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क्या हैं Kishau Project? जिसके लिए 6 राज्यों के बीच हुआ ऐतिहासिक समझौता

क्या हैं Kishau Project? जिसके लिए 6 राज्यों के बीच हुआ ऐतिहासिक समझौता

Kishau Project

संदर्भ:

हाल ही में 15 सितंबर 2026 को नई दिल्ली के कर्तव्य भवन में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सी.आर. पाटिल की उपस्थिति में किशाऊ परियोजना (Kishau Project) के क्रियान्वयन के लिए छह राज्यों के मुख्यमंत्रियों के बीच एक ऐतिहासिक समझौता (Kishau Project Agreement) संपन्न हुआ। 

किशाऊ बहुउद्देशीय परियोजना (Kishau Multipurpose Project) क्या है?

  • परिचय: किशाऊ बहुउद्देशीय परियोजना (Kishau Multipurpose Project) एक अंतर-राज्यीय जल भंडारण और जलविद्युत उत्पादन जलमार्ग परियोजना है।
    • इसे भारत सरकार द्वारा ‘राष्ट्रीय परियोजना’ (National Project) घोषित किया गया है। इस यमुना बेसिन परियोजना (Yamuna Basin Project) का प्राथमिक उद्देश्य जल संरक्षण (Water Conservation), बाढ़ नियंत्रण, कृषि सिंचाई नेटवर्क का विस्तार और जलविद्युत का उत्पादन करना है।
  • स्थिति: यह परियोजना यमुना नदी की सबसे बड़ी प्रमुख सहायक नदी टोंस नदी (Tons River) पर बनाई जा रही है।
    • यह टोंस नदी परियोजना (Tons River Project) इचारी बांध के अपस्ट्रीम में स्थित है।
    • बांध का निर्माण उत्तराखंड के देहरादून जिले और हिमाचल प्रदेश के सिरमौर जिले की सीमाओं को विभाजित करने वाले प्राकृतिक क्षेत्र में किया जा रहा है।
  • संस्था: परियोजना के निष्पादन और प्रबंधन के लिए किशाऊ कॉर्पोरेशन लिमिटेड (Kishau Corporation Limited) का गठन किया गया है।
    • यह उत्तराखंड सरकार और हिमाचल प्रदेश सरकार का एक संयुक्त उद्यम (Joint Venture) है, जिसमें दोनों राज्यों की आधी-आधी (50:50) हिस्सेदारी है। 
    • इसके अध्यक्ष पद का दायित्व दोनों राज्यों के मुख्य सचिवों द्वारा दो-दो वर्ष के चक्र में (Rotation Basis) संभाला जाता है।
  • पृष्ठभूमि: इस परियोजना की नींव सर्वप्रथम 12 मई 1994 को ऊपरी यमुना बेसिन राज्यों के बीच हुए साझा जल उपयोग समझौते (MoU) के तहत रखी गई थी।
    • राज्यों के बीच वित्तीय लागत साझा करने के तौर-तरीकों, बिजली के स्वामित्व और विशेष रूप से हिमाचल प्रदेश के विस्थापित परिवारों के पुनर्वास (Rehabilitation) मुआवजों को लेकर पिछले आठ वर्षों से गतिरोध बना हुआ था।
    • 16 जून 2026 को गृह मंत्रालय की अध्यक्षता में हुई उच्च स्तरीय समन्वय बैठक के बाद इस विवाद को सुलझाया गया, जिसके परिणामस्वरूप सितंबर 2026 में अंतिम संविदा (MoA) पर हस्ताक्षर संभव हो सके।
  • विशिष्टताएं:
    • बांध का प्रकार: यह 232.6 मीटर ऊंचा कंक्रीट ग्रेविटी बांध (Concrete Gravity Dam) होगा।
    • भंडारण क्षमता: बांध की कुल जल भंडारण क्षमता 1,562 मिलियन घन मीटर (MCM) है।
    • बिजली उत्पादन (Kishau Hydroelectric Project): इस पनबिजली संयंत्र की स्थापित क्षमता 422 मेगावाट (MW) से लेकर अधिकतम परिचालन पर 660 मेगावाट (MW) तक डिजाइन की गई है। इससे प्रतिवर्ष लगभग 1,476 मिलियन यूनिट (MU) स्वच्छ ऊर्जा का उत्पादन होगा। 
    • सिंचाई क्षमता: इसके माध्यम से छह राज्यों के अंतर्गत आने वाली लगभग 97,076 हेक्टेयर कृषि भूमि को सुनिश्चित सिंचाई सुविधा (Irrigation Project) प्राप्त होगी। 
  • शामिल राज्य: Kishau Project Agreement में ऊपरी यमुना बेसिन (Upper Yamuna Basin) के सभी 6 भागीदार राज्य शामिल हैं: 
  1. उत्तराखंड (सह-मेजबान राज्य)
  2. हिमाचल प्रदेश (सह-मेजबान राज्य)
  3. उत्तर प्रदेश (लाभार्थी)
  4. हरियाणा (लाभार्थी)
  5. राजस्थान (लाभार्थी)
  6. दिल्ली (राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र – मुख्य लाभार्थी)
  • कुल अनुमानित लागत: इस वृहद् परियोजना के निर्माण की कुल अनुमानित लागत ₹15,624 करोड़ आंकी गई है।
  • फंडिंग पैटर्न: राष्ट्रीय परियोजना होने के नाते, इसके जल घटक (Water Component) की कुल लागत का 90 प्रतिशत हिस्सा केंद्र सरकार केंद्रीय सहायता के रूप में वहन करेगी। शेष 10 प्रतिशत वित्तीय भार को सभी छह सहभागी राज्यों के बीच उनकी आवश्यकता के अनुपात में साझा किया जाएगा। 

महत्व:

  • यमुना नदी का पुनरुद्धार: समझौते की सबसे बड़ी विशिष्टता यह है कि एकत्रित जल का 25 प्रतिशत हिस्सा यमुना नदी के पर्यावरणीय प्रवाह (Environmental Flow) को बनाए रखने के लिए आरक्षित किया गया है। इससे यमुना के प्रदूषण को कम करने और नदी को पुनर्जीवित करने में मदद मिलेगी।
  • दिल्ली को जल सुरक्षा (Kishau Project Delhi Water Supply): राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली इस परियोजना की सबसे बड़ी लाभार्थी बनकर उभरेगी। दिल्ली को प्रतिवर्ष 109.9 मिलियन घन मीटर (MCM) अतिरिक्त शुद्ध पेयजल की आपूर्ति होगी, जिससे गर्मियों में होने वाला जल संकट पूरी तरह समाप्त हो जाएगा।
  • अंतर-राज्यीय समन्वय का मॉडल: हिमाचल प्रदेश की जल हिस्सेदारी को दिल्ली और राजस्थान को हस्तांतरित करने पर सहमति बनी है, जिसके बदले ये दोनों राज्य हिमाचल प्रदेश के बिजली घटक (Power Component) के वित्तीय भार को साझा करेंगे। हिमाचल प्रदेश को प्रतिवर्ष 1,000 मिलियन यूनिट बिजली का लाभ मिलेगा।
  • कृषि अवसंरचना का सुदृढ़ीकरण: हरियाणा, राजस्थान और पश्चिमी उत्तर प्रदेश के शुष्क कृषि क्षेत्रों को नई सिंचाई क्षमता मिलेगी, जिससे फसल उत्पादकता (Crop Productivity) में वृद्धि होगी। 

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

प्रश्न 1: Kishau Project क्या है और यह कहां बनाया जा रहा है?

उत्तर: यह उत्तराखंड के देहरादून और हिमाचल प्रदेश के सिरमौर जिले की सीमा पर टोंस नदी (यमुना की सहायक नदी) पर बनने वाला एक राष्ट्रीय बहुउद्देशीय बांध प्रोजेक्ट है।

प्रश्न 2: Kishau Multipurpose Project के लिए किन छह राज्यों के बीच समझौता हुआ है?

उत्तर: इस ऐतिहासिक समझौते पर उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश, उत्तर प्रदेश, हरियाणा, राजस्थान और दिल्ली के मुख्यमंत्रियों द्वारा हस्ताक्षर किए गए हैं।

प्रश्न 3: Kishau Vermillion/Dam Project की बिजली उत्पादन क्षमता कितनी है?

उत्तर: इस पनबिजली परियोजना की कुल स्थापित क्षमता 660 मेगावाट (MW) है, जिससे प्रतिवर्ष 1,476 मिलियन यूनिट स्वच्छ बिजली उत्पन्न होगी।

प्रश्न 4: Kishau Project Water Sharing के तहत राज्यों को कितना पानी मिलेगा?

उत्तर: बांध से राज्यों को सालाना 517 MCM पेयजल मिलेगा, जिसमें से दिल्ली को 109.9 MCM मिलेगा। शेष पानी सिंचाई और यमुना के पर्यावरणीय प्रवाह हेतु आवंटित होगा।

प्रश्न 5: Tons River Project का Yamuna Basin से क्या संबंध है?

उत्तर: टोंस नदी यमुना बेसिन की सबसे बड़ी जलप्रलापी सहायक नदी है। इस पर बांध बनाने से संपूर्ण ऊपरी यमुना बेसिन राज्यों में जल का प्रवाह नियंत्रित और संवर्धित होगा। 

प्रश्न 6: Kishau Project Agreement 2026 से दिल्ली को क्या लाभ मिलेगा?

उत्तर: दिल्ली को भारी मात्रा में अतिरिक्त स्वच्छ पेयजल (109.9 MCM) की आपूर्ति (Delhi Water Supply) होगी और यमुना नदी में जल स्तर सुधरने से जल प्रदूषण कम होगा।

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