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UNEP Emissions Gap Report 2026 जारी, 2025 में GHG उत्सर्जन 58.4 GtCO₂e पहुँचा

UNEP Emissions Gap Report 2026 जारी, 2025 में GHG उत्सर्जन 58.4 GtCO₂e पहुँचा

UNEP Emissions Gap Report 2026

संदर्भ:

हाल ही में संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम (United Nations Environment Programme – UNEP) ने अपनी 17वीं वार्षिक UNEP उत्सर्जन अंतराल रिपोर्ट 2026 (UNEP Emissions Gap Report 2026) जारी की। जिसका शीर्षक “द पॉइंट ऑफ रिटर्न” (The Point of Return) रखा गया है। 

यूएनईपी उत्सर्जन अंतराल रिपोर्ट 2026 के प्रमुख निष्कर्ष:

  • वैश्विक ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन स्थिति (Global GHG Emissions Status):
    • कुल उत्सर्जन मात्रा: वर्ष 2025 में वैश्विक ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन (Greenhouse Gas Emissions 2025) लगभग 58.4 बिलियन टन कार्बन डाइऑक्साइड समकक्ष (58.4 GtCO₂e) दर्ज किया गया। यह वर्ष 2024 की तुलना में केवल 0.1 GtCO₂e की मामूली गिरावट को दर्शाता है।
    • जीवाश्म ईंधन का प्रभाव: कुल ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन (GHG) में इस मामूली ठहराव के बावजूद, कोयला, तेल और गैस जैसे जीवाश्म ईंधनों से होने वाले कार्बन उत्सर्जन (Fossil Fuel Emissions) में निरंतर वृद्धि जारी रही।
    • संतुलन कारक: कुल वैश्विक उत्सर्जन में इस स्थिरता का मुख्य कारण भूमि उपयोग, भूमि उपयोग परिवर्तन और वानिकी (LULUCF) क्षेत्र तथा वैश्विक जंगल की आग (Wildfire) से होने वाले उत्सर्जन में आई कमी रही, जिसने जीवाश्म ईंधन की वृद्धि की भरपाई कर दी। 
  • 1.5°C तापमान सीमा का उल्लंघन (Breaching the 1.5°C Threshold):
  • अपरिहार्य ओवरशूट: वैश्विक जलवायु परिवर्तन रिपोर्ट (Climate Change Report) में स्पष्ट चेतावनी दी गई है कि दशकों की अपर्याप्त कार्रवाई के कारण अब बिना किसी ‘ओवरशूट’ (क्षणिक रूप से सीमा पार करना) के वैश्विक तापमान वृद्धि को 1.5°C तक सीमित रखने का अवसर पूरी तरह समाप्त हो गया है। 
  • तापमान प्रक्षेपण: यदि वर्तमान वैश्विक नीतियां इसी प्रकार जारी रहती हैं, तो इस सदी के अंत (2100) तक वैश्विक तापमान वृद्धि 2.8°C तक पहुँच सकती है। 
  • प्रमुख उत्सर्जनकर्ता देश (Major Contributors): अफ्रीकी संघ को छोड़कर, जी20 (G20) के सदस्य देश वैश्विक उत्सर्जन के 76% हिस्से के लिए जिम्मेदार हैं।
  • वैश्विक उत्सर्जन में आवश्यक कटौती के लक्ष्य (Global Emissions Reduction Targets): वैश्विक तापमान वृद्धि (Global Temperature Rise) को नियंत्रित करने तथा 2100 तक इसे वापस 1.5°C के सुरक्षित स्तर पर लाने के लिए रिपोर्ट में “न्यूनतम संभव ओवरशूट परिदृश्य” (Lowest Possible Overshoot Scenario) प्रस्तावित किया गया है, जिसके तहत वर्ष 2025 के स्तर के मुकाबले निम्नलिखित कटौती अनिवार्य है: 
समयसीमाआवश्यक वैश्विक कटौती लक्ष्य (Required Reduction Relative to 2025)
वर्ष 2030 तक18% की कटौती
वर्ष 2035 तक45% की कटौती
वर्ष 2040 तक69% की कटौती
  • कार्बन डाइऑक्साइड निष्कासन (Carbon Dioxide Removal – CDR): इस वापसी पथ (Return Path) को प्राप्त करने के लिए देशों को इस सदी में वायुमंडल से लगभग 320 GtCO₂ को तकनीकी व प्राकृतिक रूप से हटाना होगा।
  • वैश्विक जलवायु नीति: यूएनईपी जलवायु कार्रवाई रिपोर्ट (UNEP Climate Action Report) के अनुसार, वर्तमान में देशों द्वारा सौंपे गए राष्ट्रीय स्तर पर निर्धारित योगदान (Nationally Determined Contributions – NDCs) पेरिस समझौते के लक्ष्यों को पूरा करने में अपर्याप्त हैं।
    • वर्तमान एनडीसी प्रतिबद्धताएं 2035 तक केवल 11-15% की ही कटौती सुनिश्चित कर पा रही हैं, जिससे 16 GtCO₂e का बड़ा कार्बन उत्सर्जन अंतराल (Carbon Emissions Gap) पैदा हो रहा है।
  • भारत:
  • सकारात्मक प्रगति: रिपोर्ट के अनुसार, भारत अपनी मौजूदा घरेलू नीतियों के बल पर अतिरिक्त कड़े उपायों के बिना ही अपने 2030 और 2035 के एनडीसी (NDC) लक्ष्यों को प्राप्त कर लेगा।
  • कम प्रति व्यक्ति उत्सर्जन: भारत का अनुमानित 2035 प्रति व्यक्ति उत्सर्जन मात्र 3.6 tCO₂e है, जो चीन (9.3) और अमेरिका जैसे विकसित देशों की तुलना में काफी कम है।
  • आवश्यकता: भारत को अपनी विकास प्राथमिकताओं को संतुलित करते हुए नवीकरणीय ऊर्जा (Renewable Energy) का तेजी से विस्तार करना होगा और विकसित देशों से ‘समान और साझा जिम्मेदारी’ (CBDR-RC) के तहत उचित जलवायु वित्त (Climate Finance) की मांग जारी रखनी होगी। 

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

प्रश्न 1: UNEP उत्सर्जन अंतराल रिपोर्ट 2026 क्या है और इसे किस संस्था ने जारी किया है?

उत्तर: यह देशों के वर्तमान जलवायु वादों और ग्लोबल वार्मिंग को 1.5°C पर रोकने के लिए आवश्यक उत्सर्जन स्तरों के बीच के अंतर (Discrepancy) को मापने वाली वार्षिक वैज्ञानिक रिपोर्ट है, जिसे संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम (UNEP) द्वारा जारी किया गया है। 

प्रश्न 2: वर्ष 2025 में वैश्विक ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन कितना दर्ज किया गया?

उत्तर: वर्ष 2025 में कुल वैश्विक ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन 58.4 बिलियन टन कार्बन डाइऑक्साइड समकक्ष (58.4 GtCO₂e) के रिकॉर्ड स्तर पर पहुँचा है, जो पिछले वर्ष की तुलना में लगभग स्थिर रहा।

प्रश्न 3: उत्सर्जन अंतराल रिपोर्ट 2026 के प्रमुख निष्कर्ष क्या हैं?

उत्तर: मुख्य निष्कर्ष यह है कि बिना ओवरशूट के तापमान वृद्धि को 1.5°C तक सीमित रखने का मार्ग बंद हो चुका है, जीवाश्म ईंधन से उत्सर्जन बढ़ रहा है और वर्तमान नीतियों से सदी के अंत तक 2.8°C वार्मिंग की आशंका है। 

प्रश्न 4: वैश्विक तापमान वृद्धि को 1.5°C तक सीमित रखने के लिए उत्सर्जन में कितनी कटौती आवश्यक है?

उत्तर: न्यूनतम ओवरशूट के साथ तापमान को नियंत्रित करने के लिए वैश्विक उत्सर्जन में वर्ष 2025 के स्तर के सापेक्ष 2030 तक 18%, 2035 तक 45% और 2040 तक 69% की तत्काल कटौती आवश्यक है। 

प्रश्न 5: UNEP की यह रिपोर्ट पेरिस समझौते और वैश्विक जलवायु लक्ष्यों के लिए क्यों महत्वपूर्ण है?

उत्तर: यह रिपोर्ट आगाह करती है कि पेरिस समझौते के लक्ष्य (Paris Agreement Climate Targets) खतरे में हैं। यह आगामी जलवायु वार्ताओं (COP) के लिए सरकारों को अपने नेट जीरो उत्सर्जन लक्ष्यों (Net Zero Emissions Targets) और आगामी 2035 के वादों को और अधिक कड़ा करने का ठोस वैज्ञानिक आधार प्रदान करती है।

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