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उत्तर प्रदेश में सारस की आबादी में वृद्धि (Increase in the population of cranes in Uttar Pradesh) | UPSC

Increase in the population of cranes in Uttar Pradesh

Increase in the population of cranes in Uttar Pradesh

संदर्भ:

उत्तर प्रदेश के राज्य पक्षी सारस (Sarus Crane) के संरक्षण की दिशा में एक उत्साहजनक रिपोर्ट सामने आई है। फरवरी 2026 में जारी नवीनतम ‘शीतकालीन गणना’ के अनुसार, राज्य में सारस की आबादी में 3.1% की वृद्धि दर्ज की गई है। अब राज्य में सारसों की कुल संख्या बढ़कर 20,628 हो गई है, जो पिछले वर्ष 19,994 थी।

सारस गणना 2025-26:

  • गणना: उत्तर प्रदेश वन विभाग द्वारा संचालित इस गणना में राज्य के 68 वन प्रभागों को शामिल किया गया था। इस प्रक्रिया में 10,000 से अधिक नागरिकों और स्वयंसेवकों ने हिस्सा लिया।
    • कुल संख्या: राज्य में अब सारस की कुल संख्या 20,628 हो गई है।
    • तुलनात्मक वृद्धि: वर्ष 2023 में यह संख्या 19,196 थी, जो 2024 में बढ़कर 19,994 और अब 20,628 तक पहुँच गई है।
  • शीर्ष जिले (Forest Divisions):
    • इटावा (Etawah): सर्वाधिक 3,304 सारस दर्ज किए गए।
    • मैनपुरी (Mainpuri): 2,899 सारस।
    • अन्य क्षेत्र: औरैया (1,283), शाहजहाँपुर (1,078) और गोरखपुर (950)।

सारस क्रेन (Grus Antigone) का परिचय:

  • वैज्ञानिक नाम: Antigone antigone।
  • विश्व का सबसे ऊँचा उड़ने वाला पक्षी: इसकी ऊँचाई लगभग 1.8 मीटर (5.9 फीट) तक हो सकती है।  
  • विशेषता: यह एक ‘नॉन-माइग्रेटरी’ (गैर-प्रवासी) पक्षी है, जो जीवन भर एक ही साथी के साथ रहता है। इसे वफादारी और वैवाहिक सद्भाव का प्रतीक माना जाता है।  
  • प्राकृतवास (Habitat): मुख्य रूप से उथली नम भूमि (Wetlands), दलदली क्षेत्र और बाढ़ वाले धान के खेत में रहता है।
  • संरक्षण की स्थिति: सारस को अंतरराष्ट्रीय और राष्ट्रीय स्तर पर निम्नलिखित सुरक्षा प्राप्त है:
    • IUCN रेड लिस्ट: सुभेद्य (Vulnerable)।  
    • वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972: अनुसूची-IV (2022 के संशोधन के बाद अनुसूची-II के समतुल्य सुरक्षा)।  
    • CITES: परिशिष्ट-II (Appendix II)।

आबादी में वृद्धि के प्रमुख कारक:

  • आर्द्रभूमि (Wetland) संरक्षण: उत्तर प्रदेश में वर्तमान में 10 रामसर स्थल (Ramsar Sites) हैं। ‘सरसई नावर’ और ‘समन पक्षी अभयारण्य’ जैसे क्षेत्र सारस के प्रजनन के लिए सुरक्षित वातावरण प्रदान करते हैं।
  • ‘सारस मित्र’: वन विभाग ने स्थानीय किसानों को ‘सारस मित्र’ के रूप में प्रशिक्षित किया है। चूँकि सारस अक्सर खेतों में घोंसले बनाते हैं, किसान अब इनके अंडों को कीटनाशकों और कुत्तों से बचाने के लिए सक्रिय भूमिका निभाते हैं।
  • ‘सारस आवास सुरक्षा परियोजना’: वाइल्डलाइफ ट्रस्ट ऑफ इंडिया (WTI) और टाटा ट्रस्ट जैसी संस्थाओं के सहयोग से पूर्वी उत्तर प्रदेश के 10 जिलों में विशेष अभियान चलाए गए हैं, जिससे उस क्षेत्र में भी आबादी पुनर्जीवित हुई है।

चुनौतियां:

  • आवास का विनाश: कृषि विस्तार और शहरीकरण के कारण आर्द्रभूमियों का सूखना।
  • कीटनाशकों का प्रयोग: धान के खेतों में अत्यधिक रासायनिक उर्वरकों और कीटनाशकों का उपयोग इनके स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव डालता है।
  • अवारा कुत्ते व शिकारी: अंडों और चूजों को आवारा कुत्तों और जंगली जानवरों से खतरा रहता है।
  • हाई-वोल्टेज तार: उड़ते समय बिजली के तारों से टकराकर इनकी मृत्यु एक बड़ी समस्या है।

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