भारत और त्रिनिदाद-टोबैगो संबंध

संदर्भ:
भारत और त्रिनिदाद-टोबैगो के बीच प्रगाढ़ होते द्विपक्षीय संबंधों के तहत, विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर की कैरेबियाई देश की यात्रा के दौरान विभिन्न महत्वपूर्ण क्षेत्रों में 8 समझौता ज्ञापनों (MoUs) पर हस्ताक्षर किए गए।
8 प्रमुख समझौतों का विवरण:
- आयुर्वेद का प्रसार: वेस्ट इंडीज विश्वविद्यालय (University of the West Indies) में ‘आयुर्वेद पीठ’ (Ayurvedic Chair) की स्थापना के लिए समझौता हुआ है, जो पारंपरिक भारतीय चिकित्सा को वैश्विक मान्यता दिलाने की दिशा में एक बड़ा कदम है।
- पर्यटन सहयोग: दोनों देशों के बीच पर्यटन प्रवाह को बढ़ाने और इस क्षेत्र में सर्वोत्तम प्रथाओं के आदान-प्रदान के लिए नया समझौता किया गया है।
- स्वास्थ्य और चिकित्सा: स्वास्थ्य सेवा के बुनियादी ढांचे में सुधार और चिकित्सा सहयोग के लिए विशिष्ट MoU पर हस्ताक्षर किए गए।
- सोलर मिशन (नवीकरणीय ऊर्जा): त्रिनिदाद एवं टोबैगो के विदेश मंत्रालय और कैरिकॉम (CARICOM) मामलों के भवन के ‘सोलरलाइजेशन’ (सौर ऊर्जाकरण) के लिए भारत सहायता प्रदान करेगा।
- वेक्टर कंट्रोल (रोग नियंत्रण): मच्छरों और अन्य वाहकों से होने वाली बीमारियों के नियंत्रण में तकनीकी सहयोग के लिए समझौता हुआ है।
- ऐतिहासिक विरासत संरक्षण (नेल्सन द्वीप): नेल्सन द्वीप (Nelson Island), जहाँ प्रारंभिक भारतीय अप्रवासी रुके थे, के बुनियादी ढांचे के उन्नयन और संरक्षण के लिए भारत सहयोग करेगा।
- शिक्षा और डिजिटल सहायता: शिक्षा के क्षेत्र में सहयोग बढ़ाते हुए डिजिटल उपकरणों के वितरण और प्रशिक्षण पर सहमति बनी।
- सांस्कृतिक और अभिलेखीय सहयोग (Archival Cooperation): गिरमिटिया समुदाय की विरासत को सहेजने और भारतीय प्रवासियों को अपनी जड़ों से जोड़ने के लिए अभिलेखीय सहयोग पर समझौता किया गया है।
द्विपक्षीय संबंधों के अन्य महत्वपूर्ण स्तंभ:
- डिजिटल भुगतान (UPI): त्रिनिदाद और टोबैगो भारत के एकीकृत भुगतान इंटरफेस (UPI) को अपनाने वाला पहला कैरेबियाई देश बन गया है।
- कृषि क्षेत्र: भारत ने हाल ही में NAMDEVCO (T&T की कृषि संस्था) को 1 मिलियन डॉलर की कृषि मशीनरी प्रदान की है और बाजरा (Millets) की खेती में तकनीकी सहायता दे रहा है।
- आर्थिक प्रगति: पिछले पांच वर्षों में द्विपक्षीय व्यापार लगभग दोगुना होकर 369 मिलियन अमेरिकी डॉलर (2023-24) तक पहुंच गया है।
रणनीतिक महत्व:
- सॉफ्ट पावर और डायस्पोरा: ‘गिरमिटिया’ इतिहास से जुड़े साझा संबंधों और 1.4 मिलियन की आबादी में लगभग 40% भारतीय मूल के लोगों की उपस्थिति भारत की सांस्कृतिक कूटनीति का आधार है।
- ग्लोबल साउथ का नेतृत्व: भारत-कैरिकॉम (India-CARICOM) साझेदारी के माध्यम से भारत कैरेबियाई क्षेत्र में अपनी उपस्थिति मजबूत कर रहा है, जो संयुक्त राष्ट्र सुधारों जैसे वैश्विक मंचों पर समर्थन हासिल करने के लिए महत्वपूर्ण है।
- विकास साझेदारी: भारत केवल व्यापारिक भागीदार नहीं, बल्कि बुनियादी ढांचे और स्वास्थ्य (जैसे जयपुर फुट कैंप और समुद्री एम्बुलेंस) में सहयोग देकर एक विश्वसनीय ‘विकास भागीदार’ (Development Partner) के रूप में उभरा है।
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