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वीरांगना दुर्गावती टाइगर रिजर्व के भीतर सिंचाई परियोजना के लिए वन भूमि के डायवर्जन को मंजूरी (Approval for diversion of forest land for irrigation project within Veerangana Durgavati Tiger Reserve) | UPSC

Approval for diversion of forest land for irrigation project within Veerangana Durgavati Tiger Reserve

Approval for diversion of forest land for irrigation project within Veerangana Durgavati Tiger Reserve

संदर्भ:

हाल ही में राष्ट्रीय वन्यजीव बोर्ड (National Board for Wildlife – NBWL) की स्थायी समिति ने मध्य प्रदेश के वीरांगना दुर्गावती टाइगर रिजर्व (VDTR) के भीतर कोपरा मध्यम सिंचाई परियोजना के लिए 272 हेक्टेयर वन भूमि के डायवर्जन (Diversion) को मंजूरी दी है। 

कोपरा मध्यम सिंचाई परियोजना:

  • अवस्थिति: यह परियोजना मध्य प्रदेश के सागर जिले में स्थित है।
  • उद्देश्य: इस परियोजना का मुख्य लक्ष्य सागर जिले में लगभग 9,900 हेक्टेयर रबी फसलों की सिंचाई करना और घरेलू उपयोग के लिए पानी उपलब्ध कराना है।
  • प्रभावित क्षेत्र: परियोजना के कारण कुल 1,044.52 हेक्टेयर भूमि जलमग्न होगी, जिसमें:
    • 272 हेक्टेयर: वन भूमि (टाइगर रिजर्व का कोर क्षेत्र)।
    • 716.62 हेक्टेयर: निजी भूमि।
    • 59.90 हेक्टेयर: सरकारी भूमि।
  • प्रमुख नदियाँ: जलाशय का निर्माण टाइगर रिजर्व के भीतर व्यारमा (Byarma) और कोपरा (Kopra) नदियों पर किया जाएगा।
  • क्षतिपूर्ति: वन भूमि के नुकसान की भरपाई के लिए टाइगर रिजर्व के भीतर ही 310 हेक्टेयर राजस्व भूमि को वनीकरण के लिए आरक्षित किया जाएगा। 

विशेष: NBWL (राष्ट्रीय वन्यजीव बोर्ड): यह वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972 के तहत गठित एक वैधानिक निकाय है, जिसकी अध्यक्षता प्रधानमंत्री करते हैं।

वीरांगना दुर्गावती टाइगर रिजर्व:

  • स्थापना: इसे 2023 में मध्य प्रदेश के 7वें और भारत के 54वें टाइगर रिजर्व के रूप में अधिसूचित किया गया था।
  • विस्तार: यह लगभग 2,339 वर्ग किमी में फैला है, जिसमें नौरादेही वन्यजीव अभयारण्य और रानी दुर्गावती वन्यजीव अभयारण्य के क्षेत्र शामिल हैं।
  • स्थान: यह मध्य प्रदेश के सागर, दमोह और नरसिंहपुर जिलों में विस्तृत है।
  • नदियाँ और बेसिन: यह नर्मदा और यमुना नदी बेसिन के बीच स्थित है। कोपरा नदी सोनार नदी की सहायक नदी है, जो यहाँ के आर्द्रभूमि पारिस्थितिकी तंत्र का हिस्सा है।
  • वनस्पति और जीव: यहाँ मुख्य रूप से उष्णकटिबंधीय शुष्क पर्णपाती वन (Dry Deciduous Forests) पाए जाते हैं। यह बाघों के अलावा तेंदुओं, जंगली कुत्तों, भेड़ियों और गंभीर रूप से लुप्तप्राय सफेद पीठ वाले गिद्धों का निवास स्थान है।
  • महत्व: इस रिजर्व के भीतर ऐतिहासिक सिंगौरगढ़ किला स्थित है। इसका गठन मुख्य रूप से केन-बेतवा लिंक परियोजना (KBLP) के कारण पन्ना टाइगर रिजर्व (PTR) में होने वाले नुकसान की भरपाई (Offset) के लिए किया गया था।

सिंचाई परियोजना से संबंधित पारिस्थितिक चिंताएं: 

  • पारिस्थितिक विखंडन: 272 हेक्टेयर कोर वन क्षेत्र का डायवर्जन बाघों के आवास को खंडित कर सकता है। परियोजना के कारण 13 गांव जलमग्न हो जाएंगे।
  • रिपेरियन इकोसिस्टम: कोपरा नदी सोनार नदी की सहायक नदी है। बांध निर्माण से इस क्षेत्र की आर्द्रभूमि और नदी तटीय पारिस्थितिकी तंत्र प्रभावित हो सकता है।
  • NTCA की चिंता: नेशनल टाइगर कंजर्वेशन अथॉरिटी (NTCA) ने चिंता जताई है कि यह विकास कार्य बाघों की आवाजाही (Corridor) को प्रभावित कर सकता है।
  • पर्यावरणविदों का तर्क: पर्यावरणविदों का मानना है कि जिस रिजर्व को पर्यावरण क्षति की भरपाई के लिए बनाया गया था, उसी के भीतर बड़े पैमाने पर भूमि परिवर्तन करना पारिस्थितिकी के लिए विरोधाभासी है।

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