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Gandhi Sagar Sanctuary: स्थिति, क्षेत्रफल, दर्जा एवं महत्वपूर्ण तथ्य

Gandhi Sagar Sanctuary: स्थिति, क्षेत्रफल, दर्जा एवं महत्वपूर्ण तथ्य

Gandhi Sagar Sanctuary

संदर्भ:

हाल ही में मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव द्वारा बोत्सवाना से लाई गई मादा चीता सीसीबी-2 (CCB-2), जिसे ‘राधा’ नाम दिया गया है, को गांधी सागर अभयारण्य (Gandhi Sagar Sanctuary) के सुरक्षित बाड़े में विमुक्त किया गया. 

गांधी सागर अभयारण्य के बारे मे:

  • स्थिति: Gandhi Sagar Sanctuary भारत के मध्य प्रदेश राज्य के उत्तर-पश्चिमी भाग में मंदसौर और नीमच जिलों की उत्तरी सीमा पर स्थित है.
    • यह अभयारण्य भारत के राजस्थान राज्य की सीमा से ठीक सटा हुआ है, जो इसके पारिस्थितिकीय विस्तार को अंतर-राज्यीय निरंतरता प्रदान करता है. 
  • नदी निकाय: प्रसिद्ध चंबल नदी (Chambal River) इस अभयारण्य के बीच से होकर बहती है और इसे दो स्पष्ट प्राकृतिक भागों में विभाजित करती है—पश्चिमी भाग नीमच जिले में और पूर्वी भाग मंदसौर जिले में पड़ता है.
    • यह प्रसिद्ध गांधी सागर बांध (Gandhi Sagar Dam) के विशाल जलाशय के जलग्रहण क्षेत्र को घेरता है.
  • सन्निहित परिदृश्य: यह राजस्थान के भैंसरोडगढ़ वन्यजीव अभयारण्य (Bhainsrodgarh Wildlife Sanctuary) से सटा हुआ है, जिससे वन्यजीवों के मुक्त संचरण (Dispersal Landscape) के लिए एक बड़ा गलियारा उपलब्ध होता है. 
  • क्षेत्रफल: यह अभयारण्य कुल 368.62 वर्ग किलोमीटर (368.62 sq km) के क्षेत्र में विस्तृत है. इसका विशाल खुला पठारी भूभाग और सवाना घास के मैदान चीतों जैसे तीव्र गति वाले शिकारियों के अनुकूल हैं.
  • प्रशासनिक दर्जा: इसे पहली बार वर्ष 1974 में मध्य प्रदेश सरकार द्वारा ‘वन्यजीव अभयारण्य’ (Wildlife Sanctuary) के रूप में अधिसूचित किया गया था.
    • वर्ष 1983 में इसमें और अधिक वन क्षेत्र को जोड़ा गया ताकि इसके पारिस्थितिकी तंत्र (Ecosystem) को पूर्णता दी जा सके.
  • प्रमुख वनस्पतियाँ (Flora): यह क्षेत्र खाथियार-गिर शुष्क पर्णपाती वन (Khathiar-Gir Dry Deciduous Forests) पारिस्थितिक क्षेत्र के अंतर्गत आता है.
    • यहाँ विरल वनस्पति और पथरीले भूभाग के साथ शुष्क कँटीले वन पाए जाते हैं. प्रमुख वृक्ष प्रजातियों में खैर (Khair), सलाई (Salai), करधई (Kardhai), धावड़ा (Dhawda), तेंदू (Tendu) और पलाश (Palash) शामिल हैं.
  • प्रमुख वन्यजीव (Fauna): यह अभयारण्य चिंकारा (Chinkara), नीलगाय (Nilgai), तेंदुआ (Leopard), जंगली सूअर, सियार (Jackal), चौसिंगा (Four-horned Antelope) और लंगूर का प्राकृतिक आवास है.
    • चंबल नदी का जलाशय मगरमच्छ (Mugger Crocodile), घड़ियाल (Gharial) और विभिन्न प्रकार के जलपक्षियों को आश्रय देता है. इसे एक ‘महत्वपूर्ण पक्षी क्षेत्र’ (Important Bird Area – IBA) भी घोषित किया गया है.

प्रोजेक्ट चीता और गांधी सागर अभयारण्य:

गांधी सागर अभयारण्य अब भारत में कूनो राष्ट्रीय उद्यान (Kuno National Park) के बाद चीतों का दूसरा आधिकारिक निवास स्थान (Second Cheetah Habitat) बन चुका है:

  • शुरुआती स्थानांतरण: अप्रैल 2025 में कूनो से दो नर चीतों—पावक और प्रभास—को यहाँ लाकर इसे देश का दूसरा चीता गंतव्य बनाया गया था. तदुपरांत सितंबर 2025 में मादा चीता ‘धीरा’ यहाँ लाई गई थी.
  • नवीनतम घटनाक्रम (सितंबर 2026): बोत्सवाना मूल की तीन वर्षीय मादा चीता CCB-2 (राधा) के आगमन से गांधी सागर में चीतों की कुल संख्या बढ़कर 4 (2 नर और 2 मादा) हो गई है.
    • राधा को फरवरी 2026 में भारत लाया गया था और कूनो में अनुकूलन के बाद अब यहाँ स्थानांतरित किया गया है.
      • भारत में ‘प्रोजेक्ट चीता’ की शुरुआत 17 सितंबर 2022 को हुई थी, जिसका उद्देश्य देश से विलुप्त हो चुके चीतों को पुनः बसाना है।
      • सितंबर 2026 में इस प्रोजेक्ट के 4 साल पूरे हो चुके हैं। वर्तमान में भारत में चीतों की कुल संख्या बढ़कर 52 से 56 के बीच पहुँच चुकी है।

चीतों को गांधी सागर में लाने का रणनीतिक उद्देश्य:

  • जोखिम का न्यूनीकरण (Metapopulation Management): सभी चीतों को केवल कूनो राष्ट्रीय उद्यान (KNP) तक सीमित रखने से किसी बीमारी या महामारी के फैलने पर पूरी आबादी के विलुप्त होने का खतरा था. गांधी सागर के रूप में एक वैकल्पिक गंतव्य (Alternative Habitat) तैयार कर इस जोखिम को कम किया गया है.
  • आनुवंशिक विविधता (Genetic Diversity): गांधी सागर में दक्षिण अफ्रीका और बोत्सवाना दोनों देशों के चीतों को एक साथ रखा गया है. वन्यजीव विशेषज्ञों के अनुसार, विभिन्न आनुवंशिक पृष्ठभूमि के जीवों के बीच प्रजनन से पैदा होने वाली संतति जैविक रूप से अधिक मजबूत होगी.
  • अनुकूल शिकारगाह (Ideal Hunting Terrain): यहाँ के विरल वन, पथरीले पठार और सवाना जैसे खुले घास के मैदान चीतों को उनकी प्राकृतिक शिकार शैली (High-speed Hunting) के लिए कूनो की तुलना में अधिक उपयुक्त धरातल प्रदान करते हैं. 

ऐतिहासिक एवं सांस्कृतिक महत्व:

  • हिंगलाजगढ़ किला (Hinglajgarh Fort): अभयारण्य के भीतर स्थित यह प्राचीन किला परमार राजाओं के काल की कला और स्थापत्य कला का गवाह है.
  • चतुर्भुजनाथ मंदिर और शैलचित्र (Rock Paintings): यहाँ भड़कजी के प्रागैतिहासिक काल के रॉक पेंटिंग्स (शैलचित्र) मौजूद हैं, जो हजारों साल पुराने मानव इतिहास को दर्शाते हैं.
  • तक्षकेश्वर मंदिर (Taxakeshwar Temple): यह धार्मिक स्थल अपनी प्राकृतिक गुफा और झरने के लिए प्रसिद्ध है.

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

प्रश्न 1: गांधी सागर अभयारण्य कहाँ स्थित है?

उत्तर: यह वन्यजीव अभयारण्य भारत के मध्य प्रदेश राज्य के उत्तर-पश्चिमी भाग में राजस्थान की सीमा के समीप स्थित है.

प्रश्न 2: Gandhi Sagar Sanctuary का क्षेत्रफल कितना है?

उत्तर: इस अभयारण्य (Gandhi Sagar Wildlife Sanctuary Area) का कुल भौगोलिक क्षेत्रफल लगभग 368.62 वर्ग किलोमीटर है.

प्रश्न 3: Gandhi Sagar Sanctuary को Wildlife Sanctuary का दर्जा कब मिला?

उत्तर: इस पारिस्थितिकीय क्षेत्र को मध्य प्रदेश सरकार द्वारा वर्ष 1974 में आधिकारिक तौर पर वन्यजीव अभयारण्य का दर्जा दिया गया था.

प्रश्न 4: गांधी सागर अभयारण्य किन जिलों में फैला है?

उत्तर: इसका मुख्य प्रशासनिक विस्तार मध्य प्रदेश के मंदसौर और नीमच जिलों के अंतर्गत आता है. 

प्रश्न 5: Gandhi Sagar Sanctuary में कौन-कौन से wildlife पाए जाते हैं?

उत्तर: यहाँ मुख्य रूप से चीता, तेंदुआ, चिंकारा, नीलगाय, चौसिंगा, मगरमच्छ, घड़ियाल और अनेक दुर्लभ जलपक्षी पाए जाते हैं. 

प्रश्न 6: गांधी सागर अभयारण्य में cheetah क्यों लाए जा रहे हैं?

उत्तर: कूनो के बाद चीतों का दूसरा सुरक्षित आवास विकसित करने, आनुवंशिक विविधता बनाए रखने और किसी महामारी के जोखिम को कम करने के लिए यहाँ चीते लाए जा रहे हैं.

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