e-VSP Portal का शुभारंभ: जानिए पोर्टल की खासियत
संदर्भ:
हाल ही में केंद्रीय विधि एवं न्याय राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) श्री अर्जुन राम मेघवाल ने नई दिल्ली के कर्तव्य भवन-2 में विधि साहित्य प्रकाशन (VSP) के अभिनव e-VSP पोर्टल (e-VSP Portal) का आधिकारिक शुभारंभ किया।
e-VSP पोर्टल (e-VSP Portal) के बारे में:
- परिचय: यह मंच विधि साहित्य प्रकाशन (VSP) द्वारा प्रकाशित प्रामाणिक विधिक साहित्य, पत्रिकाओं और न्यायिक निर्णयों को डिजिटल रूप प्रदान करने वाली एक आधिकारिक वेब-आधारित प्रणाली है।
- इस पोर्टल का आधिकारिक डोमेन लिंक www.vsp.gov.in है।
- इसके माध्यम से देश में विधिक ज्ञान के लोकतंत्रीकरण की प्रक्रिया को सशक्त किया जा रहा है।
- उद्देश्य: भारतीय न्यायपालिका और कानून के क्षेत्र में सरल, सुगम और नागरिक-अनुकूल हिंदी भाषा के प्रयोग को बढ़ावा देना।
- देश की कानूनी प्रणाली को अधिक पारदर्शी, समावेशी और आधुनिक तकनीकी युग के अनुकूल बनाना।
- मंत्रालय: यह डिजिटल पहल विधि एवं न्याय मंत्रालय (Ministry of Law and Justice) के विधायी विभाग (Legislative Department) के अंतर्गत आने वाले विधि साहित्य प्रकाशन (VSP) की है।
- इस पोर्टल की तकनीकी रूपरेखा, होस्टिंग और डेटा सुरक्षा का निर्माण राष्ट्रीय सूचना विज्ञान केंद्र (NIC) के सहयोग से किया गया है।
e-VSP पोर्टल की प्रमुख विशेषताएं:
- एकल डिजिटल प्लेटफॉर्म (Single Digital Platform): यह पोर्टल कानून के शोधकर्ताओं, शिक्षकों और वकीलों को विधिक सामग्री को आसानी से खोजने और डाउनलोड करने की एकीकृत सुविधा देता है।
- व्यापक विधिक डेटाबेस: इसमें भारत के माननीय सर्वोच्च न्यायालय (Supreme Court) और विभिन्न उच्च न्यायालयों (High Courts) के महत्वपूर्ण और ऐतिहासिक निर्णयों का प्रामाणिक हिंदी अनुवाद संग्रहीत है।
- विधिक पत्रिकाओं का अभिलेखागार: विधि साहित्य प्रकाशन द्वारा नियमित रूप से प्रकाशित होने वाली कानूनी किताबें, संदर्भ सामग्री और कानून जर्नल अब डिजिटल प्रारूप में चौबीसों घंटे सुलभ हैं।
- सरल उपयोगकर्ता इंटरफ़ेस: पोर्टल को इस प्रकार डिज़ाइन किया गया है कि इसका उपयोग करना (User-friendly UX) अत्यंत सरल और सुगम है।
महत्व:
- डिजिटल इंडिया विज़न का सुदृढ़ीकरण: यह कदम माननीय प्रधानमंत्री के डिजिटल इंडिया (Digital India) अभियान के लक्ष्यों को कानूनी क्षेत्र में क्रियान्वित करता है।
- वैश्विक और स्थानीय विधिक पहुंच: देश की नई पीढ़ी के पाठकों को हिंदी कानूनी सामग्री से जोड़ने के साथ-साथ विदेशों में भी भारतीय कानूनी सिद्धांतों की पहुंच को आसान बनाया गया है।
- संवैधानिक मूल्यों का संरक्षण: यह कानूनी साहित्य केवल संहिताओं का संग्रह नहीं है, बल्कि यह देश की संवैधानिक भावना और समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को भी रेखांकित करता है।
डिजिटल न्यायिक प्रणाली संबंधी अन्य पहलें:
- ई-कोर्ट्स मिशन मोड परियोजना (e-Courts Mission Mode Project): यह राष्ट्रीय ई-गवर्नेंस योजना (NeGP) के तहत न्याय विभाग द्वारा संचालित एक प्रमुख परियोजना है।
- ई-कोर्ट्स चरण III (2023-2027), इसका उद्देश्य अदालतों को पूरी तरह से कागजरहित (Paperless Courts) बनाना, पुराने रिकॉर्ड का डिजिटलीकरण करना और क्लाउड-आधारित डेटा रिपोजिटरी स्थापित करना है।
- वर्चुअल कोर्ट (Virtual Courts), यातायात चालान जैसे छोटे अपराधों के निपटारे के लिए आभासी अदालतों की स्थापना की गई है, जिससे अदालतों में शारीरिक उपस्थिति की आवश्यकता कम हुई है।
- इंटरऑपरेबल क्रिमिनल जस्टिस सिस्टम (ICJS): यह गृह मंत्रालय और कानून मंत्रालय की एक संयुक्त राष्ट्रीय ई-गवर्नेंस पहल है, जो आपराधिक न्याय प्रणाली के स्तंभों को एकीकृत करती है।
- यह पुलिस (CCTNS), अदालतों (e-Courts), जेलों (e-Prisons), अभियोजन (e-Prosecution) और फोरेंसिक प्रयोगशालाओं (e-Forensics) के बीच वास्तविक समय में डेटा साझाकरण सुनिश्चित करता है।
- भारत सरकार ने इसके तहत वर्ष 2027 तक संपूर्ण आपराधिक न्याय प्रणाली को पूर्णतः डिजिटल करने का महत्वाकांक्षी लक्ष्य रखा है।
- एआई-संचालित न्यायिक उपकरण (AI-Driven Judicial Tools): उच्चतम न्यायालय ने न्याय वितरण की गति बढ़ाने के लिए कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) का समावेश किया है:
- ‘वन केस वन डेटा’ (OCOD), यह प्रणाली निचली अदालतों से लेकर सर्वोच्च न्यायालय तक किसी मामले का एकल डिजिटल ट्रायल (Single Digital Trail) तैयार करने में सक्षम है।
- सु-सहायक (Su-Sahayak) और सुपेस (SUPACE), ‘सु-सहायक’ एक एआई-संचालित चैटबॉट है जो नागरिकों को केस स्टेटस और निर्णयों तक पहुंच प्रदान करता है, जबकि ‘सुपेस’ न्यायाधीशों को कानूनी तथ्यों के प्रसंस्करण में सहायता करता है।
- भाषिणी (Bhashini AI), इस एआई टूल का उपयोग अदालती दस्तावेजों और एफआईआर (FIR) का 22 आधिकारिक भारतीय भाषाओं में त्वरित अनुवाद करने के लिए किया जा रहा है।
- जजमेंट सर्च पोर्टल (Judgment Search Portal): यह आम जनता और वकीलों को सर्वोच्च न्यायालय तथा उच्च न्यायालयों के करोड़ों ऐतिहासिक निर्णयों को निःशुल्क खोजने की सुविधा देता है।
- एन-स्टेप (NSTEP): समन और नोटिसों की त्वरित और पारदर्शी तामीली के लिए जीपीएस-सक्षम मोबाइल ऐप आधारित प्रणाली का उपयोग किया जा रहा हैं।
FAQs:
Q.1. e-VSP पोर्टल क्या है?
Ans: यह विधि साहित्य प्रकाशन (VSP) का एक आधिकारिक डिजिटल मंच है, जो विधिक साहित्य और न्यायालयों के निर्णयों को ऑनलाइन हिंदी प्रारूप में उपलब्ध कराता है।
Q.2. e-VSP पोर्टल किसने लॉन्च किया?
Ans: इस अत्याधुनिक डिजिटल पोर्टल का शुभारंभ 15 जुलाई 2026 को केंद्रीय विधि एवं न्याय मंत्री श्री अर्जुन राम मेघवाल द्वारा नई दिल्ली में किया गया।
Q.3. इस पोर्टल पर कौन-कौन सी सेवाएं उपलब्ध हैं?
Ans: पोर्टल पर उच्चतम और उच्च न्यायालयों के महत्वपूर्ण निर्णय, कानूनी संदर्भ पुस्तकें, कानून जर्नल और विभिन्न प्रामाणिक कानूनी साहित्य पढ़ने व डाउनलोड करने की सेवाएं उपलब्ध हैं।
Q.4. क्या इससे वोटर आईडी से जुड़े काम ऑनलाइन किए जा सकते हैं?
Ans: नहीं, यह विधिक साहित्य प्रकाशन (VSP) का पोर्टल है। वोटर आईडी के लिए भारत निर्वाचन आयोग (ECI) का आधिकारिक मतदाता सेवा पोर्टल उपयोग किया जाता है।
Q.5. e-VSP पोर्टल का उपयोग कैसे करें?
Ans: कोई भी नागरिक, अधिवक्ता या छात्र इसकी आधिकारिक वेबसाइट www.vsp.gov.in पर जाकर बिना किसी बाधा के कानूनी सामग्री सर्च और डाउनलोड कर सकता है।
