फ्लोरोमेट्रिक तकनीक | fluorometric technique

संदर्भ:
हाल ही में मोहाली स्थित नैनो विज्ञान और प्रौद्योगिकी संस्थान (INST) के शोधकर्ताओं ने निकोटीन और उसके मेटाबोलाइट ‘कोटिनिन’ के स्तर का सटीक और त्वरित पता लगाने के लिए एक उन्नत फ्लोरोमेट्रिक तकनीक (Fluorometric Technique) विकसित की है।
फ्लोरोमेट्रिक तकनीक के बारे में:
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परिचय: फ्लोरोमेट्रिक तकनीक (Fluorometric Technique) एक अत्यंत संवेदनशील और आधुनिक विश्लेषणात्मक विधि है, जिसका उपयोग अणुओं द्वारा उत्सर्जित ‘प्रतिदीप्ति’ को मापकर उनकी पहचान और मात्रा निर्धारित करने के लिए किया जाता है।
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मूल सिद्धांत: कुछ विशिष्ट पदार्थ (जिन्हें ‘फ्लोरोफोर’ कहा जाता है) जब एक निश्चित तरंगदैर्ध्य वाले प्रकाश (अक्सर पराबैंगनी या दृश्य प्रकाश) को अवशोषित करते हैं, तो उनके इलेक्ट्रॉन उत्तेजित होकर उच्च ऊर्जा स्तर पर चले जाते हैं।
प्रमुख उपकरण:
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प्रकाश स्रोत: आमतौर पर ज़ेनॉन आर्क लैंप या पारा वाष्प लैंप का उपयोग किया जाता है।
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फिल्टर/मोनोक्रोमेटर: ये प्रकाश की विशिष्ट तरंगदैर्ध्य को चुनने में मदद करते हैं ताकि नमूना सही ढंग से उत्तेजित हो सके।
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सैंपल सेल (Cuvette): वह स्थान जहाँ तरल नमूना रखा जाता है।
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डिटेक्टर: अक्सर ‘फोटोमल्टीप्लायर ट्यूब’ (PMT) का उपयोग किया जाता है, जो उत्सर्जित प्रकाश की बहुत कम तीव्रता को भी पकड़ लेता है।
तकनीक की मुख्य विशेषताएं:
- नवाचार: वैज्ञानिकों ने सॉल्वोथर्मल प्रक्रिया द्वारा आयरन-आधारित सूक्ष्म, स्पंज जैसी संरचना (Nanospheres) विकसित की है, जो निकोटीन अणुओं को ट्रैप करती है।
- फ्लोरोमेट्रिक “टर्न-ऑन” सेंसर: यह सामग्री सामान्य स्थिति में बहुत कम प्रकाश उत्सर्जित करती है, लेकिन निकोटीन या कोटिनिन के संपर्क में आने पर, यह तेज नीली चमक (Blue Fluorescence) के साथ सक्रिय हो जाती है।
- उच्च सटीकता: यह तकनीक बहुत कम मात्रा (Low concentration) में भी निकोटीन/कोटिनिन की पहचान कर सकती है।
- पुन: प्रयोज्य (Reusable): सेंसर को कई बार इस्तेमाल किया जा सकता है, जिससे यह किफायती बनता है।
- जैव-अनुकूलता (Biocompatibility): चूँकि यह लोहे (Iron) से बना है, यह जीवित कोशिकाओं (Living Cells) के लिए सुरक्षित है और वास्तविक समय में कोशिकीय निगरानी के लिए उपयुक्त है।
अनुप्रयोग:
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फार्मास्युटिकल उद्योग: दवाओं की शुद्धता की जांच और विटामिन, स्टेरॉयड तथा एंटीबायोटिक्स की सांद्रता मापने के लिए।
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जैविक अनुसंधान: DNA/RNA की मात्रा निर्धारित करने और प्रोटीन इंटरैक्शन के अध्ययन के लिए।
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पर्यावरण निगरानी: पानी में धातुओं (जैसे पारा) और प्रदूषकों की सूक्ष्म मात्रा का पता लगाने के लिए।
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परीक्षण किट का विकास: इस तकनीक का उपयोग भविष्य में कम लागत वाली सरल तंबाकू परीक्षण किट (Screening kits) विकसित करने के लिए किया जा सकता है।
- परोक्ष धूम्रपान (Second-hand smoke) की निगरानी: यह उन लोगों के लिए भी सहायक है जो धूम्रपान नहीं करते लेकिन धुएं के संपर्क में आते हैं।
- नैदानिक नैदानिक उपयोग: डॉक्टर इसे मरीजों में निकोटीन के स्तर की जांच के लिए उपयोग कर सकते हैं, जिससे तंबाकू चयापचय (Metabolism) और व्यसन पर शोध में मदद मिलेगी।
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निकोटीन-कोटिनिन का महत्व: निकोटीन अत्यधिक व्यसनी है, और कोटिनिन रक्त, लार और मूत्र में मौजूद एक स्थिर बायोमार्कर है जो तंबाकू के सेवन के बाद शरीर में लंबे समय तक रहता है। इस स्तर का सटीक पता लगाना सार्वजनिक स्वास्थ्य जांच (Public health screening) और धूम्रपान के प्रभाव की निगरानी के लिए अत्यंत आवश्यक है। |