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केंद्र सरकार द्वारा वंदे मातरम के गायन/वादन के लिए नए विस्तृत दिशानिर्देश जारी (Central Government issues new detailed guidelines for singing/playing of Vande Mataram) | UPSC

Central Government issues new detailed guidelines for singing/playing of Vande Mataram

Central Government issues new detailed guidelines for singing/playing of Vande Mataram

संदर्भ:

हाल ही में गृह मंत्रालय (MHA) ने ‘वंदे मातरम’ के सम्मान, गायन और औपचारिक आयोजनों में इसके उपयोग को लेकर नए और विस्तृत दिशानिर्देश (Guidelines) जारी किए हैं।

2026 के नए दिशानिर्देशों के मुख्य बिंदु:

  • 6 छंदों का गायन: ​अब तक आधिकारिक कार्यक्रमों में ‘वंदे मातरम’ के केवल पहले दो छंद गाए जाते थे। नए नियमों के अनुसार:

  • छह छंद (6 Stanzas): बंकिम चंद्र चटर्जी द्वारा रचित मूल गीत के सभी छह छंदों को ‘आधिकारिक संस्करण’ घोषित किया गया है।
  • अवधि: पूर्ण गीत की गायन अवधि लगभग 3 मिनट 10 सेकंड (190 सेकंड) निर्धारित की गई है। (तुलना के लिए: राष्ट्रगान की अवधि 52 सेकंड है)।
  • क्रम: ​दिशानिर्देशों में स्पष्ट किया गया है कि जब भी किसी कार्यक्रम में राष्ट्रगान और राष्ट्रीय गीत दोनों का गायन या वादन किया जाना हो तो राष्ट्रीय गीत ‘वंदे मातरम’ का गायन/वादन राष्ट्रगान ‘जन गण मन’ से ठीक पहले किया जाएगा।

  • ​सम्मान और मुद्रा: राष्ट्रीय गीत बजते या गाते समय उपस्थित सभी व्यक्तियों को सावधान की मुद्रा (Attention) में खड़ा होना अनिवार्य होगा।

  • अपवाद: सिनेमा हॉल में फिल्म या न्यूजरील के दौरान यदि यह गीत बजता है, तो दर्शकों का खड़ा होना अनिवार्य नहीं है, ताकि फिल्म के प्रदर्शन में बाधा न आए।
  • ​अनिवार्य अवसर: ​नए दिशानिर्देशों के तहत निम्नलिखित अवसरों पर ‘वंदे मातरम’ का गायन अनिवार्य होगा:

  • ​राष्ट्रपति, राज्यपाल और उपराज्यपाल के आगमन और प्रस्थान के समय।
  • ​राष्ट्रपति के राष्ट्र के नाम संबोधन (आकाशवाणी/दूरदर्शन) से ठीक पहले और बाद में।
  • ​नागरिक अलंकरण समारोह (जैसे पद्म पुरस्कार)।
  • स्कूलों में: सभी विद्यालयों को दिन की शुरुआत सामूहिक रूप से ‘वंदे मातरम’ गायन के साथ करने की सलाह दी गई है।
  • परेड: जब राष्ट्रीय ध्वज को परेड में लाया जाए।

ऐतिहासिक और संवैधानिक परिप्रेक्ष्य:

ऐतिहासिक पृष्ठभूमि:

      • रचना: बंकिम चंद्र चटर्जी ने 1870 के दशक में (संभवतः 1876) इसे लिखा और बाद में अपने उपन्यास ‘आनंदमठ’ (1882) में शामिल किया।
      • प्रथम गायन: 1896 के कलकत्ता कांग्रेस अधिवेशन में रवींद्रनाथ टैगोर द्वारा।
      • 1937 का प्रस्ताव: कांग्रेस कार्य समिति (CWC) ने धार्मिक संवेदनशीलता को देखते हुए केवल पहले दो छंदों को राष्ट्रीय गीत के रूप में स्वीकार किया था, जिसे अब 2026 के नियमों द्वारा बदल दिया गया है।

​संवैधानिक स्थिति:

  • 24 जनवरी 1950: संविधान सभा के अध्यक्ष डॉ. राजेंद्र प्रसाद ने घोषणा की थी कि ‘वंदे मातरम’ को राष्ट्रगान (जन गण मन) के समान सम्मान और दर्जा प्राप्त होगा।
  • अनुच्छेद 51A (a): वर्तमान में मौलिक कर्तव्यों में केवल ‘राष्ट्रीय ध्वज’ और ‘राष्ट्रगान’ के सम्मान का उल्लेख है। ‘राष्ट्रीय गीत’ का स्पष्ट उल्लेख संविधान के पाठ में नहीं है।
  • कानूनी सुरक्षा: ‘राष्ट्रीय सम्मान के अपमान का निवारण अधिनियम, 1971’ मुख्य रूप से राष्ट्रगान और ध्वज को कवर करता है, लेकिन अदालती फैसलों (जैसे मद्रास उच्च न्यायालय 2017) ने इसके सम्मान को अनिवार्य बताया है।

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