भारत-अंतर्राष्ट्रीय कृषि विकास कोष की आठ-वर्षीय रणनीतिक रूपरेखा

संदर्भ:
हाल ही में भारत और कृषि विकास के लिए अंतर्राष्ट्रीय कोष (IFAD) ने ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सुदृढ़ करने के लिए नया आठ-वर्षीय देश रणनीतिक अवसर कार्यक्रम (COSOP: 2026-2033) लॉन्च किया।
रणनीतिक रूपरेखा के मुख्य बिंदु:
- लक्षित लाभार्थी और कवरेज: इस कार्यक्रम का लक्ष्य 30 लाख ग्रामीण परिवारों (लगभग 1.32 करोड़ व्यक्ति) तक अपनी पहुंच स्थापित करना है। इसमें विशेष रूप से महिलाओं, युवाओं और सामाजिक रूप से वंचित समूहों को प्राथमिकता दी जाएगी।
- भौगोलिक प्राथमिकता: यह रणनीति देश के 10 सबसे पिछड़े राज्यों, 112 आकांक्षी जिलों (Aspirational Districts) और जलवायु के प्रति संवेदनशील हिमालयी क्षेत्रों पर विशेष ध्यान केंद्रित करती है।
- वित्तीय ढांचा: कार्यक्रम को शुरू करने के लिए IFAD द्वारा लगभग $160 मिलियन का प्रारंभिक वित्तपोषण दिया जाएगा। इसके साथ ही भारत सरकार और अन्य बहुपक्षीय विकास बैंक इसमें सह-वित्तपोषण (Co-financing) प्रदान करेंगे।
- दोहरे रणनीतिक स्तंभ:
- ग्रामीण समुदायों के सामाजिक, आर्थिक और आर्थिक संकटों के प्रति लचीलेपन (Climatic Resilience) को बढ़ावा देना।
- सफल कृषि एवं विकास मॉडलों को घरेलू व वैश्विक स्तर पर विस्तारित करने के लिए ज्ञान प्रणालियों (Knowledge Systems) को मजबूत करना।
- जमीनी स्तर के संस्थानों का नेटवर्क: वित्त, बुनियादी ढांचे और बाजार लिंकेज को सुगम बनाने के लिए स्वयं सहायता समूहों (SHGs), किसान उत्पादक संगठनों (FPOs) और ग्रामीण सहकारी समितियों को केंद्रीय मंच के रूप में उपयोग किया जाएगा।
- IFAD-NABARD रणनीतिक साझेदारी: इस रणनीतिक रूपरेखा के अंतर्गत राष्ट्रीय कृषि और ग्रामीण विकास बैंक (NABARD) और IFAD के बीच एक समझौता हुआ है। इसका उद्देश्य छोटे किसानों के लिए मिश्रित वित्त साधन (Blended Finance Instruments) और तकनीकी नवाचार विकसित करना है।
महत्व:
- प्रतिमान विस्थापन: यह रणनीति भारत में ग्रामीण विकास के दृष्टिकोण को केवल ‘गरीबी उन्मूलन’ से बदलकर ‘बाजार-आधारित मूल्य संवर्द्धन’ की ओर ले जाती है। यह छोटे और सीमांत किसानों को सीधे मूल्य श्रृंखला (Value Chains) और ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म से जोड़ने में मदद करेगी।
- वैश्विक नेतृत्व: भारत अब केवल तकनीकी और वित्तीय सहायता प्राप्त करने वाला देश नहीं रहा, बल्कि विकास के क्षेत्र में एक प्रदाता बन गया है। इस रणनीति के तहत ‘लाइटहाउस मॉडल’ के माध्यम से भारत की डिजिटल कृषि तकनीकों, समावेशी ग्रामीण वित्त प्रणालियों और सहकारी शासन के सफल मॉडलों को दक्षिण-दक्षिण और त्रिकोणीय सहयोग (SSTC) के तहत अफ्रीका, दक्षिण-पूर्व एशिया और लैटिन अमेरिका के देशों के साथ साझा किया जाएगा।
- महिला सशक्तिकरण: पिछले दो दशकों में IFAD समर्थित पहलों ने ग्रामीण महिलाओं के वित्तीय समावेशन में क्रांतिकारी बदलाव किए हैं। इसका सबसे सटीक उदाहरण महाराष्ट्र में देखा गया है, जहां SHG संघों ने ₹1,300 करोड़ से अधिक का बैंक ऋण प्राप्त किया है और उनकी ऋण पुनर्भुगतान दर लगभग 99 प्रतिशत रही है। नई रणनीति इसी सफल वित्तीय मॉडल को देशव्यापी स्तर पर दोहराएगी।
- जलवायु परिवर्तन के प्रति अनुकूलन: आकांक्षी जिलों और हिमालयी क्षेत्रों में कृषि आजीविका अक्सर जलवायु परिवर्तन (सूखा, असमय वर्षा) के कारण अत्यधिक संवेदनशील होती है। यह रूपरेखा जलवायु-अनुकूल कृषि पद्धतियों और कृषि-पारिस्थितिकी नवाचारों को बढ़ावा देकर छोटे धारक किसानों की आर्थिक स्थिरता सुनिश्चित करेगी।
- सतत विकास लक्ष्यों (SDGs) की प्राप्ति: यह आठ-वर्षीय कार्यक्रम प्रत्यक्ष रूप से संयुक्त राष्ट्र के कई महत्वपूर्ण सतत विकास लक्ष्यों को प्राप्त करने में भारत की सहायता करेगा: SDG 1: शून्य गरीबी (No Poverty), SDG 2: भुखमरी की समाप्ति और पोषण सुरक्षा (Zero Hunger & Nutrition), SDG 5: लैंगिक समानता (Gender Equality), SDG 13: जलवायु कार्रवाई (Climate Action)।
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कृषि विकास के लिए अंतर्राष्ट्रीय कोष (IFAD):
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