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एशिया का पहला 3D-प्रिंटेड मार्स रेडिएशन शील्ड

एशिया का पहला 3D-प्रिंटेड मार्स रेडिएशन शील्ड | Asia first 3D-printed Mars radiation shield

Asia first 3D-printed Mars radiation shield

संदर्भ:

अहमदाबाद स्थित AAKA स्पेस स्टूडियो ने हाल ही में एशिया का पहला 3D-प्रिंटेड मार्स रेडिएशन शील्ड (मंगल विकिरण ढाल) विकसित और सफलतापूर्वक परीक्षण कर अंतरिक्ष विज्ञान के क्षेत्र में भारत का नाम ऊंचा किया।

मार्स रेडिएशन शील्ड क्या है?

यह एक सुरक्षात्मक संरचना है जिसे विशेष रूप से मंगल ग्रह पर रहने वाले अंतरिक्ष यात्रियों को घातक अंतरिक्ष विकिरण से बचाने के लिए बनाया गया है। मंगल ग्रह पर पृथ्वी की तरह सुरक्षात्मक चुंबकीय क्षेत्र और घना वायुमंडल नहीं है, जिससे वहाँ विकिरण का स्तर बहुत अधिक होता है। यह ढाल न केवल विकिरण को रोकती है, बल्कि मंगल के अत्यधिक तापमान उतार-चढ़ाव के दौरान थर्मल स्थिरता भी प्रदान करती है।

प्रमुख विशेषताएं:

  • ISRU तकनीक (In-Situ Resource Utilization): इस नवाचार का मुख्य आधार ISRU तकनीक है, जिसका अर्थ है “स्व-स्थान संसाधन उपयोग“। यह तकनीक मंगल पर उपलब्ध स्थानीय मिट्टी (रेगोलिथ) का उपयोग करके निर्माण करने पर आधारित है, जिससे पृथ्वी से भारी सामग्री ले जाने की आवश्यकता और मिशन की लागत काफी कम हो जाती है। 
  • स्वदेशी सामग्री: शोधकर्ताओं ने मंगल की मिट्टी जैसे गुण प्राप्त करने के लिए सेलम, तमिलनाडु से ओलिविन-समृद्ध पत्थरों और अरियालुर बेसिन से चूना पत्थर का उपयोग किया।
    • बाइंडर्स: इन सामग्रियों को विशेष रूप से डिजाइन किए गए चूना-आधारित बाइंडर्स के साथ मिलाया गया जो मंगल पर सीमेंट की तरह व्यवहार करते हैं।
    • सहयोग: इस परियोजना में स्टार्टअप MiCoB ने अपने MiCO-V 3D कंक्रीट प्रिंटिंग सिस्टम के साथ सहयोग किया। 
  • स्वायत्त रोबोटिक निर्माण: शील्ड का निर्माण रोबोटिक और गैन्ट्री-आधारित 3D प्रिंटिंग प्रक्रियाओं के माध्यम से किया गया है। यह तकनीक बिना मानवीय हस्तक्षेप के परतों में संरचनाएँ बनाने में सक्षम है। 

इसका महत्व:

  • स्थायी आवास: यह तकनीक भविष्य में चंद्रमा और मंगल पर मानव बस्तियों को स्थायी और सुरक्षित बनाने का मार्ग प्रशस्त करती है।
  • अंतरिक्ष वास्तुकला में भारत का नेतृत्व: आस्था झाला (Aastha Jhala) द्वारा स्थापित AAKA स्पेस स्टूडियो के इस प्रयास ने भारत को अंतरिक्ष वास्तुकला (Space Architecture) और डीप-टेक नवाचार में अग्रणी स्थान दिलाया है।
  • लागत प्रभावी मिशन: स्थानीय संसाधनों का उपयोग करने से भविष्य के मिशन अत्यधिक किफायती हो जाएंगे। 

मंगल ग्रह (Mars):

    • सौर मंडल में स्थिति: सूर्य से चौथा ग्रह और आकार में दूसरा सबसे छोटा ग्रह। इसे इसके धरातल पर मौजूद ‘आयरन ऑक्साइड’ के कारण ‘लाल ग्रह’ (Red Planet) कहा जाता है।
    • वायुमंडल: अत्यंत विरल (Thin), जिसमें मुख्य रूप से 95% कार्बन डाइऑक्साइड, नाइट्रोजन और आर्गन शामिल हैं। यहाँ का वायुमंडलीय दबाव पृथ्वी के मुकाबले केवल 1% है।
    • भू-आकृति: यहाँ सौर मंडल का सबसे ऊँचा पर्वत ओलंपस मॉन्स (Olympus Mons) और सबसे विशाल घाटी वेलेस मैरिनेरिस (Valles Marineris) स्थित है।
    • प्राकृतिक उपग्रह: इसके दो छोटे चंद्रमा हैं— फोबोस (Phobos) और डीमोस (Deimos)
  • महत्वपूर्ण मिशन:

  • MOM (Mangalyaan): इसरो (ISRO) द्वारा 2013 में लॉन्च। भारत पहले प्रयास में मंगल की कक्षा में पहुँचने वाला दुनिया का पहला देश बना।
  • Perseverance Rover (NASA): वर्तमान में ‘जेजेरो क्रेटर’ में प्राचीन जीवन के संकेतों की खोज और मिट्टी के नमूने एकत्र कर रहा है।
  • Hope Mission: संयुक्त अरब अमीरात (UAE) का पहला मंगल कक्षीय मिशन।
  • Tianwen-1: चीन का मिशन जिसमें ऑर्बिटर, लैंडर और ‘झुरोंग’ रोवर शामिल है।

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