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ब्रिक्स देशों ने यूरोपीय संघ के CBAM की कड़ी निंदा की

ब्रिक्स देशों ने यूरोपीय संघ के CBAM की कड़ी निंदा की

BRICS Countries Condemn EU CBAM

संदर्भ:

हाल ही में नई दिल्ली में आयोजित 12वीं ब्रिक्स पर्यावरण मंत्रियों की बैठक (12th BRICS Environment Ministers’ Meeting) में सदस्य देशों ने एक संयुक्त बयान जारी कर यूरोपीय संघ के कार्बन सीमा समायोजन तंत्र (EU CBAM) की कड़ी निंदा की. ब्रिक्स देशों ने इसे एकतरफा और दंडात्मक व्यापार बाधा करार दिया. 

यूरोपीय संघ का कार्बन सीमा समायोजन तंत्र (EU CBAM) क्या है?

  • परिचय: यूरोपीय संघ का कार्बन सीमा समायोजन तंत्र (Carbon Border Adjustment Mechanism – CBAM) एक पर्यावरणीय सीमा कर (Carbon Border Tax) है.
    • यह यूरोपीय संघ (EU) में आयात किए जाने वाले उच्च कार्बन-गहन उत्पादों (Carbon-intensive goods) पर लगाया जाने वाला शुल्क है. 
  • शुरुआत: इसे यूरोपीय संघ द्वारा पहली बार 1 अक्टूबर 2023 को एक संक्रमणकालीन चरण (Transitional Phase) के साथ शुरू किया गया था, जिसमें केवल उत्सर्जन की रिपोर्टिंग अनिवार्य थी. 
  • पूर्ण कार्यान्वयन: यह प्रणाली 1 जनवरी 2026 से अपने निश्चित और पूर्ण विधिक चरण (Definitive Regime) में प्रवेश कर चुकी है. अब आयातकों के लिए कार्बन प्रमाणपत्र (Carbon certificates) खरीदना और वित्तीय भुगतान करना अनिवार्य हो गया है. 
  • कारण एवं लक्ष्य:
    • कार्बन रिसाव को रोकना (Preventing Carbon Leakage): इसका प्राथमिक उद्देश्य ‘कार्बन रिसाव’ को रोकना है. यह तब होता है जब यूरोपीय कंपनियां कड़े पर्यावरण नियमों से बचने के लिए अपना उत्पादन उन देशों में स्थानांतरित कर देती हैं जहां उत्सर्जन नियम ढीले हैं. 
    • समान अवसर सुनिश्चित करना (Level Playing Field): यूरोपीय संघ के भीतर घरेलू उद्योगों को यूरोपीय संघ उत्सर्जन व्यापार प्रणाली (EU ETS) के तहत भारी कर देना पड़ता है. सीबीएएम आयातित वस्तुओं पर समान लागत लगाकर यूरोपीय उद्योगों को प्रतिस्पर्धी बनाए रखता है.
    • यूरोपीय ग्रीन डील (European Green Deal): यह यूरोपीय संघ के ‘Fit for 55’ पैकेज का हिस्सा है, जिसका लक्ष्य 2030 तक शुद्ध ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन को 1990 के स्तर से कम से कम 55% कम करना है.
  • आच्छादित उत्पाद: यह नियम शुरुआत में 6 प्रमुख क्षेत्रों के आयात पर लागू किया गया है: 
  • लोहा और इस्पात (Iron and Steel)
  • एल्युमीनियम (Aluminium)
  • सीमेंट (Cement)
  • उर्वरक (Fertilisers)
  • हाइड्रोजन (Hydrogen)
  • बिजली (Electricity) 
  • ब्रिक्स देशों का रुख: भारत की अध्यक्षता में आयोजित 12वीं ब्रिक्स पर्यावरण मंत्रियों की बैठक (12th BRICS Environment Ministers’ Meeting) में इस तंत्र के खिलाफ बहुपक्षीय आम सहमति देखी गई: 
  • भेदभावपूर्ण और संरक्षणवादी नीति: ब्रिक्स देशों ने इसे “एकतरफा, दंडात्मक और संरक्षणवादी” उपाय घोषित किया जो सतत व्यापार (Sustainable trade) के सिद्धांतों को नुकसान पहुँचाता है.
  • समान परंतु विभेदित जिम्मेदारियां (CBDR-RC) का उल्लंघन: ब्रिक्स मंत्रियों ने स्पष्ट किया कि सीबीएएम पेरिस समझौते के ‘साझा लेकिन अलग-अलग जिम्मेदारियों’ के मूल सिद्धांत का खुला उल्लंघन करता है.
  • हरित संरक्षणवाद (Green Protectionism): यह पर्यावरण संरक्षण की आड़ में विकासशील देशों के आर्थिक हितों को दबाने के लिए लगाया गया एक ‘यूरोपीय कार्बन शुल्क’ (EU Carbon Tariff) है. 
  • भारत पर प्रभाव: सीबीएएम का भारत पर प्रभाव (CBAM Impact on India) भारतीय निर्यात और औद्योगिक विकास के लिए एक बड़ी आर्थिक चुनौती बनकर उभरा है:
  • भारतीय निर्यात पर भारी वित्तीय बोझ: भारत से यूरोपीय संघ को होने वाले कुल निर्यात का एक बड़ा हिस्सा सीबीएएम के दायरे में आता है. नए नियमों के कारण भारतीय वस्तुओं पर 20% से 35% तक का अतिरिक्त प्रशुल्क लग सकता है, जिससे वे यूरोपीय बाजारों में महंगी और अप्रतिस्पर्धी हो जाएंगी.
  • भारतीय इस्पात उद्योग पर संकट (CBAM Indian Steel Industry): भारत के लिए सबसे बड़ा खतरा इस्पात और लोहे के क्षेत्र में है, जो यूरोपीय संघ को होने वाले सीबीएएम निर्यात का 90% हिस्सा है. भारत में इस्पात उत्पादन के लिए बड़े पैमाने पर ब्लास्ट फर्नेस (Blast Furnace) तकनीक का उपयोग होता है, जो अत्यधिक कार्बन उत्सर्जित करती है. इसके विपरीत, विकसित देश स्क्रैप और इलेक्ट्रिक आर्क फर्नेस (EAF) का उपयोग करते हैं. इस तकनीकी अंतर के कारण भारतीय निर्यातकों को बहुत अधिक कार्बन प्रमाणपत्र मूल्य चुकाना पड़ रहा है.
  • डिकार्बोनाइजेशन की उच्च लागत (High Cost of Decarbonisation): भारतीय उद्योगों को यूरोपीय मानकों के अनुरूप खुद को ढालने (CBAM Compliance India) के लिए भारी पूंजीगत निवेश की आवश्यकता है, जिससे छोटे और मध्यम उद्यमों (MSMEs) के बंद होने का खतरा बढ़ गया है. 
  • प्रमुख सुझाव: जलवायु न्याय और न्यायसंगत परिवर्तन सुनिश्चित करने के लिए ब्रिक्स देशों ने निम्नलिखित व्यावहारिक समाधान प्रस्तावित किए हैं:
  • अनुकूलन वित्त में वृद्धि (Scaling up Adaptation Finance): ब्रिक्स देशों ने मांग की कि विकसित देशों को वैश्विक दक्षिण के देशों के लिए जलवायु वित्त को 2035 तक तीन गुना करने के अपने वादे को पूरा करना चाहिए. यह वित्तीय सहायता ऋण के बजाय मुख्य रूप से अनुदान (Grants) और रियायती वित्त (Concessional finance) के रूप में होनी चाहिए.
  • प्रौद्योगिकी हस्तांतरण (Technology Transfer): विकसित राष्ट्रों को सीबीएएम जैसे कर थोपने के बजाय विकासशील देशों को स्वच्छ और कम-कार्बन वाली विनिर्माण तकनीकें मुफ्त या कम लागत पर साझा करनी चाहिए.
  • बहुपक्षीय संवाद का समर्थन: किसी भी देश को एकतरफा व्यापारिक नियम लागू नहीं करने चाहिए. जलवायु से जुड़े व्यापार नियमों को विश्व व्यापार संगठन (WTO) और UNFCCC के बहुपक्षीय मंचों पर आम सहमति से ही तय किया जाना चाहिए. 

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

प्रश्न 1: EU Carbon Border Adjustment Mechanism CBAM क्या है?

उत्तर: यह यूरोपीय संघ द्वारा आयातित उच्च कार्बन-गहन उत्पादों पर लगाया जाने वाला एक विशेष पर्यावरण कर (Carbon Border Tax) है, जो कार्बन रिसाव को रोकने के लिए बनाया गया है. 

प्रश्न 2: CBAM 2026 से क्यों महत्वपूर्ण हो गया है?

उत्तर: क्योंकि 1 जनवरी 2026 से यह अपने पूर्ण विधिक और दंडात्मक चरण में प्रवेश कर चुका है, जिसके तहत अब आयातकों को अनिवार्य रूप से वित्तीय भुगतान करना होगा. 

प्रश्न 3: European Union का Carbon Border Tax क्या है?

उत्तर: यह गैर-यूरोपीय देशों से आने वाले सामानों पर लगाया जाने वाला एक सीमा शुल्क (Carbon Tariff) है, ताकि उनके उत्पादन के दौरान उत्सर्जित कार्बन की कीमत वसूली जा सके.

प्रश्न 4: CBAM का भारत पर क्या असर पड़ेगा?

उत्तर: इससे भारत का यूरोपीय संघ को होने वाला निर्यात महंगा हो जाएगा, विशेष रूप से इस्पात और एल्युमीनियम उद्योगों को भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ सकता है.

प्रश्न 5: CBAM से Indian Steel Exporters को क्या नुकसान हो सकता है?

उत्तर: भारतीय इस्पात उद्योग ब्लास्ट फर्नेस तकनीक के कारण अधिक CO2 उत्सर्जित करता है, जिससे भारतीय निर्यातकों को यूरोप में अधिक टैक्स चुकाना पड़ेगा और उनकी प्रतिस्पर्धात्मकता कम होगी. 

प्रश्न 6: किन Products पर EU CBAM लागू होता है?

उत्तर: वर्तमान में यह नियम लोहा, इस्पात, एल्युमीनियम, सीमेंट, उर्वरक, हाइड्रोजन और बिजली के आयात पर लागू होता है. सलाह पर वार्षिक फ्लू वैक्सीन लगवाएं।

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