वायुमंडलीय माइक्रोप्लास्टिक्स | Atmospheric microplastics

संदर्भ:
IISER कोलकाता के एक अध्ययन के अनुसार सुंदरवन में वायुमंडलीय माइक्रोप्लास्टिक्स (Atmospheric Microplastics) की पहचान हुई है, जो मैंग्रोव पारिस्थितिकी तंत्र के लिए एक बड़ा खतरा है। अध्ययन के अनुसार ये कण खाद्य श्रृंखला को बाधित करने के साथ-साथ ‘ब्लू कार्बन सिंक’ की कार्बन संचय क्षमता को प्रभावित कर रहे हैं।
वायुमंडलीय माइक्रोप्लास्टिक्स क्या हैं?
वायुमंडलीय माइक्रोप्लास्टिक्स (Atmospheric Microplastics – AMPs) वे सूक्ष्म प्लास्टिक कण हैं जिनका व्यास 5 मिलीमीटर से कम होता है और जो वायु में निलंबित रहकर लंबी दूरियों तक यात्रा कर सकते हैं।
- स्रोतों का वर्गीकरण:
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- प्राथमिक माइक्रोप्लास्टिक्स: ये औद्योगिक स्तर पर जानबूझकर छोटे बनाए जाते हैं, जैसे कॉस्मेटिक्स में ‘माइक्रोबीड्स’ या प्लास्टिक निर्माण के लिए उपयोग किए जाने वाले ‘नर्डल्स’ (Nurdles)।
- द्वितीयक माइक्रोप्लास्टिक्स: बड़े प्लास्टिक उत्पादों (जैसे टायर, सिंथेटिक कपड़े, और कचरा) के भौतिक घर्षण (abrasion) और फोटो-डिग्रेडेशन (सूर्य की किरणों से टूटना) के कारण वायुमंडल में मुक्त होते हैं।
- प्रमुख वायुमंडलीय वाहक: टायरों का घिसाव (सड़क धूल का 10-28%), सिंथेटिक कपड़ों से निकलने वाले ‘माइक्रोफाइबर्स’, और लैंडफिल से उड़ने वाली प्लास्टिक धूल।
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वायुमंडलीय संचलन: माइक्रोप्लास्टिक्स की गतिशीलता उनकी घनत्व और आकार पर निर्भर करती है। ये ‘पार्टिकुलेट मैटर’ (PM10 और PM2.5) की तरह व्यवहार करते हैं। हवाएं इन्हें शहरों से हिमालय की चोटियों और अंटार्कटिका जैसे दुर्गम क्षेत्रों तक ले जा सकती हैं।
- निक्षेपण (Deposition): ये वर्षा के माध्यम से (Wet Deposition) या गुरुत्वाकर्षण के कारण (Dry Deposition) भूमि और जल निकायों पर जमा होते हैं।
- कार्बन चक्र पर प्रभाव: यह प्लास्टिक ~90% कार्बन से बना होता है और इसके संचय से मैंग्रोव की कार्बन सोखने की क्षमता (Carbon Sequestration) बाधित होती है।
- स्वास्थ्य जोखिम: श्वास के माध्यम से ये फेफड़ों में सूजन (Inflammation), सेलुलर डैमेज और रक्त प्रवाह में मिलकर अन्य अंगों तक पहुँच सकते हैं। ये प्लेसेंटा बैरियर को पार कर भ्रूण को भी प्रभावित कर सकते हैं।
- जलवायु प्रभाव: बर्फ पर जमा होने वाले गहरे रंग के माइक्रोप्लास्टिक्स ‘अल्बेडो प्रभाव’ (Albedo effect) को कम कर बर्फ पिघलने की दर बढ़ा देते हैं।
भारत के प्रयास:
- प्लास्टिक अपशिष्ट प्रबंधन संशोधन नियम, 2021: 1 जुलाई 2022 से सिंगल-यूज़ प्लास्टिक (SUP) पर प्रतिबंध।
- विस्तारित उत्पादक उत्तरदायित्व (EPR): निर्माताओं को प्लास्टिक कचरे के संग्रह और प्रसंस्करण के लिए जिम्मेदार बनाना।
- NCAP (National Clean Air Programme): अब विशेषज्ञ वायुमंडलीय माइक्रोप्लास्टिक्स को भी इस राष्ट्रीय कार्यक्रम का हिस्सा बनाने की वकालत कर रहे है।