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India Next Generation Missile Vessels: प्रोजेक्ट, विशेषताएं, एवं सामरिक महत्व

India Next Generation Missile Vessels: प्रोजेक्ट, विशेषताएं, एवं सामरिक महत्व

India Next Generation Missile Vessels

संदर्भ:

हाल ही में को कोच्चि स्थित कोचीन शिपयार्ड लिमिटेड (Cochin Shipyard Limited – CSL) में भारतीय नौसेना के लिए पहली अगली पीढ़ी के मिसाइल पोत (Next Generation Missile Vessels – NGMV) की कील (Keel-Laying) रखने का समारोह आयोजित किया गया। 

  • युद्धपोत निर्माण में कील स्थापना को निर्माण प्रक्रिया की आधिकारिक शुरुआत माना जाता है।

अगली पीढ़ी के मिसाइल पोत (Next Generation Missile Vessels – NGMV):

  • परियोजना: अगली पीढ़ी के मिसाइल पोत (NGMV Project 2026) हेतु भारतीय नौसेना ने मार्च 2023 में छह (06) उन्नत मिसाइल पोतों के निर्माण के लिए सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रम कोचीन शिपयार्ड (NGMV Cochin Shipyard) के साथ रक्षा समझौते पर हस्ताक्षर किए थे।
  • परियोजना लागत (Project Cost): इस पूरी रक्षा परियोजना की कुल स्वीकृत लागत ₹9,805 करोड़ है।
  • रोजगार सृजन: रक्षा मंत्रालय (MoD) के अनुसार, इस 9-वर्षीय परियोजना के माध्यम से घरेलू उद्योगों और सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों (MSMEs) में लगभग 45 लाख मानव-दिवस (Man-days) का प्रत्यक्ष रोजगार उत्पन्न होगा।
  • विशेषताएं: 
  • वाटरजेट तकनीक (Waterjet Propulsion): ये जहाज वाटरजेट से संचालित होने वाले भारतीय नौसेना (Indian Navy) के सबसे बड़े पोत होंगे। इसके लिए ‘कामेवा वाटरजेट’ प्रणाली का उपयोग किया जा रहा है।
  • गैस टर्बाइन इंजन: प्रत्येक पोत में GE एरोस्पेस LM2500 गैस टर्बाइन इंजन लगाया जाएगा, जिसे हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (HAL) द्वारा भारत में ही असेंबल किया जा रहा है।
  • अधिकतम गति: यह प्रोपल्शन सिस्टम इन पोतों को 33 समुद्री मील (Approx 61 किमी/घंटा) की उच्चतम गति प्रदान करने में सक्षम है।
  • क्षमता: प्रत्येक पोत पर कुल 80 नौसैनिकों का दल (Complement of Personnel) तैनात रहेगा और ये बिना रीफ्यूलिंग के लगातार 10 दिनों तक समुद्र में ऑपरेशन चला सकेंगे। 
  • रडार और सेंसर अवसंरचना:
    • X-बैंड मल्टी-फंक्शन रडार (MFR): भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड (BEL) द्वारा विकसित रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) का अत्याधुनिक रडार इसमें लगाया जा रहा है। 
    • इसकी रेंज लगभग 200 किलोमीटर है, जो हवाई और सतही खतरों की सटीक पहचान और फायर कंट्रोल (Fire Control Radars) सुनिश्चित करता है।
  • स्टील्थ तकनीक (Stealth Technology): इन पोतों के डिजाइन में कम रडार क्रॉस-सेक्शन (Low Radar Cross-Section) का ध्यान रखा गया है।
    • स्टील्थ डिजाइन के कारण दुश्मन के रडार इन जहाजों को आसानी से नहीं पकड़ पाते, जिससे इन्हें चुपके से दुश्मन की सीमा के नजदीक जाकर अचानक हमला करने (Surprise Attack) में मदद मिलती है। 
  • हथियार प्रणालियाँ:
    • ब्रह्मोस मिसाइल प्रणाली (BrahMos Missile System): मुख्य आक्रामक हथियार के रूप में सतह से सतह पर मार करने वाले ब्रह्मोस के झुके हुए लॉन्चर (Inclined Launchers) लगाए गए हैं।
    • हवाई रक्षा (Air Defence): हवाई खतरों से सुरक्षा के लिए VL-SRSAM (वेरी शॉर्ट रेंज सरफेस-टू-एयर मिसाइल) एंटी-मिसाइल डिफेंस सिस्टम तैनात रहेगा।
    • तटीय तोपें: अग्रभाग में 76 एमएम की एसआरजीएम तोप (SRGM Gun) और हवाई हमलों को आखिरी घेरे में नाकाम करने के लिए AK-630M क्लोज-इन वेपन सिस्टम (CIWS) शामिल है।
  • डिलीवरी का समय (NGMV Delivery 2027): इस प्रोजेक्ट के तहत पहले युद्धपोत (Next Generation Missile Vessels) की आपूर्ति मार्च 2027 में निर्धारित की गई है। इसके बाद आगामी वर्षों में क्रमिक रूप से सभी छह पोत भारतीय नौसेना के बेड़े में शामिल कर लिए जाएंगे।

इनका सामरिक महत्व:

  • समुद्री आक्रमण क्षमता (Maritime Strike Capability): ये पोत दुश्मन के युद्धपोतों, मर्चेंट जहाजों और भूमि पर स्थित ठिकानों के खिलाफ भारी आक्रमण क्षमता प्रदान करते हैं। अपनी उच्च गति के कारण ये तुरंत ‘हिट एंड रन’ (स्ट्राइक करके तेजी से निकलना) मिशन को अंजाम दे सकते हैं।
  • चोक पॉइंट्स पर सागर निषेध (Sea Denial at Choke Points): मलक्का जलडमरूमध्य (Strait of Malacca) और अदन की खाड़ी जैसे रणनीतिक समुद्री चोक पॉइंट्स पर दुश्मन की नौसेना की आवाजाही को रोकने या बाधित करने (Sea Denial) में ये छोटे लेकिन घातक पोत अत्यंत प्रभावी हथियार साबित होंगे।
  • पुराने बेड़े का प्रतिस्थापन: ये आधुनिक प्लेटफॉर्म नौसेना के पुराने हो रहे ‘वीर-क्लास’ (Veer-class) मिसाइल बोट्स का स्थान लेंगे, जिन्होंने 1971 के युद्ध में ‘ऑपरेशन ट्राइडेंट’ के दौरान कराची बंदरगाह को तबाह करने में ऐतिहासिक भूमिका निभाई थी।
  • अपतटीय संपत्तियों की सुरक्षा: रक्षात्मक भूमिका में, ये भारत के अपतटीय विकास क्षेत्रों (Offshore Development Areas – ODA) जैसे मुंबई हाई तेल क्षेत्रों की समुद्री सुरक्षा और तटीय रक्षा को सुनिश्चित करेंगे।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

प्रश्न 1: Next Generation Missile Vessels यानी NGMV क्या हैं?

उत्तर: यह भारतीय नौसेना (Indian Navy) के लिए स्वदेशी रूप से विकसित किए जा रहे अत्याधुनिक, उच्च गति और स्टील्थ क्षमता वाले भारी हथियारों से लैस मिसाइल पोत हैं।

प्रश्न 2: Indian Navy कितने NGMV हासिल करेगी?

उत्तर: रक्षा अनुबंध के तहत कोचीन शिपयार्ड लिमिटेड (CSL) द्वारा कुल छह (06) अगली पीढ़ी के मिसाइल पोतों का निर्माण किया जा रहा है। 

प्रश्न 3: NGMV project की लागत कितनी है?

उत्तर: भारत सरकार द्वारा इस संपूर्ण रक्षा विनिर्माण परियोजना के लिए कुल ₹9,805 करोड़ का बजट आवंटित किया गया है। 

प्रश्न 4: NGMV की delivery कब शुरू होगी?

उत्तर: इस श्रृंखला के पहले उन्नत युद्धपोत की डिलीवरी मार्च 2027 से शुरू होने वाली है, तथा शेष पोत बाद के वर्षों में सौंपे जाएंगे।

प्रश्न 5: NGMV में कौन-कौन सी प्रमुख technologies होंगी?

उत्तर: इनमें स्टील्थ डिजाइन, वाटरजेट प्रोपल्शन, ब्रह्मोस मिसाइल लॉन्चर, VL-SRSAM हवाई रक्षा और DRDO का X-बैंड मल्टी-फंक्शन रडार शामिल हैं।

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