डॉल्फिन फ्रेंड्स नेटवर्क | Dolphin Friends Network

संदर्भ:
हाल ही में प्रयागराज वन विभाग द्वारा ‘डॉल्फिन फ्रेंड्स’ (Dolphin Friends) स्वयंसेवक नेटवर्क की शुरुआत की गई। जो लुप्तप्राय गंगा डॉल्फिन के संरक्षण के लिए एक महत्वपूर्ण सामुदायिक पहल है।
डॉल्फिन फ्रेंड्स नेटवर्क के बारे में:
- परिचय: डॉल्फिन फ्रेंड्स नेटवर्क गंगा डॉल्फिन (Platanista gangetica) की सुरक्षा और निगरानी के लिए मछुआरों, नाविकों, शोधकर्ताओं और शिक्षकों द्वारा जागरूकता फैलाने वाला एक व्यापक अभियान है।
- उद्देश्य: इस पहल का मुख्य उद्देश्य डॉल्फिन के मूवमेंट, प्रजनन और आवास की निगरानी करना तथा नदी पर निर्भर समुदायों के बीच जागरूकता फैलाना है।
- प्रमुख हितधारक: ‘डॉल्फिन फ्रेंड्स’ में स्थानीय मछुआरों और नाविकों को प्राथमिकता दी गई है क्योंकि वे नदी के व्यवहार और डॉल्फिन के आवास क्षेत्रों से गहराई से परिचित होते हैं।
संरक्षण का ‘प्रयागराज मॉडल’:
- सक्रिय भागीदारी (Participatory Conservation): पारंपरिक संरक्षण विधियों के विपरीत, इसमें स्थानीय समुदायों को ‘हितधारक’ (Stakeholders) बनाया गया है। नाविकों की “नदी पढ़ने” की क्षमता का उपयोग वैज्ञानिक डेटा एकत्र करने के लिए किया जा रहा है।
- मौसमी निगरानी (Seasonal Monitoring): मानसून के दौरान डॉल्फिन का प्रजनन काल होता है, इस समय निगरानी को और अधिक तीव्र कर दिया जाता है।
- हॉटस्पॉट की पहचान: प्रयागराज में विशेष रूप से फाफामऊ, छतनाग और मेजा के रिवर बेंड्स (नदी के मोड़) को डॉल्फिन के प्रमुख आवास के रूप में पहचाना गया है।
- पारिस्थितिकी तंत्र का सूचक (Ecological Indicator): प्रयागराज-फतेहपुर क्षेत्र में डॉल्फिन की बढ़ती संख्या (हालिया रिपोर्टों के अनुसार लगभग 139) नदी की जल गुणवत्ता और स्वस्थ जलीय पारिस्थितिकी तंत्र का संकेत देती है।
गंगा डॉल्फिन के बारे में:
- परिचय: गंगा डॉल्फिन, जिसे ‘टाइगर ऑफ गंगा’ और स्थानीय रूप से ‘सुसू’ कहा जाता है, भारत का राष्ट्रीय जलीय जीव (2009 घोषित) है। यह मीठे पानी में रहने वाली एक दुर्लभ और नेत्रहीन प्रजाति है जो शिकार के लिए इकोलोकेशन (पराध्वनि तरंगों) का उपयोग करती है।
- वैज्ञानिक नाम: प्लैटनिस्टा गैंगेटिका गैंगेटिका। यह केवल गंगा-ब्रह्मपुत्र-मेघना नदी तंत्र (भारत, नेपाल, बांग्लादेश) में पाई जाती है।
- संरक्षण स्थिति: यह IUCN की रेड लिस्ट में ‘Endangered’ (लुप्तप्राय) और भारतीय वन्यजीव संरक्षण अधिनियम 1972 की अनुसूची-I में शामिल है।
- महत्व: यह नदी के पारिस्थितिकी तंत्र के स्वास्थ्य की सूचक प्रजाति है।
- जनगणना: हालिया आंकड़ों (2025) के अनुसार भारत में इनकी संख्या लगभग 6,327 है, जिसमें सर्वाधिक आबादी उत्तर प्रदेश में दर्ज की गई है।
- संरक्षण प्रयास: बिहार का विक्रमशिला गंगा डॉल्फिन अभयारण्य इनका प्रमुख संरक्षित क्षेत्र है। इनके संरक्षण के लिए सरकार ने प्रोजेक्ट डॉल्फिन शुरू किया है। यह पहल ‘नमामि गंगे’ कार्यक्रम के तहत प्रोजेक्ट डॉल्फिन के उद्देश्यों के साथ जुड़ी हुई है।