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उपभोक्ता मूल्य सूचकांक का आधार वर्ष 2024 किया गया (Consumer Price Index base year 2024) | UPSC

Consumer Price Index base year 2024

Consumer Price Index base year 2024

संदर्भ:

हाल ही में सांख्यिकी और कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय (MoSPI) ने उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI) के आधार वर्ष को 2012 से बदलकर 2024 कर दिया है। मंत्रालय द्वारा 12 फरवरी 2026 को इस नई श्रृंखला के तहत पहला डेटा जारी किया गया।  

उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI) क्या है?

  • परिचय: उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI) उन वस्तुओं और सेवाओं के खुदरा मूल्यों (Retail Prices) में होने वाले औसत परिवर्तन को मापता है, जिन्हें परिवार अपने दैनिक उपभोग के लिए खरीदते हैं। 
  • अन्य नाम: इसे ‘खुदरा मुद्रास्फीति’ (Retail Inflation) का संकेतक भी कहा जाता है।
  • जारीकर्ता: सांख्यिकी और कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय (MoSPI) के तहत राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय (NSO)
  • बास्केट (Basket): इसमें भोजन, कपड़े, आवास, ईंधन, शिक्षा, स्वास्थ्य जैसी कई श्रेणियां शामिल होती हैं।
  • महत्व: भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) अपनी मौद्रिक नीति (रेपो रेट आदि) तय करने के लिए मुख्य रूप से CPI (Combined) को ही बेंचमार्क मानता है।

आधार वर्ष (Base Year) क्या है और क्यों बदला गया?

    • परिचय: आधार वर्ष एक संदर्भ वर्ष (Reference Year) होता है जिससे वर्तमान कीमतों की तुलना की जाती है। सूचकांक में आधार वर्ष का मान हमेशा 100 रखा जाता है।
  • बदलने की आवश्यकता:
    • उपभोग पैटर्न में बदलाव: 2012 में एक औसत भारतीय परिवार जिस तरह खर्च करता था, 2024 में वह बदल चुका है। अब हम डेटा पैक, ऑनलाइन स्ट्रीमिंग (OTT), और हेल्थ सप्लीमेंट्स पर अधिक खर्च करते हैं, जो 2012 की बास्केट में कम प्रभावी थे।
    • सटीक मापन: पुराना आधार वर्ष मुद्रास्फीति की वास्तविक दर को कम या ज्यादा करके दिखा सकता है। नया आधार वर्ष (2024) घरेलू उपभोग व्यय सर्वेक्षण (HCES) 2023-24 के आंकड़ों पर आधारित है।
  • संरचनात्मक सुधार: महामारी के बाद अर्थव्यवस्था की संरचना बदली है, जिसे पकड़ने के लिए यह अपडेट अनिवार्य था।

CPI 2024 श्रृंखला में क्या-क्या बदला?

  • कवरेज विस्तार: अब डेटा 1,465 ग्रामीण बाजारों और 1,395 शहरी बाजारों से एकत्र किया जा रहा है (पहले से काफी अधिक)।
    • वस्तुओं की संख्या में वृद्धि: उपभोग टोकरी (Basket) का विस्तार किया गया है। कुल वस्तुओं की संख्या 299 से बढ़कर 358 हो गई है।
      • वस्तुएं (Goods): 259 से बढ़ाकर 308।
      • सेवाएं (Services): 40 से बढ़ाकर 50।
    • भार (Weights) में बदलाव: परिवार उपभोग व्यय सर्वेक्षण (HCES 2023-24) के आधार पर वस्तुओं के भार को पुन: निर्धारित किया गया है:
    • खाद्य और पेय पदार्थ: इनका भार 45.86% से घटकर 36.75% रह गया है। यह दर्शाता है कि भारतीय परिवारों का खर्च अब भोजन की तुलना में अन्य सेवाओं पर बढ़ रहा है।
    • आवास (Housing): इसमें अब पानी, बिजली और गैस जैसे उपयोगिताओं को शामिल किया गया है, जिससे इसका भार 10.07% से बढ़कर 17.67% हो गया है।
    • आधुनिक वस्तुओं का समावेश: डिजिटल अर्थव्यवस्था को ध्यान में रखते हुए OTT सब्सक्रिप्शन, ऑनलाइन मीडिया सेवाएं, पेन ड्राइव, एक्सरसाइज उपकरण और बेबीसिटर सेवाओं जैसे आधुनिक खर्चों को जोड़ा गया है।
    • नई श्रेणियां: सूचकांक को अब 6 के बजाय 12 डिवीजनों में विभाजित किया गया है, जो संयुक्त राष्ट्र के COICOP 2018 (Classification of Individual Consumption According to Purpose) ढांचे के अनुरूप है। 

आधुनिक तकनीक

    • CAPI (Computer Assisted Personal Interviewing): अब डेटा का संग्रह हस्तशिल्प उपकरणों (handheld devices) के माध्यम से इलेक्ट्रॉनिक रूप से किया जा रहा है।
    • ई-कॉमर्स का समावेश: पहली बार 12 बड़े शहरों (25 लाख से अधिक जनसंख्या) में अमेज़न और स्विगी जैसे ऑनलाइन प्लेटफॉर्म से भी मूल्य डेटा लिया जा रहा है।
    • ग्रामीण आवास किराया: ग्रामीण क्षेत्रों में आवास की लागत को बेहतर तरीके से मापने के लिए पहली बार ग्रामीण गृह किराया (Rural House Rent) को शामिल किया गया है।

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