Green Energy Corridor Phase III योजना को मिली मंजूरी, 135 गीगावॉट नवीकरणीय ऊर्जा ट्रांसमिशन का है लक्ष्य
संदर्भ:
हाल ही में 30 सितंबर 2026 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने ग्रीन एनर्जी कॉरिडोर फेज-III (Green Energy Corridor Phase III) योजना को आधिकारिक मंजूरी दी।
ग्रीन एनर्जी कॉरिडोर फेज-III योजना के बारे में:
- परिचय: ग्रीन एनर्जी कॉरिडोर योजना (Green Energy Corridor scheme) भारत के विभिन्न राज्यों में उत्पादित सौर और पवन ऊर्जा (solar and wind energy transmission) जैसी नवीकरणीय ऊर्जा को पारंपरिक विद्युत ग्रिड के साथ एकीकृत करने की एक व्यापक राष्ट्रीय अवसंरचना परियोजना है।
- इस महत्वाकांक्षी पहल का मुख्य उद्देश्य राज्यों में नवीकरणीय ऊर्जा ट्रांसमिशन (renewable energy transmission) ग्रिड नेटवर्क को सुदृढ़ करना है।
- इसका तीसरा चरण (GEC Phase III) विशेष रूप से राज्यों के भीतर पारेषण नेटवर्क (Intra-State Transmission System – InSTS) को सुदृढ़ करने के साथ-साथ बड़े पैमाने पर ऊर्जा भंडारण पर केंद्रित है।
- मंत्रालय: यह योजना भारत सरकार के नवीन और नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय (MNRE) तथा विद्युत मंत्रालय (Ministry of Power) के समन्वय से संचालित की जा रही है।
- कार्यान्वयन संस्थाएं: राज्य स्तर पर स्टेट ट्रांसमिशन यूटिलिटीज (STUs) समग्र कार्यान्वयन एजेंसी के रूप में कार्य करेंगी।
- निजी और सार्वजनिक क्षेत्र के ट्रांसमिशन सर्विस प्रोवाइडर (TSPs) टैरिफ-आधारित प्रतिस्पर्धी बोली (TBCB) के तहत बिल्ड-ओन-ऑपरेट-मेनटेन (BOOM) मॉडल पर भाग लेंगे।
- लागत: इस योजना का कुल परिव्यय ₹1,86,405 करोड़ है।
- इंट्रा-स्टेट ट्रांसमिशन सिस्टम (InSTS) के विकास के लिए: ₹1,36,378 करोड़
- बैटरी ऊर्जा भंडारण प्रणालियों (BESS) के लिए: ₹50,000 करोड़
- केंद्रीय वित्तीय सहायता (CFA): केंद्र सरकार द्वारा ₹54,082 करोड़ की वित्तीय सहायता दी जाएगी, जो ट्रांसमिशन शुल्क को कम कर उपभोक्ताओं के लिए बिजली को सस्ती रखेगी।
- समय सीमा: इस परियोजना को पूर्ण करने का लक्ष्य वित्तीय वर्ष 2032-33 निर्धारित किया गया है।
- लक्ष्य एवं घटक:
- 135 GW नवीकरणीय ऊर्जा निकासी: राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में 135 गीगावॉट तक की स्वच्छ ऊर्जा का सुरक्षित ग्रिड एकीकरण करना।
- 50 GWh बैटरी स्टोरेज (BESS): ग्रिड की स्थिरता बनाए रखने और सौर-रहित घंटों (Non-solar hours) में आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए 50 गीगावॉट-घंटे (GWh) क्षमता के बैटरी एनर्जी स्टोरेज सिस्टम स्थापित किए जाएंगे।
- द्वि-आयामी कार्यान्वयन: सभी नई (Greenfield) परियोजनाओं को प्रतिस्पर्धी बोली (TBCB) से तथा मौजूदा (Brownfield) अपग्रेडेशन को कॉस्ट-प्लस बेसिस (CPB) मॉडल पर लागू किया जाएगा।
योजना का महत्व:
- पेरिस समझौते के लक्ष्यों की प्राप्ति: यह योजना भारत के वर्ष 2035 तक 900 गीगावॉट गैर-जीवाश्म ऊर्जा क्षमता (900 GW installed Non-Fossil capacity) हासिल करने के दीर्घकालिक राष्ट्रीय लक्ष्य को गति देगी।
- सप्लाई कटौती (Curtailment) पर रोक: अक्सर ग्रिड अस्थिरता के कारण ऑपरेटरों को नवीकरणीय ऊर्जा उत्पादन को सीमित करना पड़ता है। नया मजबूत नेटवर्क और BESS इस बर्बादी को रोककर उत्पादित बिजली का 100% उपयोग सुनिश्चित करेंगे।
- पीक आवर्स में ग्रिड लचीलापन: सौर ऊर्जा दिन में प्रचुर होती है, लेकिन मांग रात में अधिक होती है। 50 GWh की विशाल बैटरी क्षमता दिन की अतिरिक्त ऊर्जा को संचित कर पीक आवर्स की मांग पूरी करेगी।
- घरेलू विनिर्माण को प्रोत्साहन: बड़े पैमाने पर बैटरी ग्रिड लगाने से देश में एडवांस केमिस्ट्री सेल (ACC) विनिर्माण और मेक इन इंडिया (Make in India) को बढ़ावा मिलेगा।
- आर्थिक एवं रोजगार सृजन: बिजली, निर्माण और विनिर्माण क्षेत्रों में लाखों प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष दीर्घकालिक कुशल रोजगार पैदा होंगे।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)
प्रश्न 1: Green Energy Corridor Phase III क्या है?
उत्तर: यह भारत सरकार की एक व्यापक अवसंरचना योजना (Green Energy Corridor scheme) है, जो राज्यों के भीतर सौर और पवन ऊर्जा के बड़े पैमाने पर संचरण के लिए ग्रिड नेटवर्क और बैटरी स्टोरेज विकसित करती है।
प्रश्न 2: GEC Phase 3 का target कितना है?
उत्तर: इस चरण का मुख्य लक्ष्य वित्त वर्ष 2032-33 तक 135 गीगावॉट नवीकरणीय ऊर्जा की ग्रिड निकासी सुनिश्चित करना और 50 GWh बैटरी भंडारण स्थापित करना है।
प्रश्न 3: 135 GW renewable energy transmission का क्या मतलब है?
उत्तर: इसका अर्थ है कि देश का नया इंट्रा-स्टेट पावर ग्रिड बिना किसी तकनीकी रुकावट या लोड शेडिंग के एक साथ 135 गीगावॉट स्वच्छ बिजली को उत्पादक केंद्रों से उपभोक्ताओं तक ट्रांसफर करने में सक्षम होगा।
प्रश्न 4: Green Energy Corridor scheme क्यों शुरू की गई?
उत्तर: सौर और पवन ऊर्जा स्रोतों से होने वाले उतार-चढ़ाव को संभालने, ग्रिड स्थिरता बनाए रखने और भारत के पर्यावरण-अनुकूल गैर-जीवाश्म ऊर्जा लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए इसे शुरू किया गया।
प्रश्न 5: Renewable energy transmission कैसे काम करता है?
उत्तर: यह उन्नत ग्रिड लाइनों, डिजिटल सब-स्टेशनों और आधुनिक बैटरी स्टोरेज प्रणालियों (BESS) के समन्वय से काम करता है, जो बिजली के उतार-चढ़ाव को नियंत्रित कर ग्रिड को संतुलित रखते हैं।
