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Steel Industry Safety Council: परिचय, संरचना, कार्य एवं महत्व 

Steel Industry Safety Council: परिचय, संरचना, कार्य एवं महत्व 

Steel Industry Safety Council

संदर्भ:

हाल ही में इस्पात मंत्रालय (Ministry of Steel) ने भारतीय इस्पात उद्योग (Indian Steel Industry Safety) में सुरक्षा मानकों को मजबूत करने और कार्यस्थलों पर दुर्घटना निवारण के उद्देश्य से एक शीर्ष स्तरीय उद्योग सुरक्षा निकाय के रूप में इस्पात उद्योग सुरक्षा परिषद (Steel Industry Safety Council – SISC) की स्थापना की घोषणा की।

इस्पात उद्योग सुरक्षा परिषद (SISC) क्या हैं?

  • परिचय: इस्पात उद्योग सुरक्षा परिषद (Steel Industry Safety Council India), भारत के इस्पात क्षेत्र में एक व्यापक सुरक्षा संस्कृति (Safety Culture) का निर्माण करने के लिए गठित की गई एक इकाई है।
    • इस्पात निर्माण एक अत्यधिक जोखिम भरा और जटिल औद्योगिक कार्य है, जिसमें उच्च तापमान, भारी मशीनरी और खतरनाक गैसों का प्रबंधन शामिल होता है। 
    • इन जोखिमों को कम करने और देश भर में एक समान सुरक्षा पद्धतियों को लागू करने के लिए इस शीर्ष निकाय (Apex Body) का गठन किया गया है। 
  • मंत्रालय: यह परिषद इस्पात मंत्रालय के प्रशासनिक नियंत्रण (Administrative Control) के तहत काम करेगी। 
  • तकनीकी सहयोग: परिषद को मजबूत तकनीकी और पेशेवर सहायता (Technical and Professional Support) प्रदान करने के लिए एक विशिष्ट तकनीकी निकाय इस्पात उद्योग सुरक्षा निदेशालय (Steel Industry Safety Directorate – SISD) की भी स्थापना की जाएगी। 
  • संरचना:
    • SISC एक उच्च स्तरीय शासी और निर्णय लेने वाली परिषद है, जिसकी संरचना में नीति निर्माताओं, उद्योग जगत के शीर्ष नेतृत्व और वैधानिक संगठनों को शामिल किया गया है:
  • अध्यक्ष (Chairman): इस परिषद की अध्यक्षता सचिव, इस्पात मंत्रालय (Secretary, Ministry of Steel) द्वारा की जाएगी। 
  • सदस्य (Members):
    • इस्पात मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारी।
    • देश की प्रमुख एकीकृत इस्पात उत्पादक (Integrated Steel Producers) कंपनियों के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEOs)।
    • प्रमुख वैधानिक और तकनीकी संगठनों के प्रतिनिधि, जैसे:
      • खान सुरक्षा महानिदेशालय (DGMS)
      • पेट्रोलियम एवं विस्फोटक सुरक्षा संगठन (PESO)
      • राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (NDMA)
    • मान्यता प्राप्त राष्ट्रीय इस्पात प्रौद्योगिकी संस्थानों (Steel Technology Institutions) के विशेषज्ञ। 
  • इस्पात उद्योग सुरक्षा निदेशालय (SISD): यह SISC के अधीन काम करने वाला एक समर्पित कार्यकारी और तकनीकी विंग है। इसके पास इस्पात निर्माण की विभिन्न जटिल प्रणालियों में गहरी तकनीकी विशेषज्ञता होगी, जैसे: 
  • प्रक्रिया सुरक्षा (Process Safety) और धमन भट्टी (Blast Furnaces) प्रबंधन। 
  • इस्पात गलन (Steel Melting), रोलिंग मिल (Rolling Mills), और कोक ओवन (Coke Ovens) संचालन। 
  • रिफ्रैक्टरी प्रणालियाँ, विद्युत एवं यांत्रिक सुरक्षा (Electrical and Mechanical Safety)। 
  • व्यावसायिक स्वास्थ्य (Occupational Health), अग्नि इंजीनियरिंग (Fire Engineering), और आपदा प्रबंधन। 
  • कार्य और जिम्मेदारियाँ: Steel Industry Safety Council 2026 और इसके तकनीकी निदेशालय (SISD) के कार्यों को व्यापक कार्यक्षेत्रों में विभाजित किया गया है: 
  • यह परिषद संपूर्ण भारतीय इस्पात क्षेत्र में मौजूदा सुरक्षा स्थितियों की समय-समय पर गहन समीक्षा करेगी। 
  • उद्योगों में होने वाली गंभीर दुर्घटनाओं (Serious Accidents) के साथ-साथ निकट-दुर्घटना (Near-Miss Incidents) यानी बाल-बाल बचने वाली घटनाओं की केस-स्टडी के रूप में समीक्षा की जाएगी ताकि भविष्य के खतरों को टाला जा सके।
  • यह निदेशालय भारतीय कार्यदशाओं और मौसम के अनुकूल इस्पात उद्योग सुरक्षा मानकों (Steel Industry Safety Standards), सर्वोत्तम प्रथाओं और व्यापक दिशा-निर्देशों का विकास करेगा।
  • यह सुनिश्चित करेगा कि बड़ी मिलों से लेकर माध्यमिक स्तर के छोटे इस्पात संयंत्रों तक सुरक्षा नियमावली (Safety Regulations) का समान रूप से पालन हो। 
  • SISD द्वारा इस्पात संयंत्रों का समय-समय पर सुरक्षा ऑडिट (Safety Audits) और तकनीकी निरीक्षण किया जाएगा।
  • किसी भी गंभीर सुरक्षा घटना या विफलता के मामले में यह निदेशालय स्वतंत्र और निष्पक्ष तकनीकी जाँच (Investigation) का संचालन करेगा। 
  • दुर्घटनाओं और निकट-दुर्घटनाओं से संबंधित एक केंद्रीय डेटाबेस का रखरखाव किया जाएगा, ताकि डेटा-संचालित निवारक उपाय किए जा सकें।
  • यह परिषद कार्यबल के लिए आधुनिक सुरक्षा प्रशिक्षण कार्यक्रमों (Safety Training Programmes) और आपातकालीन तैयारियों (Emergency Preparedness) की रूपरेखा की समीक्षा और उसे मजबूत करेगी।

भारतीय इस्पात क्षेत्र के लिए इसका महत्व:

  • समान सुरक्षा ढांचा (Uniform Safety Framework): अब तक विभिन्न सार्वजनिक और निजी इस्पात कंपनियों के अपने अलग-अलग सुरक्षा मानक थे। SISC के माध्यम से पूरे देश के इस्पात क्षेत्र में एकीकृत सुरक्षा ढांचा (Steel Industry Safety Framework) लागू हो सकेगा।
  • मानव पूंजी की सुरक्षा (Steel Workers Safety): इस्पात कारखानों में काम करने वाले लाखों श्रमिकों और इंजीनियरों (Steel Workers Safety) के जीवन की सुरक्षा सुनिश्चित होगी, जिससे औद्योगिक कार्यस्थलों पर मृत्यु दर और चोटों में भारी कमी आएगी।
  • नियामकीय प्रभावशीलता में वृद्धि: यह परिषद मौजूदा वैधानिक निकायों जैसे DGMS या PESO के अधिकारों को कम किए बिना, उनके साथ मिलकर एक सहायक और विशेषज्ञता-आधारित तकनीकी मंच प्रदान करेगी।
  • उत्पादकता और आर्थिक स्थिरता: कार्यस्थल सुरक्षा प्रबंधन (Steel Industry Workplace Safety) बेहतर होने से दुर्घटनाओं के कारण होने वाले संयंत्र शटडाउन (Plant Shutdowns) और वित्तीय नुकसान में कमी आएगी, जिससे भारत के इस्पात उत्पादन की वैश्विक विश्वसनीयता बढ़ेगी।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

प्रश्न 1: इस्पात उद्योग सुरक्षा परिषद क्या है?

उत्तर: यह भारत सरकार के इस्पात मंत्रालय के प्रशासनिक नियंत्रण में स्थापित एक सर्वोच्च सुरक्षा निकाय (Apex Body) है, जिसका उद्देश्य इस्पात क्षेत्र में सुरक्षा मानकों और दुर्घटना निवारण को मजबूत करना है। 

प्रश्न 2: इस्पात उद्योग सुरक्षा परिषद की संरचना कैसी है?

उत्तर: इस परिषद (SISC) के अध्यक्ष सचिव, इस्पात मंत्रालय हैं और इसके सदस्यों में मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारी, इस्पात कंपनियों के CEOs तथा DGMS, PESO व NDMA के प्रतिनिधि शामिल हैं।

प्रश्न 3: इस्पात उद्योग सुरक्षा परिषद के प्रमुख कार्य क्या हैं?

उत्तर: इसके प्रमुख कार्यों में देश के इस्पात उद्योगों की सुरक्षा स्थिति का आकलन करना, दुर्घटनाओं की समीक्षा करना और नए सुरक्षा मानकों व दिशा-निर्देशों को मंजूरी देना शामिल है।

प्रश्न 4: इस्पात उद्योग में सुरक्षा क्यों महत्वपूर्ण है?

उत्तर: इस्पात निर्माण में अत्यधिक उच्च तापमान, गैस रिसाव और भारी मशीनरी जैसे गंभीर जोखिम शामिल होते हैं, जिसके कारण श्रमिकों के जीवन और संयंत्र की सुरक्षा के लिए कड़े मानक आवश्यक हैं।

प्रश्न 5: इस्पात उद्योग सुरक्षा परिषद का महत्व क्या है?

उत्तर: यह परिषद पूरे भारतीय इस्पात क्षेत्र में एकसमान सुरक्षा नीतियों (Steel Safety Guidelines India) को लागू करने, औद्योगिक दुर्घटनाओं को रोकने और एक मजबूत सुरक्षा संस्कृति विकसित करने में सहायक है।

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