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Election Commission के अधिकारों पर सुप्रीम कोर्ट का स्पष्टीकरण 

Election Commission के अधिकारों पर सुप्रीम कोर्ट का स्पष्टीकरण 

Election Commission

संदर्भ:

हाल ही में, सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने स्पष्ट किया है कि भारत निर्वाचन आयोग (Election Commission of India) को किसी भी व्यक्ति की नागरिकता तय करने का कोई अधिकार नहीं है। 

Election Commission पर सुप्रीम कोर्ट के हालिया स्पष्टीकरण: 

  • पृष्ठभूमि: सुप्रीम कोर्ट (SC) की पीठ, जिसमें मुख्य न्यायाधीश और अन्य न्यायाधीश शामिल थे, ने पश्चिम बंगाल और बिहार में चुनाव आयोग (Election Commission) द्वारा किए गए ‘विशेष गहन पुनरीक्षण’ Special Intensive Revision – SIR अभ्यास से जुड़ी याचिकाओं पर यह स्पष्टीकरण दिया है।
  • स्पष्ट वक्तव्य:
    • नागरिकता निर्धारण क्षेत्र से बाहर: अदालत ने स्पष्ट रूप से कहा कि भारत निर्वाचन आयोग (ECI) संविधान के अनुच्छेद 9, 10, 11 और 12 के तहत नागरिकता अधिकारों (Voting Rights) से संबंधित मामलों में कोई संवैधानिक प्राधिकरण नहीं है। 
    • वोटर लिस्ट से नाम हटने का अर्थ नागरिकता की समाप्ति नहीं: कोर्ट ने स्पष्ट किया कि यदि विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) प्रक्रिया के दौरान किसी का नाम मतदाता सूची (Electoral Rolls) से हटा दिया जाता है, तो इसका मतलब यह नहीं है कि उसकी भारतीय नागरिकता समाप्त हो गई है।
    • कल्याणकारी योजनाओं के लाभ जारी रहेंगे: अदालत ने कहा कि वोटर लिस्ट से नाम हटने के आधार पर किसी भी व्यक्ति को राशन जैसी सामाजिक कल्याण योजनाओं (Welfare Schemes) या अन्य नागरिक सुविधाओं से वंचित नहीं किया जा सकता। 
  • सीमाएं:
  • सीमित प्रशासनिक जांच (Limited Enquiry): चुनाव आयोग को मतदाता पंजीकरण की पात्रता सुनिश्चित करने के लिए नागरिकता की केवल एक ‘सीमित प्रशासनिक जांच’ करने का अधिकार है। यह जांच केवल चुनाव प्रक्रिया में भागीदारी तक ही सीमित है।
  • मामले को अग्रेषित करने का कर्तव्य (Duty to Refer): यदि आयोग किसी व्यक्ति की नागरिकता की शर्तों से संतुष्ट नहीं है, तो उसका कर्तव्य है कि वह उस मामले को अंतिम निर्णय के लिए ‘नागरिकता अधिनियम, 1955’ (Citizenship Act, 1955) के तहत केंद्र सरकार के सक्षम प्राधिकारी के पास भेजे।
  • निर्णय की अंतिमता नहीं: चुनाव आयोग द्वारा मतदाता सूची के शुद्धीकरण के उद्देश्य से लिया गया निर्णय नागरिकता के प्रश्न पर कभी भी अंतिम नहीं माना जा सकता। 

चुनाव आयोग और आयोग की शक्तियां एवं अधिकार (Powers & Authority of the Election Commission):

  • परिचय: भारत निर्वाचन आयोग (Election Commission of India – ECI) एक स्वायत्त और स्वतंत्र संवैधानिक निकाय है, जिसे भारतीय संविधान के अनुच्छेद 324 के तहत देश में स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव कराने की जिम्मेदारी सौंपी गई है।
    • आयोग का मुख्य कार्य लोकसभा, राज्यसभा, राज्य विधानसभाओं, राष्ट्रपति और उपराष्ट्रपति के पदों के चुनावों का संचालन, निर्देशन और नियंत्रण करना है। 
  • शक्तियां: चुनाव आयोग की शक्तियों और अधिकारों को मुख्य रूप से तीन श्रेणियों में विभाजित किया जा सकता है:
    • 1. प्रशासनिक शक्तियाँ (Administrative Powers)
  • चुनाव कार्यक्रम तय करना: चुनाव की तारीखों, नामांकन दाखिल करने, मतदान और मतगणना के पूरे कार्यक्रम की घोषणा करना। 
  • मतदाता सूची तैयार करना: योग्य मतदाताओं का पंजीकरण करना, चुनावी रोल (Electoral Rolls) तैयार करना और उन्हें समय-समय पर अपडेट करना। 
  • आदर्श आचार संहिता (MCC) लागू करना: चुनाव घोषणा के बाद राजनीतिक दलों और उम्मीदवारों के लिए नियम तय करना ताकि सत्ता का दुरुपयोग न हो। 
  • प्रशासनिक मशीनरी पर नियंत्रण: चुनाव के दौरान देश की पूरी प्रशासनिक और सुरक्षा मशीनरी चुनाव आयोग के अधीन आ जाती है। आयोग अधिकारियों के तबादले और पदस्थापन के आदेश दे सकता है।
  • चुनाव चिन्ह आवंटित करना: राजनीतिक दलों को मान्यता देना और उन्हें आधिकारिक चुनाव चिन्ह प्रदान करना।
  • नामांकन पत्रों की जांच: उम्मीदवारों द्वारा दाखिल किए गए नामांकन पत्रों (Nomination Papers) की बारीकी से जांच करना और उन्हें स्वीकृत या अस्वीकृत करना।
  • 2. सलाहकार शक्तियाँ (Advisory Powers)
    • सांसदों की अयोग्यता: संसद सदस्यों (MPs) की चुनाव के बाद अयोग्यता से जुड़े मामलों पर राष्ट्रपति को सलाह देना। 
  • विधायकों की अयोग्यता: राज्य विधानमंडल के सदस्यों (MLAs) की अयोग्यता के संबंध में संबंधित राज्य के राज्यपाल को परामर्श देना। 
  • राष्ट्रपति शासन के दौरान चुनाव: किसी राज्य में राष्ट्रपति शासन के दौरान चुनाव कराए जा सकते हैं या नहीं, इस पर राष्ट्रपति को सुझाव देना। 
  • 3. अर्ध-न्यायिक शक्तियाँ (Quasi-Judicial Powers)
  • पार्टी विवादों का निपटारा: राजनीतिक दलों के विभाजन या विलय के समय उनके चुनाव चिन्ह और नाम के मालिकाना हक से जुड़े विवादों पर फैसला सुनाना।
  • उम्मीदवारों को अयोग्य घोषित करना: निर्धारित समय के भीतर चुनाव खर्च का ब्योरा न देने वाले या भ्रष्ट आचरण में लिप्त उम्मीदवारों को चुनाव लड़ने से अयोग्य ठहराना।
  • चुनाव रद्द करना: मतदान के दौरान धांधली, बूथ कैप्चरिंग या हिंसा होने पर किसी विशेष पोलिंग बूथ या पूरे निर्वाचन क्षेत्र का चुनाव रद्द करने का अधिकार।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

प्र.1 सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग के अधिकारों पर क्या कहा?

उ. कोर्ट ने कहा कि चुनाव आयोग का अधिकार केवल वोटर लिस्ट के नियंत्रण तक सीमित है, उसे किसी की नागरिकता तय करने की शक्ति नहीं है।

प्र.2 यह फैसला क्यों महत्वपूर्ण है?

उ. यह शक्तियों के पृथक्करण को मजबूत करता है और यह सुनिश्चित करता है कि वोटर लिस्ट से नाम हटने पर भी नागरिकता स्वतः समाप्त नहीं होगी।

प्र.3 चुनाव आयोग के संवैधानिक अधिकार क्या हैं?

उ. संविधान के अनुच्छेद 324 के तहत आयोग को चुनावों का अधीक्षण, निर्देशन, नियंत्रण तथा मतदाता सूचियों को तैयार करने का पूर्ण अधिकार है। 

प्र.4 क्या इस फैसले से चुनाव प्रक्रिया प्रभावित होगी?

उ. नहीं, मतदाता सूची के शुद्धीकरण और पुनरीक्षण के संबंध में चुनाव आयोग के प्रशासनिक अधिकार पूरी तरह से पहले की तरह ही सुरक्षित बने रहेंगे।

प्र.5 इस मामले की सुनवाई किस संदर्भ में हुई?

उ. यह सुनवाई चुनाव आयोग द्वारा राज्यों में चलाई गई ‘विशेष गहन पुनरीक्षण’ (SIR) Election News प्रक्रिया के खिलाफ दायर जनहित याचिकाओं के संदर्भ में की गई थी। को वैश्विक वाणिज्यिक अंतरिक्ष बाजार में एक अग्रणी शक्ति के रूप में स्थापित करेगा।

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