गुजरात में मिला विशाल साँप का जीवाश्म, Vasuki Indicus रखा गया है नाम
संदर्भ:
हाल ही में भारतीय जीवाश्म विज्ञानियों ने गुजरात में एक प्रागैतिहासिक विशाल साँप का जीवाश्म खोजा है, जिसका नाम वासुकी इंडिकस (Vasuki Indicus) रखा गया है।
वासुकी इंडिकस जीवाश्म खोज:
- खोज स्थल: Vasuki Indicus का जीवाश्म गुजरात के कच्छ जिले में स्थित पानंध्रो लिग्नाइट खदान (Panandhro Lignite Mine) से प्राप्त हुआ।
- शोधकर्ता: इस प्राचीन साँप के जीवाश्म (Ancient Snake Fossil) की पहचान और वैज्ञानिक अध्ययन आईआईटी रुड़की (IIT Roorkee) के दो प्रख्यात शोधकर्ताओं, प्रो. सुनील वाजपेयी और देबाजीत दत्ता द्वारा किया गया है।
- इसके निष्कर्ष प्रतिष्ठित शोध पत्रिका साइंटिफिक रिपोर्ट्स (Scientific Reports) में प्रकाशित किए गए हैं।
- नामकरण: इसका जेनेरिक नाम हिंदू पौराणिक कथाओं में भगवान शिव के गले में लिपटने वाले सर्पों के राजा ‘वासुकी’ के नाम पर और ‘इंडिकस’ भारत (India) के संदर्भ में रखा गया है।
- भूवैज्ञानिक कालखंड और जलवायु:
- मध्य इओसीन युग (Middle Eocene Period): यह विशालकाय साँप आज से लगभग 47.8 से 38 मिलियन वर्ष पूर्व (लगभग 4.7 करोड़ वर्ष पहले) पृथ्वी पर निवास करता था.
- जलवायु दशाएं: इओसीन काल के दौरान पृथ्वी का तापमान आज की तुलना में काफी अधिक (औसत तापमान ~28 डिग्री सेल्सियस) था. इस गर्म उष्णकटिबंधीय वातावरण ने इतने बड़े ठंडे खून वाले सरीसृपों (Cold-blooded Reptiles) के क्रमिक विकास (Evolution) को सुलभ बनाया।
- अनुमानित लंबाई: वैज्ञानिकों के अनुसार वासुकी इंडिकस की लंबाई 10.9 मीटर से 15.2 मीटर (लगभग 36 से 50 फीट) के बीच थी। यह आकार आधुनिक स्कूल बस के बराबर है।
- वजन: इसका कुल वजन लगभग 1 टन (1000 किलोग्राम) होने का अनुमान लगाया गया है।
- तुलना: अपने इस भीमकाय आकार के कारण यह पृथ्वी पर अब तक के सबसे बड़े रिकॉर्डेड साँप ‘टिटानोबुआ’ (Titanoboa) को टक्कर देता है, जो लगभग 6 करोड़ वर्ष पहले कोलंबिया में पाया जाता था।
- जीवाश्म साक्ष्य: खदान से इस रीढ़ की हड्डी के 27 अच्छी तरह से संरक्षित कशेरुक (Vertebrae) के टुकड़े मिले हैं। व्यक्तिगत कशेरुकों की चौड़ाई 62.4 से 111.4 मिलीमीटर तक है, जो इसके अविश्वसनीय रूप से चौड़े और बेलनाकार (Cylindrical) शक्तिशाली शरीर की पुष्टि करती है।
- वर्गीकरण:
- मडसोइडी परिवार (Madtsoiidae Family): यह साँप अब पूर्णतः विलुप्त हो चुके ‘मडसोइडी’ परिवार से संबंधित था, जो अजगरों की तरह विषहीन होते थे।
- घात लगाकर शिकार करना (Ambush Predator): अपनी भारी-भरकम शारीरिक संरचना के कारण यह बहुत तेज गति से नहीं भाग सकता था। आधुनिक एनाकोंडा और अजगर की तरह, यह दलदली और नदी तटीय क्षेत्रों में छिपकर रहता था और अपने शिकार को अचानक जकड़कर (Constriction) मार डालता था।
- महत्व: यह खोज इस वैज्ञानिक सिद्धांत को बल देती है कि मडसोइडी परिवार का उद्गम भारतीय उपमहाद्वीप में हुआ था और बाद में टेथिस महासागर के बंद होने और यूरेशियाई प्लेट के आपस में टकराने के बाद यह प्रजाति भारत से अफ्रीका और यूरोप की ओर फैली।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)
प्रश्न 1: वासुकी इंडिकस क्या है?
उत्तर: वासुकी इंडिकस (Vasuki Indicus) भारत में पाया गया एक प्रागैतिहासिक, विलुप्त और विशालकाय अजगर जैसा विषहीन साँप है।
प्रश्न 2: गुजरात में वासुकी इंडिकस का जीवाश्म कहां मिला था?
उत्तर: इस साँप का जीवाश्म गुजरात के कच्छ जिले (Kutch District) की पानंध्रो लिग्नाइट खदान (Panandhro Lignite Mine) की तलछटी परतों से प्राप्त हुआ है।
प्रश्न 3: वासुकी इंडिकस का नाम किसके नाम पर रखा गया?
उत्तर: इसका जेनेरिक नाम हिंदू पौराणिक कथाओं में भगवान शिव के गले में लिपटने वाले सर्पों के राजा ‘वासुकी’ के नाम पर और ‘इंडिकस’ भारत (India) के संदर्भ में रखा गया है।
प्रश्न 4: वासुकी इंडिकस सांप कितना बड़ा था?
उत्तर: वैज्ञानिकों के अनुसार इसकी अनुमानित लंबाई 11 से 15 मीटर (लगभग 50 फीट) और वजन लगभग 1 टन था, जो इसे दुनिया के सबसे बड़े साँपों में से एक बनाता है।
प्रश्न 5: वासुकी इंडिकस किस भूवैज्ञानिक काल में रहता था?
उत्तर: यह प्रागैतिहासिक जीव मध्य इओसीन युग (Middle Eocene Period) में लगभग 4.7 करोड़ वर्ष पहले पृथ्वी पर सक्रिय था।
प्रश्न 6: वैज्ञानिकों ने वासुकी इंडिकस के आकार का अनुमान कैसे लगाया?
उत्तर: आईआईटी रुड़की के वैज्ञानिकों ने खदान से प्राप्त इसकी रीढ़ की हड्डी के 27 कशेरुकों (Vertebrae) की चौड़ाई और संरचना का गणितीय मॉडलिंग (MTV) विश्लेषण करके इसके आकार की गणना की।
