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FAO COFO 28 का आयोजन, भारत की भागीदारी और उपलब्धियां

FAO COFO 28 का आयोजन, भारत की भागीदारी और उपलब्धियां

FAO COFO 28

संदर्भ:

28 सितंबर से 2 अक्टूबर 2026 तक इटली के रोम में खाद्य एवं कृषि संगठन (FAO) के मुख्यालय में वानिकी समिति के अट्ठाईसवें सत्र (28th Session of the Committee on Forestry – FAO COFO 28) का आयोजन किया जा रहा है, जिसमें भारत ने अपनी महत्वपूर्ण रणनीतिक भागीदारी और वन बहाली की उपलब्धियों का वैश्विक प्रदर्शन किया।

FAO COFO 28 के मुख्य बिंदु: 

  • भागीदारी: वैश्विक वानिकी सम्मेलन (Global Forestry Conference) के इस 28वें सत्र में दुनिया भर के 128 सदस्य देशों के मंत्रियों, नीति निर्माताओं और विशेषज्ञों ने हिस्सा लिया। 
  • मुख्य फोकस: इस बार बैठक (FAO Forestry Meeting) का मुख्य जोर वन और भूदृश्य बहाली (Forest and Landscape Restoration) पर दिया जा रहा है।
  • सम्मेलन में वनों की कटाई, जलवायु परिवर्तन के प्रभाव, जंगलों की आग (Wildfires) और जैव विविधता के नुकसान जैसी उभरती चुनौतियों पर रणनीतिक चर्चा की गई। 
  • इसी सत्र में एफएओ की फ्लैगशिप रिपोर्ट ‘द स्टेट ऑफ द वर्ल्ड्स फॉरेस्ट्स 2026’ (SOFO 2026) भी जारी की गई। 
  • भारत की भागीदारी:
    • एकीकृत दृष्टिकोण का समर्थन: भारत ने सीओएफओ 28 (FAO COFO 28 India) में आधिकारिक बयान देते हुए स्पष्ट किया कि सतत वन प्रबंधन (Sustainable Forest Management) ही भूदृश्य स्तर पर वन बहाली का एकमात्र एकीकृत और व्यावहारिक ढांचा है। 
    • स्थानीय संप्रभुता का रुख: भारत ने जोर दिया कि वैश्विक नीतियों को तय करते समय विभिन्न देशों की राष्ट्रीय परिस्थितियों (National Circumstances) और वहां के स्थानीय समुदायों (Local Communities) की आवश्यकताओं को प्राथमिकता दी जानी चाहिए।
  • उपलब्धियां: भारत ने वैश्विक पटल पर वानिकी क्षेत्र में अपनी रणनीतियों और परिणामों की जानकारी दी:
  • ‘एक पेड़ माँ के नाम’ अभियान की वैश्विक गूंज: भारत ने सम्मेलन में अपनी संपूर्ण-सरकार और संपूर्ण-समाज (Whole-of-Government and Whole-of-Society) दृष्टिकोण पर आधारित अनूठी पहल ‘एक पेड़ माँ के नाम’ (Plant4Mother) का प्रदर्शन किया।
    • इसके तहत देश में 3.5 अरब से अधिक पौधे रोपे जाने की बड़ी उपलब्धि को रेखांकित किया गया, जिसकी वैश्विक स्तर पर सराहना की गई।
  • वन आवरण में निरंतर वृद्धि: भारत ने रिमोट सेंसिंग डेटा के माध्यम से यह प्रमाणित किया कि वैश्विक चुनौतियों के बावजूद देश के कुल वन और वृक्ष आवरण (Forest and Tree Cover) में लगातार सकारात्मक वृद्धि दर्ज की जा रही है।
  • पारिस्थितिकी तंत्र का पुनरुद्धार: भारत ने बिगड़ते भूदृश्य और मरुस्थलीकरण (Desertification) को रोकने के लिए अपनी राष्ट्रीय पहलों के सफल परिणाम साझा किए।
  • नीतिगत प्रस्ताव: भारत ने विकासशील देशों (Developing Countries) के हितों की वकालत करते हुए एफएओ के सामने निम्नलिखित मांगें और प्रस्ताव रखे:
  • वैश्विक प्रतिबद्धताओं से आगे बढ़ने की मांग: भारत ने रेखांकित किया कि अंतरराष्ट्रीय सहयोग को केवल वैश्विक वादों तक सीमित न रहकर देश-संचालित कार्यान्वयन, क्षमता विकास और प्रौद्योगिकी हस्तांतरण (Technology Transfer) जैसे मापने योग्य परिणामों पर केंद्रित होना चाहिए।
  • टिकाऊ और सुलभ वित्तपोषण: विकासशील देशों के लिए पर्यावरण और जलवायु वित्त (Climate Finance), जैव विविधता वित्त तथा मिश्रित वित्त (Blended Finance) तक पहुंच को आसान बनाने के लिए एफएओ को एक मजबूत तंत्र विकसित करने को कहा गया।
  • दक्षिण-दक्षिण सहयोग (South-South Cooperation): ज्ञान, सर्वोत्तम प्रथाओं और बड़े पैमाने पर लागू होने वाले समाधानों को साझा करने के लिए दक्षिण-दक्षिण और त्रिकोणीय सहयोग को बढ़ावा देने का आह्वान किया गया।
  • UN दशक (2027-2036) का समर्थन: भारत ने सतत वन प्रबंधन के अनुरूप प्रस्तावित ‘वनीकरण और पुनर्वनीकरण के लिए संयुक्त राष्ट्र दशक (2027-2036)’ को आकार देने में एफएओ के साथ मिलकर काम करने की अपनी प्रतिबद्धता दोहराई।

एफएओ वानिकी समिति (COFO) क्या है?

  • वैधानिक निकाय: वानिकी समिति (FAO Committee on Forestry) खाद्य एवं कृषि संगठन (FAO) के अंतर्गत वानिकी क्षेत्र का सर्वोच्च वैश्विक अंतर-सरकारी निकाय (Highest Global Intergovernmental Body) है।
  • स्थापना: इसकी स्थापना वर्ष 1971 में एफएओ के एक तकनीकी विंग के रूप में की गई थी।
  • उद्देश्य: इसका मुख्य उद्देश्य सरकारों को सतत वन प्रबंधन पर तकनीकी सलाह देना, वन नीतियों (Forest Policy FAO) का विकास करना और खाद्य सुरक्षा व जलवायु संरक्षण के लिए वन-आधारित समाधान खोजना है।
  • बैठक की आवृत्ति: इसकी आधिकारिक बैठकें हर दो साल में एक बार (Biennial) एफएओ मुख्यालय, रोम में आयोजित की जाती हैं।
  • संरचना:
    • सदस्यता: यह समिति उन सभी देशों के लिए खुली है जो एफएओ के सदस्य हैं। वर्तमान में इसमें 128 सदस्य देश सक्रिय रूप से शामिल हैं, जिनमें भारत भी एक प्रमुख सदस्य है।
    • क्षेत्रीय आयोग (Regional Commissions): सत्रों के बीच समन्वय बनाए रखने के लिए इसके अंतर्गत छह क्षेत्रीय वानिकी आयोग (जैसे एशिया-प्रशांत वानिकी आयोग) काम करते हैं, जो वैश्विक नीति एजेंडा (Forest Policy) तय करने में मदद करते हैं।
  • रिपोर्टिंग संरचना: एक तकनीकी समिति के रूप में, यह बजटीय मामलों पर एफएओ परिषद (FAO Council) को और व्यापक नीतिगत व नियामक ढाँचों पर एफएओ सम्मेलन (FAO Conference) को अपनी रिपोर्ट सौंपती है। 
  • कार्य और उद्देश्य:
    • रणनीतिक नीति निर्देश: यह समिति वैश्विक वानिकी मुद्दों की समीक्षा करती है और सरकारों तथा एफएओ को सतत वन प्रबंधन (Sustainable Forest Management) से संबंधित नीतिगत मामलों पर तकनीकी मार्गदर्शन प्रदान करती है।
    • वैश्विक लक्ष्यों का समन्वय: यह वैश्विक वन लक्ष्यों (Global Forest Goals), कुनमिंग-मॉन्ट्रियल वैश्विक जैव विविधता ढांचे (KMGBF) और पारिस्थितिकी तंत्र पुनरुद्धार पर संयुक्त राष्ट्र दशक के लक्ष्यों को एक मंच पर लाने का कार्य करती है। 

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

प्रश्न 1: FAO COFO 28 क्या है?

उत्तर: यह खाद्य एवं कृषि संगठन (FAO) की वानिकी समिति का 28वां अंतरराष्ट्रीय सत्र है, जो वैश्विक वन प्रबंधन और नीतिगत समन्वय (Global Forest Management) के लिए सर्वोच्च मंच है। 

प्रश्न 2: FAO COFO 28 का आयोजन कहाँ हुआ?

उत्तर: इस 28वें वैश्विक वानिकी सम्मेलन (FAO Forestry Conference) का आयोजन 28 सितंबर से 2 अक्टूबर 2026 तक रोम, इटली स्थित एफएओ मुख्यालय में किया गया। 

प्रश्न 3: FAO COFO 28 में भारत की भागीदारी कैसी रही?

उत्तर: भारत (India at FAO COFO 28) ने पर्यावरण संरक्षण के लिए ‘राष्ट्रीय परिस्थितियों’ और विकासशील देशों के लिए व्यावहारिक ‘जलवायु वित्त’ (Climate Finance) की आवश्यकता पर बल देते हुए सक्रिय भूमिका निभाई।

प्रश्न 4: भारत ने FAO COFO 28 में कौन-कौन सी उपलब्धियां हासिल कीं?

उत्तर: भारत ने अपने बढ़ते वन आवरण का सफल प्रदर्शन किया और 3.5 अरब से अधिक पौधे लगाने वाले ऐतिहासिक ‘एक पेड़ माँ के नाम’ (Plant4Mother) अभियान की वैश्विक स्तर पर सराहना प्राप्त की।

प्रश्न 5: FAO Committee on Forestry का मुख्य उद्देश्य क्या है?

उत्तर: इसका मुख्य उद्देश्य सरकारों को सतत वन प्रबंधन पर तकनीकी सलाह देना, वन नीतियों (Forest Policy FAO) का विकास करना और खाद्य सुरक्षा व जलवायु संरक्षण के लिए वन-आधारित समाधान खोजना है।

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