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Indian Forest and Wood Certification Scheme के तहत पहला PRAMAAN पत्र जारी, किन्हें मिला यह पहला प्रमाण पत्र?

Indian Forest and Wood Certification Scheme के तहत पहला PRAMAAN पत्र जारी, किन्हें मिला यह पहला प्रमाण पत्र?

Indian Forest and Wood Certification Scheme

संदर्भ:

हाल ही में केंद्रीय पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्री भूपेंद्र यादव ने नई दिल्ली में भारतीय वन और लकड़ी प्रमाणन योजना (Indian Forest and Wood Certification Scheme – IFWCS) के तहत देश का पहला प्रमाण (PRAMAAN) पत्र जारी किया. 

  • पहला PRAMAAN पत्र आंध्र प्रदेश वन विकास निगम (APFDC) और ओडिशा के एक प्रगतिशील बांस किसान गोविंद महापात्र को संयुक्त रूप से प्रदान किया गया.

भारतीय वन और लकड़ी प्रमाणन योजना के बारे में:

  • परिचय: यह योजना भारत की अपनी पहली राष्ट्रीय वन प्रमाणन प्रणाली (National Forest Certification Scheme) है।
    • यह वनों, लकड़ी और गैर-लकड़ी वन उत्पादों (NTFPs) के प्रमाणीकरण के लिए तैयार की गई राष्ट्रीय स्तर की योजना है।
    • इसके तहत जारी होने वाले प्रमाणपत्रों को ‘प्रमाण’ (PRAMAAN) ब्रांड नाम दिया गया है, जिसका पूरा नाम “कृषि वानिकी और प्राकृतिक वानिकी संसाधनों के लिए सतत प्रबंधन पद्धतियों की मान्यता और प्रत्यायन हेतु कार्यक्रम” (Programme for Recognition and Accreditation of sustainable Management practices for Agroforestry And Natural forestry resources) है। 
  • शुरुआत: इस महत्वाकांक्षी नीतिगत ढांचे की नीतिगत घोषणा दिसंबर 2023 में की गई थी, जो अब सितंबर 2026 में जमीनी स्तर पर पहले प्रमाणन के साथ पूरी तरह लागू हुई। 
  • मंत्रालय: यह योजना पूर्णतः भारत सरकार के पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय (Ministry of Environment, Forest and Climate Change – MoEFCC) द्वारा संचालित की जा रही है।
  • संचालन निकाय (Operating Agency): इस योजना के प्रशासनिक और तकनीकी संचालन की जिम्मेदारी भारतीय वन प्रबंधन संस्थान (IIFM), भोपाल को सौंपी गई है।
  • मुख्य उद्देश्य:
    • सतत वन प्रबंधन (Sustainable Forest Management India): भारतीय वनों और कृषि वानिकी (Agroforestry) में पर्यावरण-अनुकूल और वैज्ञानिक प्रबंधन को बढ़ावा देना। 
    • वैश्विक बाजार पहुंच (Global Market Access): यूरोपीय संघ के वनों की कटाई रोधी नियमन (EUDR) जैसे कड़े अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप भारतीय वन उत्पादों को प्रमाणित कर वैश्विक खरीदारों तक पहुँचाना।
    • घरेलू उद्योगों को मजबूती: भारतीय लकड़ी आधारित उद्योगों (Wood-based Industries) के सामाजिक और पारिस्थितिक मूल्यों को बढ़ाना।
  • श्रेणियां: यह योजना मुख्य रूप से तीन प्रकार के प्रमाणन (Certification Categories) प्रदान करती है:
  • वन प्रबंधन प्रमाणन (Forest Management Certification): यह सरकारी वनों और बड़े निगमों के तहत आने वाले वृक्षारोपण क्षेत्रों के वैज्ञानिक प्रबंधन का मूल्यांकन करता है।
  • वनों से बाहर के वृक्षों का प्रबंधन (Trees Outside Forests – TOF Certification): यह दर्ज वन क्षेत्रों से बाहर निजी खेतों, कृषि वानिकी प्रणालियों और खेतों की मेड़ों पर उगाए जाने वाले पेड़ों के लिए है।
  • अभिरक्षा श्रृंखला प्रमाणन (Chain of Custody – CoC Certification): यह घटक जंगल से लेकर अंतिम उपभोक्ता तक लकड़ी के सुरक्षित और प्रमाणित संचरण (Traceability) को ट्रैक करता है। [7, 11]
  • विशेषताएं:
    • स्वतंत्र तृतीय-पक्ष ऑडिट (Third-Party Audits): यह प्रमाणन किसी स्व-घोषणा पर आधारित नहीं है। इसका आधार स्वतंत्र प्रमाणन निकायों द्वारा किया जाने वाला कठोर जमीनी ऑडिट है।
    • विधिक मानक: वन प्रबंधन का मूल्यांकन ‘भारतीय वन प्रबंधन मानकों’ (IFMS) के आधार पर होता है, जो राष्ट्रीय कार्य योजना संहिता (NWPC) 2023 का हिस्सा हैं।
    • राष्ट्रीय प्रत्यायन (Accreditation): इसके ऑडिट निकायों को भारतीय गुणवत्ता परिषद (QCI) के अंतर्गत आने वाले राष्ट्रीय प्रमाणन निकाय प्रत्यायन बोर्ड (NABCB) द्वारा मान्यता प्राप्त होना अनिवार्य है।
      • इसकी संरचना को अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप वैश्विक मान्यता (Global Recognition) प्रदान करने के लिए तैयार किया गया है। 
  • पहले प्राप्तकर्ता:
    • आंध्र प्रदेश वन विकास निगम (APFDC): इसे सत्यवेदु, कवाली, नेल्लोर और नायडू पेटा क्षेत्रों में फैले अपने लगभग 33,000 हेक्टेयर नीलगिरी (Eucalyptus) वृक्षारोपण के स्थायी और पर्यावरण-अनुकूल प्रबंधन के लिए पहला कॉर्पोरेट प्रमाण पत्र मिला।
    • गोविंद महापात्र: ओडिशा के इस सीमांत किसान को ओडिशा बांस विकास एजेंसी (OBDA) के सहयोग से की जा रही स्थायी बांस की खेती (Bamboo Farming) के लिए व्यक्तिगत श्रेणी में देश का पहला PRAMAAN पत्र दिया गया। 

योजना का महत्व:

  • ‘लोकल फॉर लोकल, एक्ट ग्लोबल’ का क्रियान्वयन: यह स्वदेशी वन उत्पादों को वैश्विक मूल्य श्रृंखलाओं (Global Value Chains) से जोड़ने का एक प्रभावी माध्यम है, जो पर्यावरण संरक्षण के साथ-साथ ‘विकसित भारत @2047’ के दृष्टिकोण को संपुष्ट करता है।
  • गैर-टैरिफ बाधाओं (Non-Tariff Barriers) का शमन: पश्चिमी देशों द्वारा पर्यावरण और वनों की कटाई से मुक्त (Deforestation-Free) स्रोतों की मांग के कारण भारतीय निर्यातकों को आ रही दिक्कतों को यह प्रमाण पत्र स्थायी विधिक समाधान प्रदान करता है।
  • कृषक आय और ग्रामीण आजीविका (Rural Livelihood): छोटे किसानों, जनजातीय समुदायों और वन-निर्भर आबादी को बिना किसी अतिरिक्त अनुपालन बोझ (Compliance Burden) के प्रीमियम बाजारों तक पहुंच मिलती है, जिससे उनकी आय में वृद्धि होगी।
  • कृषि वानिकी को बढ़ावा: यह पारंपरिक खेती के साथ-साथ पेड़ लगाने की प्रवृत्ति (Sustainable Wood Certification) को प्रोत्साहित कर भारत के राष्ट्रीय स्तर पर निर्धारित योगदान (NDC) के तहत अतिरिक्त कार्बन सिंक (Carbon Sink) बनाने के लक्ष्यों को पूरा करने में सहायता करेगा।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

प्रश्न 1: भारतीय वन एवं लकड़ी प्रमाणन योजना क्या है?

उत्तर: यह भारत सरकार की एक राष्ट्रीय वन प्रमाणन प्रणाली (IFWCS) है, जो टिकाऊ वन प्रबंधन, कृषि वानिकी और लकड़ी आधारित उत्पादों को प्रमाणित करने के लिए एक विश्वसनीय और पारदर्शी ढांचा प्रदान करती है।

प्रश्न 2: पहला PRAMAAN Certificate किसे जारी किया गया?

उत्तर: देश का पहला प्रमाण पत्र संयुक्त रूप से आंध्र प्रदेश वन विकास निगम (APFDC) (33,000 हेक्टेयर बागान के लिए) और ओडिशा के बांस किसान गोविंद महापात्र को दिया गया है।

प्रश्न 3: PRAMAAN Certificate का उद्देश्य क्या है?

उत्तर: इसका मुख्य उद्देश्य घरेलू और अंतरराष्ट्रीय बाजारों में भारतीय वन व कृषि वानिकी उत्पादों (Agroforestry Products) के सामाजिक और पारिस्थितिक मूल्यों को बढ़ाना तथा उनकी वैश्विक बाजार पहुंच सुनिश्चित करना है।

प्रश्न 4: Indian Forest and Wood Certification Scheme क्यों शुरू की गई?

उत्तर: पर्यावरण के अनुकूल टिकाऊ लकड़ी की सोर्सिंग (Sustainable Wood Certification) को बढ़ावा देने तथा अंतरराष्ट्रीय स्तर पर वनों की कटाई से मुक्त उत्पादों की मांग के अनुरूप भारतीय निर्यातकों को बाजार में सक्षम बनाने के लिए इसे शुरू किया गया है।

प्रश्न 5: इस Certification Scheme से Sustainable Forest Management को कैसे बढ़ावा मिलेगा?

उत्तर: यह योजना राष्ट्रीय कार्य योजना संहिता 2023 और स्वतंत्र तृतीय-पक्ष ऑडिट (Third-Party Audits) पर आधारित है, जिससे वनों का दोहन रुकता है और वैज्ञानिक पद्धतियों से वन प्रबंधन सुनिश्चित होता है।

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