Apni Pathshala

NAMASTE योजना के तहत अपशिष्ट-चयनकर्ताओं का गणना (Enumeration of waste pickers under NAMASTE scheme) | UPSC Preparation

Enumeration of waste pickers under NAMASTE scheme

Enumeration of waste pickers under NAMASTE scheme

संदर्भ:

हाल ही में संसद में भारत में कचरा बीनने वालों (Waste Pickers) की सामाजिक और जातिगत संरचना पर प्रकाश डाला गया। जिसमें सरकार ने नमस्ते (NAMASTE) योजना के तहत किए गए प्रगणन के नवीनतम आंकड़े प्रस्तुत किए।

नमस्ते (NAMASTE) योजना के तहत किए गए प्रगणन के मुख्य निष्कर्ष:

  • जातिगत संरचना: संसद में साझा किए गए आंकड़ों के अनुसार, कुल प्रोफाइल किए गए 1.52 लाख कचरा बीनने वालों में से 84.5% हाशिए पर रहने वाले समुदायों से हैं:
    • अनुसूचित जाति (SC): 60.3% (92,028 श्रमिक) – यह समूह इस कार्यबल का सबसे बड़ा हिस्सा है।
    • अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC): 13.7% (20,950 श्रमिक)।
    • अनुसूचित जनजाति (ST): 10.5% (16,047 श्रमिक)।
  • सामान्य श्रेणी: केवल 10.7%
  • लैंगिक वितरण: आंकड़ों से पता चलता है कि इस क्षेत्र में महिलाओं की भागीदारी अत्यंत महत्वपूर्ण है। कुल प्रगणित श्रमिकों में से लगभग 48.7% महिलाएँ (74,427) हैं।
  • क्षेत्रीय विसंगतियाँ: रिपोर्ट में एक दिलचस्प तथ्य सामने आया है कि दिल्ली और गोवा जैसे राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों में, सामान्य श्रेणी के कचरा बीनने वालों की संख्या SC/ST/OBC श्रेणियों की तुलना में अधिक है, जो राष्ट्रीय औसत के विपरीत है।

नमस्ते (NAMASTE) योजना क्या हैं?

    • पूरा नाम: नमस्ते (NAMASTE) योजना का पूरा नाम National Action for Mechanised Sanitation Ecosystem है। 
    • उद्देश्य: इसका मुख्य उद्देश्य भारत में स्वच्छता कार्य (जैसे सीवर सफाई और कचरा बीनना) को मशीनीकृत बनाना, मानवीय संपर्क को समाप्त करना और इन श्रमिकों को वैकल्पिक आजीविका एवं सामाजिक सुरक्षा (जैसे स्वास्थ्य बीमा और ऋण) प्रदान करके गरिमापूर्ण जीवन सुनिश्चित करना है।
    • शुरुआत: इसे मूल रूप से जुलाई 2023 में सीवर और सेप्टिक टैंक श्रमिकों (SSWs) के लिए शुरू की गई थी। जून 2024 में, केंद्र सरकार ने इसके दायरे का विस्तार करते हुए इसमें कचरा बीनने वालों को एक स्वतंत्र घटक के रूप में शामिल किया।
    • नोडल मंत्रालय: सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय (MoSJE) और आवास और शहरी मामलों के मंत्रालय (MoHUA) की संयुक्त पहल।
    • कार्यान्वयन एजेंसी: नेशनल सफाई कर्मचारी फाइनेंस एंड डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन (NSKFDC)।
  • प्रगणन प्रक्रिया:  कचरा बीनने वालों की पहचान और डेटा संग्रह के लिए सरकार ने आधुनिक तकनीकी दृष्टिकोण अपनाया है:
    • वेस्ट पिकर एन्यूमरेशन ऐप (Waste Picker Enumeration App): इसे 5 जून 2025 (विश्व पर्यावरण दिवस) को लॉन्च किया गया। इसका उद्देश्य देश भर में लगभग 2.5 लाख कचरा बीनने वालों का डिजिटल प्रोफाइल तैयार करना है।
    • प्रमाणीकरण (Validation): इसके बाद इन डिजिटल प्रोफाइल को प्रमाणीकृत किया जाता है। प्रमाणीकरण का मुख्य कार्य शहरी स्थानीय निकायों (ULBs) द्वारा किया जाता है।
    • पहचान: प्रगणन के बाद, प्रत्येक श्रमिक को एक डिजिटल व्यावसायिक फोटो आईडी कार्ड दिया जाता है, जो उन्हें औपचारिक रूप से ‘स्वच्छता दूत’ के रूप में मान्यता देता है।
  • प्रगणन के लाभ: एक बार प्रगणित होने के बाद, इन श्रमिकों को निम्नलिखित लाभ मिलते हैं:
    • स्वास्थ्य सुरक्षा: आयुष्मान भारत (PM-JAY) के तहत ₹5 लाख तक का स्वास्थ्य बीमा कवर।
    • सुरक्षा किट: व्यक्तिगत सुरक्षा उपकरण (PPE) और मौसमी किट का वितरण।
    • वित्तीय सशक्तिकरण: कचरा संग्रहण वाहनों की खरीद के लिए पूंजीगत सब्सिडी और 750 ड्राई वेस्ट कलेक्शन सेंटर (DWCC) के प्रबंधन के लिए समूहों (Collectives) का गठन।
    • कौशल विकास: व्यावसायिक सुरक्षा और अपशिष्ट प्रबंधन में प्रशिक्षण।

Share Now ➤

क्या आपको Apni Pathshala के Courses, RNA PDF, Current Affairs, Test Series और Books से सम्बंधित कोई जानकारी चाहिए? तो हमारी विशेषज्ञ काउंसलर टीम आपकी सिर्फ समस्याओं के समाधान में ही मदद नहीं करेगीं, बल्कि आपको व्यक्तिगत अध्ययन योजना बनाने, समय का प्रबंधन करने और परीक्षा के तनाव को कम करने में भी मार्गदर्शन देगी।

Apni Pathshala के साथ अपनी तैयारी को मजबूत बनाएं और अपने सपनों को साकार करें। आज ही हमारी विशेषज्ञ टीम से संपर्क करें और अपनी सफलता की यात्रा शुरू करें

📞 +91 7878158882

Related Posts

Scroll to Top