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जानिए Satellite Smart Anti-Airfield Weapon के बारे में, 811 करोड़ में खरीदे जाएंगे 160 स्मार्ट बम

जानिए Satellite Smart Anti-Airfield Weapon के बारे में, 811 करोड़ में खरीदे जाएंगे 160 स्मार्ट बम

Satellite Smart Anti-Airfield Weapon

Image Credit: BDL

संदर्भ:

हाल ही में रक्षा मंत्रालय (Ministry of Defence) ने भारतीय वायुसेना (IAF) की मारक क्षमता बढ़ाने के लिए भारत डायनेमिक्स लिमिटेड (BDL) के साथ ₹810.79 करोड़ के अनुबंध पर हस्ताक्षर किए।

  • इस समझौते के तहत 160 सैटेलाइट स्मार्ट एंटी-एयरफील्ड हथियारों (Satellite Smart Anti-Airfield Weapon: SAT-SAAW) की खरीद की जाएगी।

सैटेलाइट स्मार्ट एंटी-एयरफील्ड बम (SAT-SAAW) के बारे में:

  • परिचय: सैटेलाइट स्मार्ट एंटी-एयरफील्ड वेपन (SAT-SAAW) हवा से जमीन पर मार करने वाला एक अत्याधुनिक, अत्यंत सटीक और गाइडेड ग्लाइड बम (Precision Guided Glide Bomb) है। 
  • तकनीकी श्रेणी: यह प्रणाली मूल रूप से लंबी दूरी से दुश्मन के हवाई अड्डों और महत्वपूर्ण रक्षा परिसंपत्तियों को नष्ट करने के लिए डिजाइन की गई है।
    • यह अमेरिकी वायुसेना द्वारा उपयोग किए जाने वाले स्मॉल डायमीटर बम (SDB) श्रेणी के 125 किलोग्राम वर्ग के हथियारों के समकक्ष वैश्विक स्तर की प्रणाली है।
  • अनुसंधान एवं डिजाइन: इस स्मार्ट बम को रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन (DRDO) की प्रमुख प्रयोगशाला अनुसंधान केंद्र इमारत (Research Centre Imarat – RCI), हैदराबाद द्वारा स्वदेशी रूप से डिजाइन और विकसित किया गया है।
    • इसके अतिरिक्त, इसके वारहेड को आर्मामेंट रिसर्च एंड डेवलपमेंट एस्टेब्लिशमेंट (ARDE) द्वारा तैयार किया गया है।
  • उत्पादनकर्ता: रक्षा मंत्रालय द्वारा हस्ताक्षरित इस नई खरीद का निर्माण सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रम भारत डायनेमिक्स लिमिटेड (Bharat Dynamics Limited – BDL) द्वारा किया जा रहा है। 
  • विशेषताएं:
    • वजन और वारहेड क्षमता: इस हल्के वजन वाले उच्च परिशुद्धता बम का कुल द्रव्यमान लगभग 120 से 125 किलोग्राम है, जिसमें लगभग 80 किलोग्राम का उच्च विस्फोटक (High Explosive) पेनिट्रेशन-कम-ब्लास्ट (PCB) वारहेड लगा होता है। यह मजबूत और कंक्रीट से बख्तरबंद ढांचों को भेदने में सक्षम है।
    • मारक क्षमता और स्टैंड-ऑफ रेंज (Standoff Range): यह ग्लाइड बम अधिकतम 90 से 100 किलोमीटर की दूरी (Operational Range) तक अपने लक्ष्य को सटीक निशाना बना सकता है।
  • मार्गदर्शन प्रणाली (Guidance Mechanism): SAT-SAAW विशेष रूप से सैटेलाइट नेविगेशन (GPS और भारत के स्वदेशी NavIC उपग्रह नेटवर्क) प्रणाली से सुसज्जित है। यह ऑनबोर्ड इनर्शियल नेविगेशन सिस्टम (INS) के साथ एकीकृत होकर बिना किसी टर्मिनल इमेजिंग सीकर के पूरी तरह सक्रिय रहता है।
    • इसके परिणामस्वरूप, यह किसी भी मौसम में (All-weather Capability) दिन या रात के समय 7 मीटर से भी कम की अभूतपूर्व सटीकता (Accuracy) के साथ स्थिर लक्ष्यों को भेद सकता है।
  • लांचिंग प्लेटफॉर्म (Launch Platforms): इसे भारतीय वायुसेना के विभिन्न अग्रिम पंक्ति के लड़ाकू विमानों जैसे सुखोई-30 एमकेआई (Su-30 MKI), जगुआर (Jaguar), हॉक (Hawk-i) और हल्के लड़ाकू विमान (LCA Tejas) से सफलतापूर्वक दागा जा सकता है।
  • अनुबंध:
    • खरीद श्रेणी: यह अनुबंध रक्षा अधिग्रहण प्रक्रिया (DAP) की सर्वोच्च प्राथमिकता वाली ‘Buy (Indian – IDDM)’ यानी ‘भारतीय-स्वदेशी रूप से डिजाइन, विकसित और निर्मित’ श्रेणी के अंतर्गत किया गया है।
    • स्वदेशी सामग्री प्रतिशत: अनुबंधित SAT-SAAW प्रणाली में न्यूनतम 60% स्वदेशी सामग्री (Indigenous Content) शामिल होगी।
    • उप-प्रणालियों का स्वदेशीकरण: इसके तहत भारत में ही निर्मित अत्यधिक संवेदनशील उप-प्रणालियों जैसे इनर्शियल मेजरमेंट यूनिट (IMU), लॉन्ग इम्पैक्ट डिले फ्यूज (Long Impact Delay Fuse) और ट्विन स्टोर कैरियर (Twin Store Carrier) का एकीकरण शामिल किया गया है।
  • आपूर्ति समय-सीमा: BDL द्वारा इन 160 विमान-रोधी बमों की आपूर्ति वित्तीय वर्ष 2027-28 और 2028-29 के बीच निर्धारित समय-सारणी के अनुसार पूरी की जाएगी। 

राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए इसका महत्व:

  • सुरक्षित मारक क्षमता (Pilot and Aircraft Safety): 100 किमी की लंबी स्टैंड-ऑफ रेंज का सबसे बड़ा लाभ यह है कि भारतीय वायुसेना के लड़ाकू विमानों को दुश्मन की हवाई सुरक्षा (Air Defence Systems) या एंटी-एयरक्राफ्ट मिसाइलों के दायरे में प्रवेश किए बिना ही उनके ठिकानों को नेस्तनाबूद करने की सुविधा मिलती है। इससे पायलटों और महंगे विमानों की सुरक्षा सुनिश्चित होती है।
  • दुश्मन की हवाई क्षमता का शमन (Air Denying Capability): यह बम दुश्मन के एयरफील्ड के रनवे (Runways), टैक्सी-ट्रैक, रडार इंस्टॉलेशन, विमान हैंगर और कंक्रीट बंकरों को गहराई से भेदकर पूरी तरह पंगु बना सकता है। इससे युद्ध की स्थिति में विपक्षी विमानों को उड़ान भरने से रोका जा सकता है।
  • लागत-प्रभावी कूटनीतिक प्रहार: मिसाइलों की तुलना में ये ग्लाइड बम अत्यधिक सस्ते होते हैं। यह भारतीय वायुसेना को सीमित संघर्षों या त्वरित सर्जिकल स्ट्राइक के दौरान व्यापक और सघन हमले करने के लिए एक आर्थिक रूप से व्यवहार्य तथा प्रभावी मारक क्षमता प्रदान करता है। 

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

प्रश्न 1: SAT-SAAW क्या है?

उत्तर: यह रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन (DRDO) द्वारा स्वदेशी रूप से विकसित हवा से जमीन पर मार करने वाला एक सटीक-निर्देशित ग्लाइड बम (Glide Bomb) है।

प्रश्न 2: रक्षा मंत्रालय ने इसकी खरीद के लिए किसके साथ अनुबंध किया है?

उत्तर: रक्षा मंत्रालय ने भारतीय वायुसेना के लिए 160 SAT-SAAW बमों की खरीद के लिए भारत डायनेमिक्स लिमिटेड (BDL) के साथ ₹810.79 करोड़ का अनुबंध किया है।

प्रश्न 3: इस हथियार की मारक क्षमता (Range) और सटीकता क्या है?

उत्तर: यह बम हवाई जहाज से छोड़े जाने के बाद 100 किलोमीटर तक ग्लाइड कर सकता है और सैटेलाइट/NavIC मार्गदर्शन की मदद से 7 मीटर के दायरे में सटीक निशाना लगाता है। 

प्रश्न 4: इसे किन लड़ाकू विमानों से लॉन्च किया जा सकता है?

उत्तर: इसे मुख्य रूप से भारतीय वायुसेना के सुखोई-30 एमकेआई, जगुआर, हॉक और स्वदेशी एलसीए तेजस लड़ाकू विमानों से संचालित किया जा सकता है। 

प्रश्न 5: इस परियोजना में स्वदेशीकरण का क्या स्तर है?

उत्तर: यह पूरी तरह ‘Buy (Indian-IDDM)’ श्रेणी में शामिल है, जिसमें 60% स्वदेशी सामग्री होगी तथा इसके इनर्शियल मेजरमेंट यूनिट (IMU) जैसे महत्वपूर्ण हिस्से पूरी तरह स्वदेशी हैं।

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