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भारत और UNODA का संयुक्त वार्षिक क्षमता निर्माण कार्यक्रम (India and UNODA joint annual capacity building programme) | UPSC

India and UNODA joint annual capacity building programme

India and UNODA joint annual capacity building programme

संदर्भ:

भारत और संयुक्त राष्ट्र निरस्त्रीकरण मामलों के कार्यालय (UNODA) द्वारा संयुक्त रूप से आयोजित ‘संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) संकल्प 1540’ पर वार्षिक क्षमता निर्माण कार्यक्रम का द्वितीय संस्करण 10 फरवरी, 2026 से शुरू हुआ।

भारत-UNODA का संयुक्त वार्षिक क्षमता निर्माण कार्यक्रम

  • स्थान: राष्ट्रीय सीमा शुल्क, अप्रत्यक्ष कर और नार्कोटिक्स अकादमी (NACIN), पालसमुद्रम, आंध्र प्रदेश।
  • आयोजन: भारत सरकार (विदेश मंत्रालय) और UNODA की संयुक्त साझेदारी।
  • तिथि: 10-13 फरवरी, 2026।
  • ढांचा: यह कार्यक्रम भारत के प्रमुख ITEC (भारतीय तकनीकी और आर्थिक सहयोग) ढांचे के तहत आयोजित किया गया है।
  • ​प्रतिभागी: ​द्वितीय संस्करण में 9 देशों के 23 सरकारी विशेषज्ञों ने भाग लिया:

  • एशिया-प्रशांत: ब्रुनेई दारुस्सलाम, कजाकिस्तान, मंगोलिया, वियतनाम।
  • अफ्रीका: केन्या, मॉरीशस, नामीबिया, नाइजीरिया, तंजानिया।
  • उद्देश्य:
      • निर्यात नियंत्रण (Export Controls): दोहरे उपयोग वाली वस्तुओं के निर्यात, पारगमन और पुन: निर्यात पर निगरानी सुनिश्चित करना।
      • कानूनी ढांचा: संकल्प 1540 के कार्यान्वयन हेतु प्रभावी राष्ट्रीय कानूनों के निर्माण में सहायता।
      • प्रशिक्षण: सीमा शुल्क और सीमा सुरक्षा अधिकारियों को WMD से संबंधित अवैध तस्करी की पहचान करने के लिए प्रशिक्षित करना।
      • सहयोग: एशिया-प्रशांत और अफ्रीकी देशों के बीच क्षेत्रीय सहयोग को बढ़ावा देना।
  • ​तकनीकी पहलू:

  • सामरिक व्यापार नियंत्रण (STC): ऐसी तकनीकों और रसायनों की निगरानी करना जिनका उपयोग नागरिक और सैन्य दोनों उद्देश्यों के लिए किया जा सकता है।

  • उभरती तकनीकें (Emerging Tech): AI और ड्रोन जैसी नई तकनीकों के माध्यम से WMD के प्रसार के खतरों का विश्लेषण।
  • SCOMET सूची: भारत की SCOMET (Special Chemicals, Organisms, Materials, Equipment, and Technologies) सूची के माध्यम से निर्यात नियंत्रण के सफल मॉडल का प्रदर्शन।

संकल्प 1540 (UNSC Resolution 1540) क्या है?

  • परिचय: संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद संकल्प 1540 को 28 अप्रैल, 2004 को संयुक्त राष्ट्र चार्टर के अध्याय VII के तहत सर्वसम्मति से अपनाया गया था। 
  • उद्देश्य: सामूहिक विनाश के हथियारों (WMD – परमाणु, रासायनिक और जैविक) के प्रसार को रोकना, विशेष रूप से ‘गैर-राज्य कर्ताओं’ (Non-State Actors) जैसे आतंकवादी समूहों तक इनकी पहुंच को रोकना।
  • बाध्यकारी प्रकृति: यह सभी देशों के लिए अनिवार्य है कि वे WMD के प्रसार को रोकने हेतु घरेलू कानून बनाएं और कड़े रणनीतिक व्यापार नियंत्रण (Strategic Trade Controls) लागू करें।
  • समिति की भूमिका: इस संकल्प के कार्यान्वयन की निगरानी हेतु ‘1540 समिति’ का गठन किया गया है, जो देशों की प्रगति रिपोर्टों का विश्लेषण करती है और उन्हें तकनीकी सहायता प्रदान करती है।

भारत के लिए महत्व:

  • वैश्विक साख (Global Credibility): भारत ‘परमाणु अप्रसार संधि’ (NPT) का हस्ताक्षरकर्ता नहीं है, लेकिन संकल्प 1540 का पालन करना दर्शाता है कि भारत एक ‘जिम्मेदार परमाणु शक्ति’ है।
  • राष्ट्रीय सुरक्षा: भारत लंबे समय से सीमा पार आतंकवाद से प्रभावित रहा है। यह संकल्प आतंकवादियों को WMD तक पहुँचने से रोकने के लिए वैश्विक सहयोग सुनिश्चित करता है।
  • निर्यात नियंत्रण व्यवस्था में स्थान: इस संकल्प के सफल कार्यान्वयन ने भारत को मिसाइल प्रौद्योगिकी नियंत्रण व्यवस्था (MTCR) और वासेनार व्यवस्था जैसे वैश्विक समूहों में शामिल होने में मदद की है।
  • तकनीकी नेतृत्व: UNODA के साथ मिलकर प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित कर भारत ‘ग्लोबल साउथ’ के देशों का नेतृत्व कर रहा है, जिससे उसकी कूटनीतिक शक्ति (Soft Power) बढ़ती है।

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