प्लास्टिक कचरे का एल-डोपा दवा में रूपांतरण | Conversion of plastic waste into L-Dopa medicine

संदर्भ:
यूनिवर्सिटी ऑफ एडिनबर्ग के वैज्ञानिकों ने हाल ही में प्लास्टिक कचरे को पार्किंसंस रोग (Parkinson’s Disease) के इलाज में उपयोग होने वाली महत्वपूर्ण दवा एल-डोपा (L-DOPA) में बदलने की एक अभूतपूर्व तकनीक विकसित की।
रूपांतरण की प्रक्रिया:
- प्लास्टिक प्रकार: शोधकर्ताओं ने PET (Polyethylene Terephthalate) प्लास्टिक, जो आमतौर पर पानी की बोतलों और खाद्य पैकेजिंग में उपयोग होता है, को दवा में बदलने के लिए जेनेटिकली इंजीनियर बैक्टीरिया (E. coli) का उपयोग किया है।
- प्लास्टिक का विखंडन: सबसे पहले, PET प्लास्टिक को उसके मूल रासायनिक घटकों, विशेष रूप से टेरेफ्थालिक एसिड (Terephthalic Acid – TPA) में तोड़ा जाता है।
- बैक्टीरियल रूपांतरण: इसके बाद, इंजीनियर किए गए ई. कोली बैक्टीरिया इन अणुओं को ‘खाकर’ उन्हें एल-डोपा (Levodopa) में बदल देते हैं।
- तकनीकी बाधाओं का समाधान: वैज्ञानिकों ने इस प्रक्रिया को दो अलग-अलग माइक्रोबियल स्ट्रेन (strains) में विभाजित किया ताकि रसायनों के जमाव से प्रक्रिया बाधित न हो, जिससे उत्पादन की दक्षता बढ़ गई।
महत्व:
- बायो-अपसाइकिलिंग (Bio-upcycling): यह केवल रीसाइक्लिंग नहीं है, बल्कि कचरे को उच्च मूल्य वाले उत्पादों (दवाओं) में बदलना है। यह सर्कुलर इकोनॉमी (Circular Economy) के सिद्धांत को पुख्ता करता है।
- सतत विनिर्माण (Sustainable Manufacturing): पारंपरिक रूप से दवाओं का निर्माण जीवाश्म ईंधन (Fossil Fuels) पर निर्भर करता है। यह नई विधि कार्बन उत्सर्जन को कम करने और गैर-नवीकरणीय संसाधनों पर निर्भरता घटाने में मदद करती है।
- प्लास्टिक संकट का समाधान: दुनिया भर में हर साल लगभग 50 मिलियन टन PET कचरा उत्पन्न होता है। यह तकनीक कचरे को ‘संसाधन’ के रूप में देखने का नया नजरिया प्रदान करती है।
दवा का महत्व: एल-डोपा (L-DOPA)
एल-डोपा पार्किंसंस रोग के लिए ‘गोल्ड स्टैंडर्ड’ दवा मानी जाती है। यह मस्तिष्क में डोपामाइन के स्तर को बढ़ाने में मदद करती है, जिससे रोगियों में कंपकंपी (tremors) और मांसपेशियों की अकड़न जैसे लक्षणों में सुधार होता है।
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पार्किंसंस रोग (Parkinson’s Disease):
प्रमुख लक्षण:
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