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Article 371K Ladakh- लद्दाख को मिल सकता है विशेष दर्जा, जानिए क्या हैं प्रस्तावित अनुच्छेद 371(k)?

Article 371K Ladakh- लद्दाख को मिल सकता है विशेष दर्जा, जानिए क्या हैं प्रस्तावित अनुच्छेद 371(k)?

Article 371K Ladakh

संदर्भ:

हाल ही में केंद्रीय गृह मंत्रालय (Ministry of Home Affairs – MHA) ने केंद्र शासित प्रदेश लद्दाख को विशेष संवैधानिक सुरक्षा उपाय (Constitutional Safeguards) प्रदान करने के लिए संविधान के भाग XXI के तहत अनुच्छेद 371 में एक नया ‘अध्याय K’ (Chapter K) जोड़ने का एक ऐतिहासिक प्रस्ताव पेश किया।

प्रस्तावित अनुच्छेद 371(K) क्या हैं?

  • परिचय: प्रस्तावित अनुच्छेद 371(K) (Article 371K Ladakh) संविधान के भाग XXI (अस्थायी, संक्रमणकालीन और विशेष उपबंध) के तहत एक अनूठा मॉडल है। यह लद्दाख के लिए एक विशिष्ट शासन मॉडल (Sui Generis Governance Model) स्थापित करने का प्रयास है, जो केंद्र शासित प्रदेश (UT) के स्तर पर विधायी शक्तियों से युक्त एक प्रत्यक्ष निर्वाचित शासी निकाय (Directly Elected Governing Body) की रूपरेखा तैयार करता है। 
  • प्रावधान:
    • प्रत्यक्ष निर्वाचित संस्था (Directly Elected Body): इसके तहत लद्दाख के नागरिकों द्वारा सीधे चुने गए प्रतिनिधियों की एक परिषद का गठन किया जाएगा, जिससे क्षेत्र में नौकरशाही के शासन के स्थान पर लोकतांत्रिक भागीदारी बहाल होगी। 
    • विशिष्ट विधायी क्षेत्र (Legislative Domain): इस निर्वाचित संस्था को लद्दाख की पारिस्थितिकी और संस्कृति से जुड़े 6 महत्वपूर्ण विषयों पर कानून बनाने की पूर्ण विधायी शक्ति (Legislative Powers) दी जाएगी:
      • भूमि अधिकार और संपत्ति का हस्तांतरण (Land Rights)
      • संस्कृति और स्थानीय भाषा (Culture and Language)
      • वन प्रबंधन (Forests)
      • पर्यावरण संरक्षण (Environment)
      • प्राकृतिक संसाधन (Natural Resources)
      • स्थानीय रोजगार के अवसर (Employment Opportunities)
    • अनुच्छेद 240 के साथ समन्वय (Concurrence with Article 240): इस प्रस्तावित निकाय को संविधान के अनुच्छेद 240 के तहत राष्ट्रपति द्वारा केंद्र शासित प्रदेशों के लिए आरक्षित अन्य प्रशासनिक विषयों पर भी नियम बनाने का अधिकार दिया जा सकता है।

इस विशेष दर्जे की आवश्यकता क्यों है?

  • लोकतांत्रिक शून्यता (Democratic Vacuum): अगस्त 2019 में अनुच्छेद 370 की समाप्ति और जम्मू-कश्मीर पुनर्गठन अधिनियम के बाद लद्दाख को बिना विधानसभा वाला केंद्र शासित प्रदेश बनाया गया था। इसके बाद से वहां का प्रशासन पूर्णतः नौकरशाहों (Bureaucrats) द्वारा संचालित हो रहा था, जिससे स्थानीय लोगों में असंतोष था। 
  • जनसांख्यिकीय और सांस्कृतिक चिंताएं: लद्दाख की लगभग 97% आबादी जनजातीय (Tribal) है। नई अधिवास नीति (Domicile Rules) के कारण स्थानीय लोगों को अपनी विशिष्ट सांस्कृतिक पहचान, भूमि और रोजगार छिनने का गहरा डर था।
  • पारिस्थितिकीय संवेदनशीलता: लद्दाख एक हिमालयी तंत्र है। अनियंत्रित औद्योगिक और व्यावसायिक गतिविधियों से इसके ग्लेशियरों और पर्यावरण को बचाने के लिए स्थानीय विधायी नियंत्रण आवश्यक था।
    • लद्दाख के नागरिक समाज संगठन (जैसे लेह एपेक्स बॉडी और कारगिल डेमोक्रेटिक अलायंस) लंबे समय से छठी अनुसूची (Sixth Schedule) की मांग कर रहे थे।

लद्दाख की वर्तमान प्रशासनिक व्यवस्था:

वर्तमान में लद्दाख का प्रशासन सीधे उपराज्यपाल (Lieutenant Governor) के माध्यम से चलाया जाता है। जमीनी स्तर पर दो स्वायत्त विकास परिषदें—लेह और कारगिल हिल काउंसिल (LAHDC) कार्यरत हैं। हालांकि, इन परिषदों के पास कानून बनाने की शक्ति (Legislative Autonomy) नहीं है और वे पूरी तरह बजटीय आवंटन के लिए केंद्र पर निर्भर हैं। 

क्या अन्य राज्यों में भी ऐसी व्यवस्था अपनाई गई है?

हाँ, भारतीय संविधान का अनुच्छेद 371 भारत के संघीय ढांचे की विविधता को बनाए रखने के लिए विभिन्न राज्यों को विशेष प्रावधान (Special Provisions) देता है:

  • अनुच्छेद 371-A (नागालैंड) और अनुच्छेद 371-G (मिजोरम) के तहत वहां की पारंपरिक सामाजिक प्रथाओं, धार्मिक नियमों और भूमि अधिकारों की रक्षा की गई है, जहाँ संसद का कानून सीधे लागू नहीं होता।
  • वर्तमान में अनुच्छेद 371 (A से J तक) के तहत 12 राज्यों (जैसे महाराष्ट्र, गुजरात, असम, मणिपुर, सिक्किम, अरुणाचल प्रदेश आदि) को विशेष सुरक्षा प्राप्त है। 
  • अंतर: वर्तमान में यह व्यवस्था केवल पूर्ण राज्यों के लिए है। लद्दाख के लिए इसे लागू करना भारतीय संवैधानिक इतिहास में किसी केंद्र शासित प्रदेश को विशेष दर्जा (Ladakh Special Status 2026) देने का पहला अनूठा प्रयोग होगा। 

छठी अनुसूची बनाम प्रस्तावित अनुच्छेद 371(K):

तुलना का आधार (Basis of Comparison)छठी अनुसूची (Sixth Schedule – Article 244)प्रस्तावित अनुच्छेद 371(K) (Proposed Article 371K)
संस्थागत ढांचा (Institutional Structure)इसके तहत जिला स्तर पर स्वायत्त जिला परिषदें (ADCs) बनती हैं।यह संपूर्ण केंद्र शासित प्रदेश (UT) के स्तर पर एक एकीकृत विधायी संस्था बनाता है।
भौगोलिक दायरा (Geographical Scope)यह वर्तमान में केवल पूर्वोत्तर के 4 राज्यों (असम, मेघालय, मिजोरम, त्रिपुरा) के जनजातीय क्षेत्रों में लागू है।यह विशेष रूप से लद्दाख के लिए कस्टमाइज्ड संवैधानिक सुरक्षा ढांचा (Sui Generis Model) है।
शक्तियों का दायरा (Scope of Powers)परिषदों को न्यायिक, विधायी और प्रशासनिक शक्तियां प्राप्त होती हैं।इसमें भूमि, पर्यावरण, रोजगार और संस्कृति पर स्पष्ट विधायी अधिकार सीधे निर्वाचित सरकार को मिलते हैं।
लद्दाख के नेताओं का रुखस्थानीय नेता इसे जनजातीय अधिकारों के संरक्षण का अचूक संवैधानिक कवच मानते हैं।नेताओं ने इस प्रस्ताव को ‘अधूरा’ कहा है क्योंकि इसमें अभी नौकरशाही और पुलिस पर नियंत्रण स्पष्ट नहीं है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

प्रश्न 1: Article 371K क्या है और Ladakh को इससे क्या फायदा होगा?

उत्तर: यह गृह मंत्रालय द्वारा प्रस्तावित एक नया संवैधानिक खंड है, जो लद्दाख को भूमि और संस्कृति पर कानून बनाने के लिए खुद की चुनी हुई विधायी परिषद (Elected Body) प्रदान करेगा। 

प्रश्न 2: Ladakh को Special Status देने का प्रस्ताव क्या है?

उत्तर: केंद्र सरकार ने लद्दाख को पूर्ण राज्य का दर्जा देने के बजाय संविधान के भाग XXI के तहत विशेष सुरक्षात्मक प्रावधान (Special Provision) देने की पेशकश की है। 

प्रश्न 3: Article 371K और Sixth Schedule में क्या अंतर है?

उत्तर: छठी अनुसूची जिला स्तर पर जनजातीय स्वायत्त परिषदें (ADCs) बनाती है, जबकि अनुच्छेद 371(K) पूरे लद्दाख केंद्र शासित प्रदेश के स्तर पर विधायी शक्तियों से युक्त एक राज्य जैसी चुनी हुई संस्था स्थापित करेगा। 

प्रश्न 4: क्या Article 371K से Ladakh को legislative powers मिलेंगी?

उत्तर: हाँ, इस नवीन प्रस्ताव के तहत लद्दाख के निर्वाचित शासी निकाय को भूमि, पर्यावरण, संस्कृति, वन और स्थानीय रोजगार जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर कानून बनाने की पूर्ण विधायी शक्तियां (Legislative Powers) प्राप्त होंगी।

प्रश्न 5: Ladakh के लिए Constitutional Safeguards क्यों जरूरी हैं?

उत्तर: लद्दाख की 97% आबादी जनजातीय है। बिना विधायी संरक्षण के बाहरी हस्तक्षेप से क्षेत्र की संवेदनशील पारिस्थितिकी, स्थानीय नौकरियों और विशिष्ट सांस्कृतिक पहचान के प्रभावित होने का जोखिम है।

प्रश्न 6: क्या Ladakh को Statehood की जगह Article 371K मिलेगा?

उत्तर: गृह मंत्रालय ने कम राजस्व सृजन का हवाला देकर वर्तमान में पूर्ण राज्यत्व (Statehood) की मांग को खारिज कर दिया है, लेकिन इसे भविष्य में राज्य का दर्जा मिलने की दिशा में एक अंतरिम सुधारात्मक कदम बताया है। दौरान ध्वनिक और सूक्ष्म शारीरिक संरचनात्मक विश्लेषण से इसकी विशिष्ट पहचान की।

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