Amur Falcons “Apapang” और “Alang”: 23 देशों की सफल यात्रा पूरी कर मणिपुर लौटे
संदर्भ:
हाल ही में 22 अक्टूबर 2026 को दो उपग्रह-टैग लगे हुए अमूर बाज़ (Amur Falcons), जिनका नाम “अपापांग” (Apapang) और “अलांग” (Alang) है, एशिया और अफ्रीका के 23 देशों की सफल यात्रा पूरी कर मणिपुर के तामेंगलोंग जिले में सुरक्षित लौट आए।
अमूर बाज़ (Amur Falcon) के बारे में:
- वैज्ञानिक नाम (Amur Falcon Scientific Name): फाल्को अमुरेंसिस (Falco amurensis).
- प्रजाति: यह फाल्कन (बाज़) परिवार से संबंधित एक छोटा शिकारी पक्षी (Raptor) है।
- शारीरिक विशेषता: इसका औसत वजन मात्र 150 से 170 ग्राम होता है। इसके बावजूद, यह आकार के अनुपात में दुनिया के सबसे लंबे समय तक उड़ान भरने वाले प्रवासी पक्षियों (World’s Longest-Traveling Migratory Birds) में गिना जाता है.
- आहार: यह मुख्य रूप से कीटभक्षी (Insectivorous) पक्षी है।
- यह दीमक (Termites), चींटियों, टिड्डियों दीमकों और भृंगों (Beetles) का शिकार करता है।
- मणिपुर में अपने प्रवास के दौरान, यह भारी मात्रा में निकलने वाले दीमकों को खाकर अगले कठिन प्रवास के लिए अपने शरीर में आवश्यक वसा संचय (Fat Reserves) करता है।
अपापांग और अलांग की प्रवासन यात्रा एवं ट्रैकिंग:
- उपग्रह ट्रैकिंग तकनीक (Amur Falcon Satellite Tracking):: इन दोनों पक्षियों को भारतीय वन्यजीव संस्थान (Wildlife Institute of India – WII), देहरादून के वैज्ञानिकों द्वारा नवंबर 2025 में मणिपुर के तामेंगलोंग जिले के चियुलुआन (Chiuluan) रूस्टिंग साइट पर सैटेलाइट ट्रांसमीटर (Geo-tagged) से लैस किया गया था।
- नर बाज़ “अपापांग” और मादा बाज़ “अलांग” (Apapang and Alang) की लगभग एक साल की लाइव ट्रैकिंग ने वैज्ञानिकों को उनके प्रवासन पथ (Migration Route) और धीरज (Endurance) के बारे में अभूतपूर्व डेटा प्रदान किया।
- संपूर्ण वार्षिक प्रवासन चक्र (Amur Falcon Migration Route): यह जीव प्रतिवर्ष लगभग 20,000 किलोमीटर का एक पूर्ण प्रवासन चक्र (Round-Trip Migration Cycle) दो बार पूरा करता है:
- प्रजनन क्षेत्र (Breeding Grounds): यह पक्षी उत्तर-पूर्वी चीन (मंचूरियन स्टेपी), पूर्वी मंगोलिया और सुदूर पूर्वी रूस में प्रजनन करता है।
- अपापांग और अलांग चीन से उड़ान भरकर मात्र 11 दिनों में भारत पहुँचे हैं.
- भारतीय स्टॉपओवर (Manipur Migratory Birds): भारत का पूर्वोत्तर क्षेत्र, विशेष रूप से नागालैंड (डोयांग जलाशय) और मणिपुर (Tamenglong District Manipur), अक्टूबर-नवंबर में इनके लिए सबसे महत्वपूर्ण विश्राम स्थल (Stopover Site) बनता है।
- अफ्रीकी शीतकालीन क्षेत्र (Amur Falcon Africa Migration): भारत में ठहरने के बाद, यह जीव अरब सागर को पार करके सोमालिया, केन्या और दक्षिण अफ्रीका की ओर बढ़ता है, जहाँ यह नवंबर से अप्रैल तक सर्दियाँ बिताता है.
- अरब सागर की कठिन गैर-स्टॉप उड़ान: मणिपुर से निकलने के बाद यह पक्षी सोमालिया तक लगभग 6,000 किलोमीटर की निरंतर (Non-stop) उड़ान भरता है।
- इस यात्रा में 3,000 किलोमीटर का हिस्सा खुले अरब सागर (Arabian Sea Crossing) के ऊपर होता है। चूंकि बाज़ पानी पर लैंड नहीं कर सकते, इसलिए वे भारत में संचित की गई वसा ऊर्जा के भरोसे लगातार 5 से 6 दिनों तक उड़ते रहते हैं.
अमूर बाज़ का संरक्षण दर्जा और सामुदायिक प्रयास:
| संरक्षण ढांचा | दर्जा / प्रतिबद्धता |
| IUCN रेड लिस्ट | संकटमुक्त (Least Concern) |
| भारतीय वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972 | अनुसूची-I (उच्चतम विधिक सुरक्षा प्राप्त) |
| अंतरराष्ट्रीय समझौता | भारत प्रवासी प्रजातियों के संरक्षण पर अभिसमय (CMS) का हस्ताक्षरकर्ता है। इसके तहत इन पक्षियों को सुरक्षित मार्ग (Safe Passage) प्रदान करना भारत की विधिक बाध्यता है। |
- सामुदायिक भागीदारी: अतीत में इन पक्षियों को पूर्वोत्तर भारत में शिकार (Hunting) के खतरों का सामना करना पड़ता था। हालांकि, वन विभाग, डब्ल्यूआईआई (WII) और स्थानीय स्वयंसेवी संगठनों (जैसे रेनफॉरेस्ट क्लब तामेंगलोंग) के निरंतर प्रयासों से अब व्यापक जन-जागरूकता फैली है।
- स्थानीय जनजातियाँ अब इस बाज़ को सुरक्षा प्रदान करती हैं और प्रतिवर्ष इनके आगमन का स्वागत उत्सव के रूप में करती हैं।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)
प्रश्न 1: अमूर फाल्कन अपापांग और अलांग कौन हैं?
उत्तर: अपापांग (नर) और अलांग (मादा) दो अमूर बाज़ हैं, जिन्हें नवंबर 2025 में मणिपुर में भारतीय वन्यजीव संस्थान (WII) द्वारा उपग्रह ट्रांसमीटर से टैग किया गया था।
प्रश्न 2: अपापांग और अलांग ने अपनी प्रवासी यात्रा के दौरान कितने देशों का सफर तय किया?
उत्तर: इन दोनों साहसी पक्षियों ने अपने एक वर्ष के संपूर्ण प्रवासन चक्र के दौरान एशिया और अफ्रीका महाद्वीप के 23 देशों की सीमाओं को पार किया है.
प्रश्न 3: अमूर फाल्कन अपनी लंबी प्रवासी यात्रा के बाद मणिपुर क्यों लौटते हैं?
उत्तर: मणिपुर (तामेंगलोंग) इनका मुख्य स्टॉपओवर स्थल है। यहाँ वे स्थानीय दीमकों को खाकर अरब सागर पार करने के लिए अपने शरीर में वसा (Fat) और ऊर्जा संचित करते हैं।
प्रश्न 4: अमूर फाल्कन की गतिविधियों को ट्रैक करने के लिए किस तकनीक का इस्तेमाल किया गया?
उत्तर: उनकी सटीक स्थिति और मार्ग का अध्ययन करने के लिए हल्के सैटेलाइट टेलीमेट्री ट्रांसमीटर (Satellite Transmitters) तकनीक का उपयोग किया गया है।
प्रश्न 5: अमूर फाल्कन के संरक्षण में मणिपुर और स्थानीय समुदायों की क्या भूमिका है?
उत्तर: स्थानीय लोग और वन विभाग शिकार पर पूर्ण प्रतिबंध लगाकर संरक्षण कार्यक्रम चलाते हैं, जिससे यह क्षेत्र इन विदेशी प्रवासियों के लिए दुनिया का सबसे सुरक्षित शरणस्थल बन गया है।
