Container Manufacturing Promotion Scheme (CMPS): कैबिनेट ने CMPS योजना को दी मंजूरी
संदर्भ:
हाल ही में प्रधानमंत्री मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने भारत में एक वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी विनिर्माण पारिस्थितिकी तंत्र स्थापित करने के लिए कंटेनर मैन्युफैक्चरिंग प्रमोशन स्कीम (Container Manufacturing Promotion Scheme – CMPS) को आधिकारिक तौर पर मंजूरी दी।

कंटेनर मैन्युफैक्चरिंग प्रमोशन स्कीम के बारे में:
- परिचय: Container Manufacturing Promotion Scheme (CMPS) एक केंद्रीय नीति है जिसका मूल उद्देश्य देश में फ्रेट कंटेनरों के घरेलू विनिर्माण (Domestic Container Manufacturing) को भारी वित्तीय प्रोत्साहन देकर वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में भारत की हिस्सेदारी बढ़ाना है।
- इस योजना की प्रारंभिक घोषणा केंद्रीय बजट 2026-27 (Union Budget 2026) में की गई थी।
- कुल बजट: इस व्यापक विनिर्माण पहल के लिए केंद्र सरकार ने ₹10,000 करोड़ के कुल बजटीय परिव्यय को स्वीकृति दी है।
- कार्यान्वयन अवधि (Implementation Period): यह योजना कुल 13 वर्षों की लंबी अवधि के लिए लागू की गई है, जो वित्तीय वर्ष 2027-28 से 2039-40 तक सक्रिय रहेगी।
- इसमें बुनियादी ढांचा स्थापित करने के लिए शुरुआती 3 वर्ष और उत्पादन सहायता के लिए आगामी 10 वर्ष निर्धारित हैं।
- तकनीकी मानदंड और विनिर्माण श्रेणियां (Technical Criteria and Categories): यह योजना मुख्य रूप से दो प्रकार की विनिर्माण सुविधाओं को लक्षित करती है:
- ग्रीनफील्ड सुविधाएं (Greenfield Facilities): पूरी तरह से नए संयंत्र स्थापित करने के लिए न्यूनतम वार्षिक उत्पादन क्षमता 1,00,000 TEUs (Twenty-foot Equivalent Units) होनी अनिवार्य है।
- ब्राउनफील्ड विस्तार (Brownfield Expansion): पहले से मौजूद विनिर्माण इकाइयों के आधुनिकीकरण या विस्तार के लिए न्यूनतम 25,000 TEUs की अतिरिक्त वार्षिक क्षमता जोड़ना आवश्यक है।
- इन सभी परियोजनाओं को सैद्धांतिक मंजूरी मिलने के 3 वर्षों के भीतर चालू (Commissioned) होना होगा और अंतरराष्ट्रीय मानकों (ISO 668 श्रृंखला-1) का पालन करना होगा।
- योजना के प्रमुख घटक और वित्तीय प्रोत्साहन (Major Components and Incentives): इस योजना को सुचारू रूप से लागू करने के लिए वित्तीय पैकेज को चार प्रमुख रणनीतिक हिस्सों में विभाजित किया गया है:
- परिचालन व्यय सहायता (Operational Expenditure Assistance – OEA): इस घटक के लिए सबसे बड़ा हिस्सा ₹8,891 करोड़ आवंटित किया गया है। इसके तहत वैश्विक मानकों के अनुरूप निर्मित और बेचे गए प्रति कंटेनर पर नकद प्रोत्साहन (Assistance Value) प्रदान किया जाएगा ताकि उत्पादन लागत के अंतर को पाटा जा सके:
- 20 फीट कंटेनर: ₹49,500 प्रति यूनिट
- 40 फीट कंटेनर: ₹86,625 प्रति यूनिट
- 20 फीट विशिष्ट कंटेनर: ₹37,125 से ₹74,250 तक
- ब्याज सबवेंशन सहायता (Interest Subvention Assistance – ISA): इसके लिए ₹859 करोड़ का प्रावधान है, जिसके तहत पूंजीगत ऋणों (Capital Loans) पर प्रति वर्ष 3% की ब्याज छूट प्रदान की जाएगी।
- परीक्षण और प्रमाणन सहायता (Testing and Certification Assistance): इसके लिए ₹150 करोड़ आवंटित किए गए हैं ताकि भारत में ही ‘डायनेमिक लोंगीट्यूडिनल इम्पैक्ट टेस्टिंग’ (Dynamic Longitudinal Impact Testing) जैसी अत्याधुनिक साझा परीक्षण सुविधाएं विकसित की जा सकें।
- भूमि पट्टा सहायता और प्रशासन: प्रमुख बंदरगाहों (Major Ports) से भूमि पट्टे पर लेने के लिए अधिसूचित दर पर 25% की लीजिंग सहायता दी जाएगी। साथ ही ₹100 करोड़ प्रशासनिक और निगरानी कार्यों के लिए रखे गए हैं।
- स्थानीय सामग्री नियम (Local Content Requirement): घरेलू विनिर्माण श्रृंखला को मजबूत करने के लिए कड़े नियम बनाए गए हैं। निर्माताओं को वित्तीय वर्ष 2031-32 तक न्यूनतम 70% स्थानीय सामग्री का उपयोग करना होगा, जिसे वित्तीय वर्ष 2032-33 से बढ़ाकर 90% कर दिया जाएगा।
भारत के लिए इसका महत्व:
- आयात निर्भरता में भारी कमी (Reducing Container Import Dependence): वर्तमान में वैश्विक कंटेनर विनिर्माण के 95% से अधिक हिस्से पर चीन का एकाधिकार है। भारत अपनी आवश्यकता के लिए पूरी तरह आयात पर निर्भर है। यह योजना भारत को आत्मनिर्भर (Atmanirbhar Bharat Defence & Trade) बनाएगी।
- लॉजिस्टिक्स क्षेत्र का कायाकल्प (Transforming Indian Logistics Sector): वर्तमान में भारत का समुद्री व्यापार मात्रा (Volume) के हिसाब से 95% है। भारत का कंटेनर ट्रैफिक 2024 के 2.4 करोड़ TEUs से बढ़कर 2047 तक 17.5 करोड़ TEUs होने का अनुमान है। घरेलू विनिर्माण से माल ढुलाई लागत (Freight Cost) कम होगी।
- सप्लाई चेन लचीलापन (Supply-Chain Resilience): वैश्विक भू-राजनीतिक तनावों या संकटों के समय भारतीय निर्यातकों को कंटेनरों की किल्लत का सामना नहीं करना पड़ेगा, जिससे देश की व्यापक आर्थिक सुरक्षा (Macroeconomic Security) मजबूत होगी।
- रोजगार सृजन (Container Manufacturing Employment): आधिकारिक अनुमानों के अनुसार, यह योजना सीधे तौर पर 3,000 प्रत्यक्ष रोजगार और विभिन्न संबद्ध क्षेत्रों में 50,000 से अधिक अप्रत्यक्ष रोजगार के अवसर पैदा करेगी।
- सम्बद्ध उद्योगों को प्रोत्साहन (Support for Ancillary Industries): इससे कंटेनर-ग्रेड विशेष इस्पात (Specialised Steel), कॉर्नर कास्टिंग, लकड़ी के फ्रेम और औद्योगिक पेंट्स जैसे घरेलू सहायक उद्योगों की मांग में अभूतपूर्व वृद्धि होगी।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)
प्रश्न 1: कंटेनर मैन्युफैक्चरिंग प्रमोशन स्कीम (CMPS) क्या है?
उत्तर: यह भारत में जहाजरानी कंटेनरों के घरेलू उत्पादन को बढ़ावा देने, चीन पर निर्भरता कम करने और वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला को मजबूत करने वाली 13-वर्षीय केंद्रीय प्रोत्साहन योजना है।
प्रश्न 2: CMPS योजना के लिए केंद्र सरकार ने कितना बजट मंजूर किया है?
उत्तर: केंद्रीय मंत्रिमंडल ने इस महत्वाकांक्षी योजना (CMPS Cabinet Approval) के लिए वित्त वर्ष 2039-40 तक कुल ₹10,000 करोड़ का भारी बजटीय आवंटन मंजूर किया है।
प्रश्न 3: कंटेनर मैन्युफैक्चरिंग योजना का मुख्य उद्देश्य क्या है?
उत्तर: इसका मुख्य उद्देश्य घरेलू निर्माण क्षमता को 10 गुना बढ़ाकर 7.5 लाख TEUs सालाना करना, आयात निर्भरता घटाना और भारत को वैश्विक निर्यात हब बनाना है।
प्रश्न 4: CMPS योजना के तहत कंटेनर निर्माताओं को किस प्रकार की वित्तीय सहायता मिलेगी?
उत्तर: निर्माताओं को पूंजीगत ऋण पर 3% ब्याज सबवेंशन, प्रति कंटेनर निर्माण पर परिचालन व्यय सहायता (OEA) और परीक्षण अवसंरचना सहायता प्रदान की जाएगी।
प्रश्न 5: कंटेनर मैन्युफैक्चरिंग योजना से भारत के लॉजिस्टिक्स क्षेत्र को क्या लाभ होगा?
उत्तर: इससे भारतीय लॉजिस्टिक्स क्षेत्र (Indian Logistics Sector) में कंटेनरों की कमी दूर होगी, माल ढुलाई की लागत घटेगी और बंदरगाहों की परिचालन क्षमता में भारी सुधार होगा।