BRO का प्रोजेक्ट दीपक

संदर्भ:
हाल ही में सीमा सड़क संगठन (BRO) के सबसे पुराने और महत्वपूर्ण प्रोजेक्ट्स में से एक, ‘प्रोजेक्ट दीपक’ (Project Deepak) ने अपना 66वाँ स्थापना दिवस मनाया।
प्रोजेक्ट दीपक क्या है?
- परिचय: प्रोजेक्ट दीपक, पश्चिमी हिमालय के चुनौतीपूर्ण और ऊँचाई वाले क्षेत्रों में रणनीतिक सड़कों, पुलों और अन्य बुनियादी ढांचे के निर्माण, उन्नयन और रखरखाव के लिए समर्पित BRO की एक प्रमुख शाखा है।
- स्थापना: प्रोजेक्ट दीपक की स्थापना मई 1961 में हुई थी। इसके पहले मुख्य अभियंता कर्नल एस एन पुंज थे।
- प्रारंभिक उद्देश्य: इसे मुख्य रूप से हिंदुस्तान-तिब्बत (H-T) रोड के निर्माण के लिए गठित किया गया था, जो भारत में निर्मित सबसे कठिन सड़कों में से एक मानी जाती है।
- विस्तार: समय के साथ इसकी जिम्मेदारी पंजाब, हरियाणा और राजस्थान तक फैली, लेकिन बाद में प्रोजेक्ट ‘चेतक’ और अन्य इकाइयों के गठन के बाद इसके कार्यक्षेत्र को सीमित किया गया।
- कार्यक्षेत्र: वर्तमान में प्रोजेक्ट दीपक का मुख्यालय शिमला में स्थित है। इसका कार्यक्षेत्र मुख्य रूप से हिमाचल प्रदेश के निम्नलिखित रणनीतिक जिलों में केंद्रित है: शिमला, किन्नौर, कुल्लू और लाहौल-स्पीति।
- यह प्रोजेक्ट लगभग 1,100 किलोमीटर से अधिक के सड़क नेटवर्क का प्रबंधन और रखरखाव करता है।
प्रमुख उपलब्धियाँ:
- हिंदुस्तान-तिब्बत रोड: इस ऐतिहासिक सड़क का निर्माण और निरंतर उन्नयन प्रोजेक्ट दीपक की सबसे बड़ी उपलब्धि है।
- मनाली-लेह धुरी (Axis): लद्दाख तक पहुँचने वाले इस रणनीतिक मार्ग के महत्वपूर्ण खंडों का रखरखाव यही प्रोजेक्ट करता है, जो भारतीय सेना के लिए ‘लाइफलाइन’ है।
- भीम सेतु (Bhim Setu): हाल ही में लाहौल-स्पीति के उदयपुर में 4.7 करोड़ रुपये की लागत से बने इस डबल-लेन पुल को राष्ट्र को समर्पित किया गया, जिसका निर्माण जनवरी 2025 में पूरा हुआ था।
- कुल निर्माण: अब तक इस प्रोजेक्ट ने 2,200 किमी से अधिक सड़कें और लगभग 47 बड़े पुलों का निर्माण किया है।
महत्व:
- राष्ट्रीय सुरक्षा: चीन के साथ लगती सीमाओं (LAC) पर सैनिकों की त्वरित आवाजाही और रसद आपूर्ति सुनिश्चित करने में इसकी महत्वपूर्ण भूमिका है।
- कनेक्टिविटी: यह लाहौल-स्पीति और किन्नौर जैसी दूरदराज की जनजातीय आबादी को मुख्यधारा से जोड़ता है।
- भारी बर्फबारी के बाद रणनीतिक दर्रों को रिकॉर्ड समय में खोलना इसकी कार्यकुशलता का प्रमाण है।
- आर्थिक विकास: इन सड़कों ने क्षेत्र में पर्यटन, सेब के व्यापार और स्थानीय अर्थव्यवस्था को पुनर्जीवित किया है।
- मानवीय सहायता: मई 2023 में बारालाचा ला दर्रे पर फंसे 300 से अधिक मोटर चालकों और जुलाई 2023 में चंद्रताल से 250 नागरिकों को सुरक्षित निकालना इसकी तत्परता का उदाहरण है।