त्रिशंकु विधानसभा

संदर्भ:
तमिलनाडु विधानसभा चुनाव 2026 के परिणामों ने राज्य के 60 साल के राजनीतिक इतिहास को पूरी तरह बदल दिया है। पहली बार राज्य में ‘त्रिशंकु विधानसभा’ (Hung Assembly) की स्थिति उत्पन्न हुई।
त्रिशंकु विधानसभा किसे कहते हैं?
त्रिशंकु विधानसभा (Hung Assembly) एक ऐसी राजनीतिक स्थिति है जहाँ विधानसभा चुनाव के बाद किसी भी एक राजनीतिक दल या चुनाव-पूर्व गठबंधन (Pre-poll Alliance) को सरकार बनाने के लिए आवश्यक पूर्ण बहुमत (Absolute Majority) प्राप्त नहीं होता है।
- भारतीय संसदीय लोकतंत्र में, सरकार बनाने के लिए सदन की कुल सीटों के आधे से कम से कम एक अधिक सीट (जैसे 234 सीटों वाली तमिलनाडु विधानसभा में 118 सीटें) जीतना अनिवार्य है। जब कोई भी दल इस ‘मैजिक नंबर’ तक नहीं पहुँच पाता, तो सदन ‘त्रिशंकु’ कहलाता है।
त्रिशंकु विधानसभा के मुख्य पहलू:
- राज्यपाल की विवेकाधीन शक्ति (Discretionary Power): संविधान के अनुच्छेद 164 के तहत राज्यपाल मुख्यमंत्री की नियुक्ति करते हैं। सामान्य स्थिति में बहुमत वाले दल के नेता को बुलाया जाता है, लेकिन त्रिशंकु विधानसभा में राज्यपाल अपने विवेक का उपयोग करते हैं कि किसे सरकार बनाने के लिए आमंत्रित किया जाए।
- सरकार गठन की प्राथमिकता (Order of Preference): सरकारिया आयोग (1983) और पुंछी आयोग (2007) के अनुसार, राज्यपाल को निम्नलिखित क्रम में आमंत्रण देना चाहिए:
- चुनाव-पूर्व गठबंधन: वह समूह जिसने चुनाव साथ मिलकर लड़ा हो।
- सबसे बड़ा एकल दल (Single Largest Party): वह दल जिसके पास सर्वाधिक सीटें हों और जो अन्य के समर्थन का दावा करे।
- चुनाव-पश्चात गठबंधन (Post-poll Coalition): चुनाव के बाद बना नया गठबंधन।
- फ्लोर टेस्ट (Floor Test): एस.आर. बोम्मई बनाम भारत संघ (1994) मामले में सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि किसी भी दल के बहुमत का निर्णय राजभवन के बजाय विधानसभा के पटल (Floor) पर होना चाहिए। राज्यपाल मुख्यमंत्री को नियुक्त कर एक निश्चित समय (जैसे 10 से 30 दिन) के भीतर बहुमत साबित करने का निर्देश देते हैं।
प्रमुख उदाहरण:
- कर्नाटक (2018): भाजपा 104 सीटों के साथ सबसे बड़ा दल थी, लेकिन बहुमत (113) से दूर थी। राज्यपाल ने पहले भाजपा को बुलाया, लेकिन फ्लोर टेस्ट से पहले ही मुख्यमंत्री ने इस्तीफा दे दिया। बाद में कांग्रेस-JDS के चुनाव-पश्चात गठबंधन ने सरकार बनाई।
- महाराष्ट्र (2019): किसी भी दल को स्पष्ट बहुमत नहीं मिला। चुनाव-पूर्व गठबंधन (भाजपा-शिवसेना) टूटने के बाद, अंततः शिवसेना, एनसीपी और कांग्रेस ने मिलकर ‘महा विकास अघाड़ी’ सरकार बनाई।
- गोवा और मणिपुर (2017): कांग्रेस सबसे बड़ा दल होने के बावजूद सरकार नहीं बना सकी क्योंकि भाजपा ने छोटे दलों के साथ मिलकर पहले बहुमत का दावा पेश कर दिया और राज्यपाल ने उन्हें आमंत्रित किया।
परिणाम और चुनौतियां:
- अस्थिरता: त्रिशंकु विधानसभा में सरकारें अक्सर गठबंधन के दबाव के कारण अस्थिर होती हैं।
- हॉर्स ट्रेडिंग (Horse Trading): बहुमत जुटाने के लिए विधायकों की खरीद-फरोख्त का खतरा बढ़ जाता है।
- राष्ट्रपति शासन: यदि कोई भी गठबंधन सरकार बनाने में सक्षम नहीं होता, तो राज्यपाल अनुच्छेद 356 के तहत राष्ट्रपति शासन की सिफारिश कर सकते हैं, जिसके बाद पुनः चुनाव (Snap Polls) कराए जाते हैं।