फंगस की नई प्रजाति की हुई खोज, Mollisia Sokpayensia रखा गया नाम
संदर्भ:
हाल ही में भारतीय सूक्ष्म जीव विज्ञानियों ने पूर्वी हिमालय क्षेत्र में पर्यावरण जैव विविधता (Environmental Biodiversity) के अध्ययन के दौरान सिक्किम हिमालय में फंगस की एक दुर्लभ प्रजाति की खोज की, जिसका नाम मोलिसिया सोकपायेंसिया (Mollisia Sokpayensia) रखा गया।

Image Credit: The Sentinel
मोलिसिया सोकपायेंसिया के बारे में:
- अंतःजीवी फंगस (Fungal Endophytes): मोलिसिया सोकपायेंसिया (Mollisia Sokpayensia) एक अंतःजीवी कवक (Fungal Endophyte) है। ये ऐसे सूक्ष्मजीव होते हैं जो बिना किसी रोग के लक्षण उत्पन्न किए स्वस्थ पौधों के आंतरिक ऊतकों के भीतर निवास करते हैं। यह सतही कवक (Epiphytic Fungi) से पूरी तरह भिन्न होते हैं।
- विधिक वर्गीकरण (Fungal Taxonomy): यह नई प्रजाति ‘एस्कोमाइकोटा’ (Ascomycota / थैली कवक) संघ, ‘हेलोटियल्स’ (Helotiales) गण और ‘मोलिसिएसी’ (Mollisiaceae) कुल के अंतर्गत मोलिसिया (Mollisia) वंश से संबंधित है।
- अनुसंधानकर्ता संस्थाएं एवं वैज्ञानिक टीम (Research Agencies and Scientific Team):
- अग्रणी वैज्ञानिक: इस दुर्लभ फंगस प्रजाति की खोज (Rare Fungus Species Discovery) मणिपुर के प्रसिद्ध सूक्ष्म जीव विज्ञानी डॉ. लैशराम शांतिकumar सिंह (Dr. Laishram Shantikumar Singh) के नेतृत्व वाली टीम द्वारा की गई है।
- सहयोगी शोधकर्ता: इस शोध दल में सुबेचा राय, गजानन वी. माने, डॉ. रोहित शर्मा और डॉ. थौनाओजम साल्विया शामिल थे।
- वित्त पोषण और समर्थन: यह महत्वपूर्ण खोज भारत सरकार के बायोटेक्नोलॉजी विभाग (Department of Biotechnology – DBT) द्वारा वित्त पोषित एक बाहरी जैव विविधता अनुसंधान (Biodiversity Research) परियोजना के अंतर्गत की गई।
- प्रकाशन: इस नई फंगस प्रजाति को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त जर्नल ‘फंगल डायवर्सिटी’ (Fungal Diversity – वॉल्यूम 136) में “फंगल डायवर्सिटी नोट्स” के रूप में औपचारिक रूप से प्रलेखित किया गया है।
- खोज का स्थान: इस फंगस के नमूने पश्चिम सिक्किम के उत्तरे (Uttarey) में स्थित ‘जोरबोटे’ (Jorbotay) नामक स्थान से एकत्र किए गए थे।
- ऊँचाई सीमा: यह क्षेत्र समुद्र तल से लगभग 1,800 से 2,300 मीटर की ऊँचाई पर स्थित है, जो पूर्वी हिमालय के घने और ठंडे वनों का हिस्सा है।
- प्रयोगशाला व्यवहार और तकनीकी विशेषताएं (Laboratory Behavior & Technical Features):
- संवर्धन माध्यम (Cultivation Medium): प्रयोगशाला में कवक अनुसंधान (Mycology Research) के दौरान इस प्रजाति को पोटैटो डेक्सट्रोज एगर (Potato Dextrose Agar – PDA) माध्यम का उपयोग करके अलग (Isolate) और विकसित किया गया।
- धीमी विकास दर (Slow Growth Rate): यह फंगस प्रयोगशाला में बेहद धीमी गति से बढ़ता है。 28°C तापमान पर इसकी कॉलोनियां शुरुआती 6 दिनों में केवल 2-3 सेंटीमीटर व्यास तक पहुँचती हैं।
- रूपांतरण और रंग: 14 दिनों के बाद यह कॉलोनी लगभग 8 सेमी व्यास की हो जाती है, जिसका रंग प्रारंभ में कपास जैसा भूरा (Cottony Brown) होता है और बाद में बदलकर गहरा काला-भूरा (Blackish-brown) हो जाता है।
भारत के लिए इस खोज का महत्व:
- फार्मास्यूटिकल और औषधि अनुसंधान (Drug Discovery): अंतःजीवी कवक विभिन्न प्रकार के द्वितीयक मेटाबोलाइट्स (Secondary Metabolites) और बायोएक्टिव यौगिकों का उत्पादन करते हैं। मोलिसिया सोकपायेंसिया का जैव-प्रौद्योगिकी (Biotechnology) और भविष्य की जीवन रक्षक दवाओं के निर्माण में बड़ा योगदान हो सकता है।
- दुर्लभ वनस्पतियों का संरक्षण (Conservation of Threatened Flora): पारंपरिक चिकित्सा में पैनाक्स प्रकंदों (Ginseng Rhizomes) की भारी मांग के कारण जंगलों से इनका अंधाधुंध दोहन होता है। यदि इस कवक को प्रयोगशाला में संवर्धित करके औषधीय तत्व प्राप्त कर लिए जाएं, तो दुर्लभ पौधों को उखाड़ने की आवश्यकता कम हो जाएगी।
- हिमालयी सूक्ष्मजीव प्रलेखन (Himalayan Microbial Documentation): चीनी क्षेत्र की तुलना में भारतीय हिमालयी सूक्ष्मजीव संसाधनों (Microbial Resources) का प्रलेखन बहुत कम हुआ है। यह खोज भारत के वैज्ञानिक ज्ञान भंडार को बढ़ाती है और जैविक विविधता अभिसमय (CBD) के प्रति भारत की प्रतिबद्धताओं को सुदृढ़ करती है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)
प्रश्न 1: मोलिसिया सोकपायेंसिया क्या है?
उत्तर: मोलिसिया सोकपायेंसिया (Mollisia Sokpayensia) वर्ष 2026 में खोजी गई एक नई अंतःजीवी फंगस प्रजाति (New Endophytic Fungus Species) है, जो स्वस्थ पौधों के आंतरिक ऊतकों में रहती है।
प्रश्न 2: फंगस की नई प्रजाति मोलिसिया सोकपायेंसिया की खोज कहां हुई?
उत्तर: इसकी खोज भारत के पूर्वी हिमालय वैश्विक जैव विविधता हॉटस्पॉट के अंतर्गत पश्चिम सिक्किम के उत्तरे (जोरबोटे) क्षेत्र में 1,800-2,300 मीटर की ऊँचाई पर हुई है।
प्रश्न 3: इस नई फंगस प्रजाति का नाम मोलिसिया सोकपायेंसिया क्यों रखा गया?
उत्तर: इस फंगस को सिक्किम हिमालय के दुर्लभ औषधीय पौधे (Sikkim Ginseng) ‘पैनाक्स सोकपायेंसिस’ (Panax sokpayensis) के राइजोम से अलग किया गया था, इसलिए इसके पोषक पौधे के नाम पर इसका नामकरण हुआ।
प्रश्न 4: फंगस की नई प्रजातियों की खोज वैज्ञानिकों के लिए क्यों महत्वपूर्ण है?
उत्तर: यह खोज (Latest Science Research News) नए बायोएक्टिव यौगिकों की पहचान करने, चिकित्सा व कृषि जैव-प्रौद्योगिकी में नए रास्ते खोलने और दुर्लभ औषधीय पौधों के संरक्षण में मदद करती है।