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अगली पीढ़ी के गश्ती पोत INS Srishti का जलावतरण, समुद्री निगरानी को मिलेगी मजबूती

अगली पीढ़ी के गश्ती पोत INS Srishti का जलावतरण, समुद्री निगरानी को मिलेगी मजबूती

संदर्भ:

हाल ही में 27 अक्टूबर 2026 को भारतीय नौसेना की समुद्री निगरानी क्षमता को अत्यधिक मजबूत करने के लिए गोवा शिपयार्ड में अगली पीढ़ी के अपतटीय गश्ती पोत आईएनएस सृष्टि (INS Srishti) का जलावतरण (Launch) किया गया।

आईएनएस सृष्टि (INS Srishti) के बारे में:

  • प्रकार: INS Srishti भारतीय नौसेना के महत्वाकांक्षी आधुनिकिकरण कार्यक्रम के तहत निर्मित होने वाला एक अगली पीढ़ी का अपतटीय गश्ती पोत (Next Generation Offshore Patrol Vessel – NGOPV) है। 
  • शिपयार्ड निर्माण संख्या: इसे शिपयार्ड में यार्ड 1283 (Yard 1283) के नाम से जाना जाता है। 
  • नामकरण: ‘सृष्टि’ एक संस्कृत शब्द है जिसका अर्थ है ‘उत्पत्ति’ या ‘निर्माण की क्रिया’ (Creation)। यह नाम भारत की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को प्रदर्शित करता है। 
  • अनुबंध और लागत: रक्षा मंत्रालय ने 30 मार्च 2023 को कुल ₹9,781 करोड़ की लागत से 11 अपतटीय गश्ती पोतों (NGOPVs) के निर्माण के अनुबंध पर हस्ताक्षर किए थे।
  • खरीद श्रेणी: यह परियोजना पूर्ण रूप से Buy (Indian-IDDM) श्रेणी के तहत स्वीकृत है।
    • इसका अर्थ है कि यह जहाज स्वदेशी रूप से डिजाइन, विकसित और निर्मित (Indigenously Designed, Developed and Manufactured) किया गया है।
  • साझा विनिर्माण (Concurrent Construction): इन 11 जहाजों का निर्माण भारत के दो शीर्ष शिपयार्डों में एक साथ किया जा रहा है:
    • गोवा शिपयार्ड लिमिटेड (Goa Shipyard Limited – GSL): 7 पोतों का निर्माण (आईएनएस सृष्टि गोवा सुविधा में निर्मित होने वाला इस श्रृंखला का जहाज है)।
    • गार्डन रीच शिपबिल्डर्स एंड इंजीनियर्स (GRSE), कोलकाता: 4 पोतों का निर्माण। 
  • समयरेखा (Timeline): आईएनएस सृष्टि (INS Srishti) की नींव (Keel) 9 जून 2025 को रखी गई थी और इसका सफल जलावतरण (Floating-off Ceremony) 27 अक्टूबर 2026 को संपन्न हुआ। 
  • प्रमुख तकनीकी एवं परिचालन विशेषताएं (Key Technical and Operational Features):
  • मल्टी-डोमेन ऑपरेशंस (Multi-Domain Operations): यह पोत अत्याधुनिक सेंसर, रडार और अत्याधुनिक हथियारों से लैस है, जो इसे विभिन्न प्रकार के समुद्री युद्ध परिदृश्यों में प्रभावी बनाते हैं।
  • धीरज और रेंज (Endurance & Range): इसे इस तरह से डिजाइन किया गया है कि यह बिना री-फ्यूलिंग के लंबे समय तक खुले समुद्र (Deep Sea Operations) में गश्त कर सकता है।
  • स्वदेशी सामग्री: इसमें उच्च स्तर की स्वदेशी सामग्री का उपयोग किया गया है, जो देश के भीतर रक्षा विनिर्माण क्षेत्र (Defence Manufacturing Sector) की बढ़ती परिपक्वता को दर्शाता है।
  • उन्नत सुविधाएं: पोत पर हेलीकॉप्टर और दोहरे ड्रोन सिस्टम (Twin Drone Systems) को संचालित करने की पूर्ण क्षमता है, जिससे इसकी टोही क्षमता कई गुना बढ़ जाती है।

भारत के लिए इसका महत्व:

  • समुद्री निगरानी को मजबूती (Strengthening Maritime Surveillance): हिंद महासागर क्षेत्र (IOR) में भू-राजनीतिक हलचल और चीनी नौसेना की बढ़ती गतिविधियों के बीच भारत की समुद्री निगरानी क्षमता (Indian Navy Maritime Surveillance) को बढ़ाने में यह पोत प्राथमिक भूमिका निभाएगा।
  • समुद्री सुरक्षा और संपत्तियों की रक्षा (Maritime Security India): भारत के विशेष आर्थिक क्षेत्र (EEZ) की सुरक्षा करने के साथ-साथ यह अपतटीय संपत्तियों की रक्षा (Protection of Offshore Assets) जैसे तेल रिगों और प्रमुख समुद्री व्यापार मार्गों को सुरक्षित रखेगा।
  • एंटी-पायरेसी और कानून प्रवर्तन (Anti Piracy Operations): अदन की खाड़ी और अरब सागर में समुद्री डकैती रोधी अभियानों (Anti-piracy Missions) तथा मादक पदार्थों और हथियारों की अवैध तस्करी को रोकने में यह पोत एक त्वरित प्रतिक्रिया बल (Quick Reaction Force) के रूप में कार्य करेगा।
  • मानवीय सहायता और आपदा राहत (HADR Capabilities): हिंद महासागर क्षेत्र के मित्र देशों में प्राकृतिक आपदाओं के दौरान त्वरित मानवीय सहायता और आपदा राहत (Humanitarian Assistance and Disaster Relief) तथा खोज एवं बचाव (Search and Rescue) कार्यों को संचालित करने की इसकी क्षमता भारत की ‘सागर’ (SAGAR) नीति को गति देगी।
  • आर्थिक गुणक प्रभाव (Economic Multiplier Effect): घरेलू शिपयार्डों में इन युद्धपोतों (Make in India Naval Ships) के निर्माण से देश के भीतर भारी इंजीनियरिंग, तकनीकी सेवाओं और एमएसएमई (MSMEs) के लिए बड़े पैमाने पर रोजगार और आर्थिक विकास (GDP Growth) को प्रोत्साहन मिल रहा है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

प्रश्न 1: INS Srishti क्या है और इसका जलावतरण कब हुआ?

उत्तर: यह भारतीय नौसेना का एक अगली पीढ़ी का अपतटीय गश्ती पोत (NGOPV) है, जिसका आधिकारिक जलावतरण 27 अक्टूबर 2026 को किया गया।

प्रश्न 2: INS Srishti का निर्माण किस शिपयार्ड में किया गया है?

उत्तर: इस अत्याधुनिक पोत (Yard 1283) का स्वदेशी विनिर्माण गोवा शिपयार्ड लिमिटेड (Goa Shipyard Limited – GSL) के वाड्डम संयंत्र में किया गया है।

प्रश्न 3: अगली पीढ़ी के अपतटीय गश्ती पोत (NGOPV) की प्रमुख विशेषताएं क्या हैं?

उत्तर: यह पोत उन्नत स्वदेशी सेंसर, लंबी दूरी की गश्त क्षमता, हेलीपैड सुविधा, ड्रोन संचालन प्रणाली और बहु-डोमेन युद्ध क्षमताओं (Multi-domain Capabilities) से लैस है।

प्रश्न 4: INS Srishti भारतीय नौसेना की समुद्री निगरानी क्षमता को कैसे मजबूत करेगा?

उत्तर: यह हिन्द महासागर में दीर्घकालिक गश्त कर अवैध गतिविधियों, विदेशी नौसैनिक घुसपैठ पर नजर रखेगा और भारत की समुद्री सुरक्षा (Maritime Security) सुनिश्चित करेगा।

प्रश्न 5: INS Srishti का उपयोग किन समुद्री अभियानों में किया जा सकेगा?

उत्तर: इसका उपयोग मुख्य रूप से समुद्री निगरानी, डकैती रोधी अभियानों (Anti Piracy Operations), खोज और बचाव (Search and Rescue) तथा मानवीय आपदा राहत (HADR) में किया जाएगा।

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