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Kalpasar Project: परिचय, स्थिति, क्षेत्रफल एवं विशेषताएं

Kalpasar Project: परिचय, स्थिति, क्षेत्रफल एवं विशेषताएं

Kalpasar Project

संदर्भ:

हाल ही में भारत और नीदरलैंड्स ने नई दिल्ली में आयोजित 9वें भारत अंतर्राष्ट्रीय जल सप्ताह 2026 (9th India International Water Week 2026) के दौरान गुजरात की महत्वाकांक्षी कल्पसर परियोजना (Kalpasar Project) के लिए तकनीकी सहयोग आगे बढ़ाने पर विशेष जोर दिया। 

कल्पसर परियोजना के बारे में:

  • परिकल्पना: यह विश्व की सबसे बड़ी तटीय मीठे पानी के जलाशय परियोजनाओं में से एक है। इसके तहत समुद्र के आर-पार एक विशाल बांध बनाकर खारे पानी के एक हिस्से को मीठे पानी की विशाल झील में बदलने की योजना है।
  • नामकरण: इसे आधिकारिक तौर पर खंभात की खाड़ी विकास परियोजना (Gulf of Khambhat Development Project) कहा जाता है, जो ‘कल्पसर परियोजना’ (Kalpasar Dam Project) नाम से लोकप्रिय है। ‘कल्पसर’ शब्द का अर्थ हिंदू पौराणिक कथाओं के ‘कल्पवृक्ष’ (इच्छा पूरी करने वाला वृक्ष) से प्रेरित है।
  • अवस्थिति (Location): यह परियोजना पश्चिमी भारत में गुजरात के खंभात की खाड़ी (Gulf of Khambhat) में स्थित है।
  • संरेखण (Alignment): वर्ष 2026 के अद्यतन पर्यावरण मंजूरी दस्तावेजों के अनुसार, इसका संशोधित मार्ग रेखा (Alignment) भावनगर जिले के करदेज गांव को भरूच जिले के पनियादरा गांव से जोड़ता है।
    • इस नए मार्ग का चयन पारिस्थितिक रूप से संवेदनशील तटीय क्षेत्रों पर प्रत्यक्ष प्रभाव को न्यूनतम करने के लिए किया गया है।
  • जल स्रोत (Water Sources): इस जलाशय को मुख्य रूप से खाड़ी में गिरने वाली नदियों—साबरमती, माही, और धाधर के मानसून अपवाह (Runoff) से भरा जाएगा, जिसे आवश्यकतानुसार नर्मदा नदी के अधिशेष जल से भी पूरित किया जाएगा। 
  • वर्तमान स्थिति (Kalpasar Project Status 2026):
    • विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (DPR): केंद्रीय जल शक्ति मंत्रालय के अनुसार, परियोजना की विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (Kalpasar Project DPR) वर्तमान में अंतिम रूप दिए जाने के उन्नत चरण (Advanced Stage) में है।
    • पर्यावरणीय अध्ययन: मई 2026 में, गुजरात सरकार के कल्पसर विभाग ने विस्तृत पर्यावरण प्रभाव आकलन (EIA) अध्ययन शुरू करने के लिए केंद्रीय पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय (MoEFCC) में आवेदन प्रस्तुत किया था।
      • सीएसआईआर-राष्ट्रीय पर्यावरण इंजीनियरिंग अनुसंधान संस्थान (NEERI) को इसके लिए आधारभूत डेटा संग्रह हेतु मान्यता प्राप्त सलाहकार नियुक्त किया गया है।
  • समय-सीमा: यदि सभी विधिक और तटीय नियामक क्षेत्र (CRZ) की मंजूरियां समय पर प्राप्त होती हैं, तो इसका भौतिक निर्माण मई 2028 में शुरू होकर 2035 के अंत तक पूरा होने का अनुमान है।
  • भारत-नीदरलैंड्स कल्पसर सहयोग (India Netherlands Kalpasar Cooperation):
    • हस्ताक्षरित समझौते (MoUs): 24 सितंबर 2026 को भारत के केंद्रीय जल आयोग (CWC), गुजरात सरकार के कल्पसर विभाग और डच ज्ञान संस्थानों—डेल्टारेस (Deltares) तथा टीयू डेल्फ़्ट (TU Delft) के बीच दो त्रिपक्षीय एमओयू संपन्न हुए।
    • नीदरलैंड्स की विशेषज्ञता: नीदरलैंड्स के पास समुद्र को नियंत्रित करने और तटीय बांध बनाने का सदी पुराना वैश्विक अनुभव है, जैसे उनका प्रसिद्ध ‘अफ्स्लुइडिक’ (Afsluitdijk) बांध। यह सहयोग भारत को हाइड्रोलिक मॉडलिंग, तटीय इंजीनियरिंग, जलवायु लचीलापन (Climate Resilience), और डिजिटल अनुप्रयोगों में डच उन्नत इंजीनियरिंग प्रथाओं का लाभ प्रदान करेगा।
  • विशेषताएं:
    • संशोधित लागत (Project Cost): मई 2026 के नए वित्तीय आकलनों के अनुसार, इस परियोजना की कुल अनुमानित लागत संशोधित होकर ₹1,33,246 करोड़ (लगभग 16 बिलियन अमेरिकी डॉलर) हो गई है।
    • बांध की लंबाई और आकार (Dam Dimensions): खंभात की खाड़ी के पार प्रस्तावित बांध (Gulf of Khambhat Dam) की कुल लंबाई लगभग 60.13 किलोमीटर होगी।
    • जलाशय का क्षेत्रफल और क्षमता: इसके निर्माण से समुद्र के भीतर लगभग 1,600 से 2,000 वर्ग किलोमीटर क्षेत्रफल में विस्तृत मीठे पानी की विशाल झील बनेगी। इसमें लगभग 7,807 मिलियन घन मीटर (MCM) मीठा पानी संग्रहित करने की क्षमता होगी।
    • परिवहन गलियारा (Transport Corridor): बांध की ऊपरी चौड़ाई पर एक विशाल 130 मीटर (430 फीट) चौड़ा परिवहन गलियारा विकसित किया जाएगा। इसमें 16-लेन की सड़क (एक्सप्रेसवे) और 4-लेन का रेल नेटवर्क शामिल करने का प्रस्ताव है।
    • नवीकरणीय ऊर्जा घटक (Renewable Energy Component): पूर्व के ज्वारीय ऊर्जा (Tidal Energy) प्रस्ताव को तकनीकी जटिलताओं के कारण हटाकर, अब अधिशेष भूमि पर 2,470 मेगावाट (MW) क्षमता का पवन-सौर हाइब्रिड सिस्टम (Wind-Solar Hybrid System) स्थापित करने की योजना है, जो सालाना 2,500 मिलियन यूनिट बिजली उत्पन्न करेगा।

कल्पसर परियोजना के बहुआयामी लाभ:

  • सौराष्ट्र में जल संकट का स्थायी समाधान: गुजरात का सौराष्ट्र (Saurashtra) क्षेत्र ऐतिहासिक रूप से गंभीर जल संकट से जूझता रहा है। यह जलाशय 9 जिलों के 42 तालुकों की 10 लाख हेक्टेयर से अधिक कृषि भूमि को सिंचाई और करोड़ों नागरिकों को सुनिश्चित पेयजल उपलब्ध कराएगा।
  • रसद और परिवहन दूरी में भारी कमी (Logistical Advantage): खाड़ी के ऊपर बनने वाले एक्सप्रेसवे-सह-रेल कॉरिडोर से भावनगर और सूरत के बीच की दूरी लगभग 200 किलोमीटर कम हो जाएगी। इससे सौराष्ट्र और दक्षिण गुजरात के बीच यात्रा के समय में करीब 5 से 6 घंटे की बचत होगी, जिससे ईंधन और लॉजिस्टिक्स लागत घटेगी।
  • तटीय मृदा का सुधार (Salinity Ingress Mitigation): मीठे पानी के इस विशाल संचय से सौराष्ट्र और मध्य गुजरात के तटीय इलाकों में होने वाले खारे पानी के प्रवेश (Salinity Ingress) पर रोक लगेगी, जिससे भूजल स्तर ऊपर उठेगा और तटीय कृषि भूमि की उर्वरता में सुधार होगा।
  • औद्योगिक और आर्थिक गलियारे का विकास: सुनिश्चित पानी और त्वरित कनेक्टिविटी मिलने से इस बेल्ट में विशेष आर्थिक क्षेत्रों (SEZs), बंदरगाहों, और भारी विनिर्माण उद्योगों का तीव्र विकास होगा, जो भारत की जीडीपी में योगदान देगा।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

प्रश्न 1: कल्पसर परियोजना क्या है?

उत्तर: यह गुजरात में खंभात की खाड़ी के आर-पार 60 किमी लंबा बांध बनाकर समुद्र के भीतर विश्व का सबसे बड़ा मीठे पानी का तटीय जलाशय (Coastal Freshwater Reservoir) बनाने की एक बहुउद्देशीय योजना है।

प्रश्न 2: Kalpasar Project कहां स्थित है?

उत्तर: यह भारत के गुजरात राज्य में खंभात की खाड़ी (Gulf of Khambhat) के ऊपर स्थित है, जो भावनगर और भरूच जिलों के तटीय तंतुओं को आपस में जोड़ता है। 

प्रश्न 3: Kalpasar Project की current status क्या है?

उत्तर: सितंबर 2026 तक, इसकी विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (DPR) अंतिम चरण में है तथा नीदरलैंड्स के साथ तकनीकी सहयोग और क्षमता निर्माण के लिए दो त्रिपक्षीय समझौतों (MoUs) पर हस्ताक्षर किए गए हैं। 

प्रश्न 4: कल्पसर परियोजना में क्या बनाया जाएगा?

उत्तर: इसमें 60 किमी लंबा बांध, 7807 MCM क्षमता की मीठे पानी की झील, 16-लेन एक्सप्रेसवे, 4-लेन रेलवे लाइन और 2470 मेगावाट का पवन-सौर हाइब्रिड ऊर्जा पार्क बनाया जाएगा। 

प्रश्न 5: कल्पसर परियोजना का उद्देश्य क्या है?

उत्तर: इसका मुख्य उद्देश्य सौराष्ट्र में सिंचाई व पेयजल संकट दूर करना, नवीकरणीय ऊर्जा उत्पादन बढ़ाना और दक्षिण गुजरात व सौराष्ट्र के बीच परिवहन दूरी को आधा करना है।

प्रश्न 6: कल्पसर परियोजना से गुजरात को क्या लाभ होगा?

उत्तर: इससे 10 लाख हेक्टेयर भूमि को सिंचाई मिलेगी, भावनगर-सूरत की दूरी 200 किमी घटेगी, भूजल स्तर सुधरेगा और 2,470 MW हरित ऊर्जा प्राप्त होगी।

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