यह भारत सरकार के पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय (MoEFCC) द्वारा संचालित केंद्रीय पहल है।
  • समय सीमा: यह एक 5-वर्षीय कार्यक्रम है जो वित्तीय वर्ष 2023-24 से 2027-28 तक संचालित होगा।
  • मुख्य उद्देश्य: इसका प्राथमिक उद्देश्य भारत की 7,516 किलोमीटर लंबी तटरेखा और साल्ट पैन (नमक के मैदानों) की भूमि पर गहन रूप से मैंग्रोव वनों का पुनरुद्धार (Mangrove Restoration India) करना है।
  • लक्षित क्षेत्रफल: इसके तहत देश भर के 11 राज्यों और 2 केंद्र शासित प्रदेशों में लगभग 540 वर्ग किलोमीटर (54,000 हेक्टेयर) degraded मैंग्रोव आवासों को बहाल करने का लक्ष्य है।
  • कार्यान्वयन: इस योजना के लिए कोई अलग बजटीय आवंटन करने के बजाय अभिसरण का उपयोग किया गया है।
    • इसमें कैम्पा फंड (CAMPA Fund) से 70% गैप-फंडिंग और मनरेगा (MGNREGS) से 30% श्रम बजट का उपयोग किया जाता है।
    • इसमें तटीय समुदायों, स्वयं सहायता समूहों (SHGs), कॉपोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व (CSR) और सार्वजनिक-निजी भागीदारी के माध्यम से वित्तीय एवं तकनीकी संसाधन जुटाए जाते हैं।
  • गुजरात की हालिया ऐतिहासिक उपलब्धि:
    • राष्ट्रीय नेतृत्व: गुजरात इस योजना के क्रियान्वयन में पूरे भारत में शीर्ष स्थान पर रहा है।
    • रिकॉर्ड कवरेज: राज्य ने प्रतिकूल भौगोलिक परिस्थितियों के बावजूद कच्छ के कोरी क्रीक (Kori Creek) क्षेत्र में 12,450 हेक्टेयर सहित कुल 27,652 हेक्टेयर में मैंग्रोव वनस्पति का रोपण और पुनरुद्धार पूरा कर लिया है।
    • डिजिटल और वैज्ञानिक पहल: इस ऐतिहासिक अवसर पर केंद्रीय मंत्री द्वारा ‘मैंग्रोव जीआईएस (MGIS) पोर्टल’, कच्छ मैंग्रोव एटलस और जखाऊ में स्थानीय तटीय समुदायों तथा सीमा सुरक्षा बल (BSF) के सहयोग से एक अत्याधुनिक वैज्ञानिक नर्सरी लॉन्च की गई है। 

मैंग्रोव वनों की स्थिति और पारिस्थितिकी महत्व:

  • परिचय: मैंग्रोव लवण-सहिष्णु (Halophytes) अंतर-ज्वारीय पादप प्रजातियाँ हैं, जो उष्णकटिबंधीय और उपोष्णकटिबंधीय तटीय क्षेत्रों, मुहानों (Estuaries) और दलदली कीचड़ में विकसित होती हैं।
    • इनमें ऑक्सीजन की कमी वाली मिट्टी में सांस लेने के लिए विशेष जड़ें होती हैं जिन्हें न्यूमैटोफोर्स (Pneumatophores/Breathing Roots) कहा जाता है। साथ ही, ये खारे पानी से नमक को छानने के लिए विशेष ग्रंथियों से युक्त होती हैं।
    • ‘भारत वन स्थिति रिपोर्ट (ISFR 2023)’ के अनुसार भारत में कुल मैंग्रोव कवर 4,991.68 वर्ग किलोमीटर है, जिसमें सुंदरबन के बाद गुजरात दूसरे स्थान पर है।
  • महत्व:
    • प्राकृतिक तटीय रक्षक: मैंग्रोव की घनी जड़ें समुद्री लहरों, विनाशकारी चक्रवातों (Cyclones) और सुनामी की गतिज ऊर्जा को अवशोषित कर लेती हैं, जिससे तटीय मृदा अपरदन (Coastal Erosion) रुकता है।
    • ब्लू कार्बन सिंक (Blue Carbon India): मैंग्रोव वन सामान्य स्थलीय वनों की तुलना में 4 गुना अधिक कार्बन डाइऑक्साइड को सोखने और संचित करने की क्षमता रखते हैं, जो वैश्विक जलवायु परिवर्तन (Climate Change Mangroves) से लड़ने में भारत का सबसे बड़ा हथियार हैं।
    • जैव विविधता का आश्रय स्थल: ये तटीय जल में मछलियों, केकड़ों और झींगों के प्रजनन के लिए प्राकृतिक नर्सरी प्रदान करते हैं तथा लुप्तप्राय समुद्री जीवों को सुरक्षा देते हैं।
    • तटीय आजीविका: यह योजना केवल वनीकरण पर नहीं बल्कि पर्यावरण-पर्यटन (Ecotourism), मत्स्य पालन संवर्धन और शहद उत्पादन के माध्यम से स्थानीय लोगों की ‘ठोस आय’ (Tangible Incomes) बढ़ाने पर केंद्रित है। 

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

प्रश्न 1: MISHTI Scheme Gujarat क्या है?

उत्तर: यह गुजरात के तटीय और नमक प्रभावित साल्ट पैन क्षेत्रों में कैम्पा (CAMPA) और मनरेगा के अभिसरण से मैंग्रोव वनों के विस्तार की केंद्रीय योजना (MISHTI Scheme Gujarat) है।

प्रश्न 2: Gujarat में Mangrove Plantation Record कैसे बना?

उत्तर: गुजरात ने 2023-2027 के अपने निर्धारित लक्ष्य के विरुद्ध कुल 27,652 हेक्टेयर तटीय दलदली क्षेत्र में वैज्ञानिक रोपण कर राष्ट्रीय स्तर पर रिकॉर्ड बनाया है। 

प्रश्न 3: MISHTI Scheme का मुख्य objective क्या है?

उत्तर: इसका मुख्य उद्देश्य भारत की तटरेखा के साथ मैंग्रोव पारिस्थितिकी तंत्र का गहन संरक्षण (Mangrove Restoration India) करना और तटीय समुदायों की आजीविका को बढ़ाना है। 

प्रश्न 4: Mangrove Conservation Gujarat के क्या benefits हैं?

उत्तर: इससे कच्छ के तटीय क्षेत्रों में चक्रवातों से सुरक्षा मिलेगी, समुद्री जैव विविधता बढ़ेगी तथा ‘मैंग्रोव जीआईएस पोर्टल’ से वैज्ञानिक निगरानी संभव होगी।

प्रश्न 5: Mangroves Coastal Ecosystem के लिए क्यों महत्वपूर्ण हैं?

उत्तर: ये तटीय वर्षावनों (Coastal Rainforests) की तरह कार्य करते हैं, जो मृदा अपरदन रोकते हैं, सुनामी की तीव्रता कम करते हैं और समुद्री जीवों के लिए नर्सरी बनते हैं।

प्रश्न 6: Mangrove Plantation India climate change से कैसे लड़ता है?

उत्तर: मैंग्रोव पौधे सामान्य जंगलों से चार गुना अधिक ब्लू कार्बन (Blue Carbon) का संचय करते हैं, जिससे ग्रीनहाउस गैसों के वैश्विक उत्सर्जन को कम करने में मदद मिलती है।

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