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शारदा रिवर कॉरिडोर के पुनर्विकास कार्यों का शिलान्यास (Foundation stone laid for redevelopment works of Sharda River Corridor) | UPSC

Foundation stone laid for redevelopment works of Sharda River Corridor

Foundation stone laid for redevelopment works of Sharda River Corridor

संदर्भ:

हाल ही में उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने चंपावत जिले के टनकपुर में शारदा रिवर कॉरिडोर (Sharda River Corridor) के पुनर्विकास कार्यों का शिलान्यास किया।

शारदा रिवर कॉरिडोर परियोजना:

  • क्षेत्रफल: यह कॉरिडोर लगभग 200 वर्ग किलोमीटर के क्षेत्र को कवर करेगा, जो बनबसा से लेकर माता रणकोची तक फैला होगा। इस महात्वाकांक्षी परियोजना की कुल अनुमानित लागत लगभग ₹3,300 करोड़ है।
  • शारदा घाट पुनर्विकास: टनकपुर स्थित शारदा घाट को अंतरराष्ट्रीय स्तर की सुविधाओं से लैस किया जाएगा। इसमें सुरक्षित स्नान घाट, शौचालय, और विश्राम गृह शामिल हैं।
  • अत्याधुनिक आरती स्थल: यहाँ एक विशेष आरती स्थल बनाया जाएगा जिसमें ‘रेनवाटर हार्वेस्टिंग’ और ‘फ्लोर कूलिंग सिस्टम’ जैसी आधुनिक तकनीक का उपयोग होगा।
  • किरोड़ा नाला पारिस्थितिक कॉरिडोर: ₹109.57 करोड़ की लागत से जैव विविधता संरक्षण और आपदा प्रबंधन (बाढ़ नियंत्रण) के लिए इसे विकसित किया जाएगा।
  • साहसिक पर्यटन: कॉरिडोर के अंतर्गत रिवर राफ्टिंग, पैराग्लाइडिंग और जंगल सफारी जैसे रोमांचक खेलों को बढ़ावा दिया जाएगा।
  • भारत-नेपाल मैत्री पार्क: सीमावर्ती क्षेत्र में दोनों देशों के बीच सांस्कृतिक संबंधों को प्रगाढ़ करने के लिए एक ‘फ्रेंडशिप पार्क’ का प्रस्ताव है।

शारदा नदी के बारे में:

  • उत्पत्ति: यह नदी हिमालय में पिथौरागढ़ जिले के लिपुलेख दर्रे के पास से निकलती है।
  • सीमा निर्धारण: यह भारत (उत्तराखंड) और नेपाल के बीच प्राकृतिक अंतरराष्ट्रीय सीमा बनाती है।
  • अन्य नाम: ​शारदा नदी को ऊपरी क्षेत्रों में काली या महाकाली नदी के नाम से जाना जाता है।
  • मैदानी प्रवेश: टनकपुर (चंपावत) के पास स्थित ब्रह्मदेव मंडी से यह मैदानी इलाकों में प्रवेश करती है, जहाँ इसे ‘शारदा’ के नाम से जाना जाता है।
  • संगम: आगे चलकर यह उत्तर प्रदेश में घाघरा नदी (गंगा की सहायक नदी) में मिल जाती है।
  • प्रमुख सहायक नदियाँ: इनमें भारतीय पक्ष में धौलीगंगा (पूर्व), गोरीगंगा , सरजू और लाधिया तथा नेपाल में चमेलिया और रामगुन शामिल है।
  • सांस्कृतिक महत्व: इसे विद्या और संस्कार की देवी ‘मां शारदा’ का स्वरूप माना जाता है और यह क्षेत्र पूर्णागिरी शक्तिपीठ के कारण अत्यंत पवित्र माना जाता है।
  • पारिस्थितिक महत्व: यह नदी दुधवा राष्ट्रीय उद्यान से होकर बहती है, जो लुप्तप्राय महसीर मछली और गंगा डॉल्फिन के लिए महत्वपूर्ण पर्यावास है।

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