India-Japan Maritime Security Agreement- जानिए समझौते के मुख्य बिंदु, इसका क्या महत्व है भारत के लिए?
संदर्भ:
हाल ही में भारत के रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और जापान के रक्षा मंत्री शिंजिरो कोइजुमी ने नई दिल्ली में एक उच्च-स्तरीय द्विपक्षीय बैठक की. इस बैठक में दोनों देशों ने ऐतिहासिक भारत-जापान समुद्री सुरक्षा सहयोग समझौता (India Japan Maritime Security Agreement) पर हस्ताक्षर किए.
द्विपक्षीय बैठक और समझौते के मुख्य निष्कर्ष:
- सूचना साझाकरण (Information Sharing): दोनों देशों ने समुद्री डोमेन जागरूकता (MDA) को बढ़ाने के लिए रीयल-टाइम सूचना साझा करने पर सहमति जताई.
- रसद और मरम्मत सहायता: भारतीय नौसेना और जापानी समुद्री आत्मरक्षा बल (JMSDF) एक-दूसरे के बंदरगाहों, जहाजों की मरम्मत (Ship Repair) और रसद सहायता (Logistics Support) का व्यापक उपयोग करेंगे.
- आपदा राहत और बचाव: दोनों देशों की नौसेनाएं (भारतीय नौसेना और जापान मैरीटाइम सेल्फ-डिफेंस फोर्स) संयुक्त खोज, बचाव अभियान और मानवीय सहायता में सहयोग करेंगी।
- यूनिकॉर्न एंटीना प्रणाली (UNICORN Antenna System): दोनों मंत्रियों ने युद्धपोतों पर स्थापित होने वाली अत्याधुनिक ‘यूनिकॉर्न एकीकृत संचार एंटीना प्रणाली’ के शीघ्र कार्यान्वयन की प्रतिबद्धता दोहराई.
- संयुक्त विकास (Co-development): उन्नत सैन्य उपकरणों जैसे रडार, ड्रोन, संचार प्रणाली और इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर (Electronic Warfare) तकनीकों के संयुक्त विकास पर सहमति बनी.
- कार्य समूह की स्थापना (Working Group): परिचालन, खुफिया, उपकरण और औद्योगिक सहयोग के समन्वय के लिए महानिदेशक/संयुक्त सचिव स्तर पर एक स्थायी कार्य समूह स्थापित किया जाएगा.
- 2+2 संवाद: दोनों देश इस वर्ष टोक्यो में आगामी चौथी भारत-जापान “2+2” विदेश और रक्षा मंत्रिस्तरीय वार्ता (2+2 Defence Talks) आयोजित करने के लिए चर्चा तेज करेंगे.
- इंटीग्रेटेड थिएटर कमांड: भारत की आगामी ‘एकीकृत थिएटर कमांड’ (Integrated Theater Command) की स्थापना के बाद जापान उसके साथ विशेष सहयोग जारी रखेगा.
भारत-जापान रक्षा संबंध (India-Japan Defence Relations):
- शुरुआत: दोनों देशों के बीच रक्षा संबंधों की औपचारिक शुरुआत वर्ष 2000 में जापानी प्रधानमंत्री योशिरो मोरी की भारत यात्रा के बाद हुई. वर्ष 2006 में इसे ‘रणनीतिक और वैश्विक साझेदारी’ में बदला गया.
- अधिग्रहण और क्रॉस-सर्विसिंग समझौता (ACSA): वर्ष 2020 में हस्ताक्षरित यह समझौता दोनों सेनाओं को आपूर्ति और सेवाओं के पारस्परिक आदान-प्रदान (Logistics Support) की अनुमति देता है.
- सैन्य सूचना समझौता (GSOMIA): दोनों देशों के बीच वर्गीकृत सैन्य खुफिया और तकनीकी सुरक्षा सूचनाओं की सुरक्षित साझेदारी सुनिश्चित करता है.
- बहुपक्षीय मंच:
- क्वाड (QUAD): भारत और जापान, अमेरिका तथा ऑस्ट्रेलिया के साथ मिलकर इस चतुर्भुज सुरक्षा संवाद (Quadrilateral Security Dialogue) के मुख्य स्तंभ हैं, जो हिंद-प्रशांत साझेदारी (India Japan Indo Pacific Partnership) को बढ़ावा देता है.
- एसटीडी (Strategic Defence Dialogue): दोनों देशों के रक्षा मंत्रियों और राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकारों (NSA) के बीच नियमित रणनीतिक संवाद.
संयुक्त सैन्य और नौसैनिक अभ्यास:
| अभ्यास का नाम (Name of Exercise) | सेना का प्रकार (Force Involved) | महत्व / विशिष्टता |
| जिमेक्स (JIMEX) | नौसेना (India Japan Navy Cooperation) | रणनीतिक समुद्री मार्गों की सुरक्षा और अंतर-संचालनीयता बढ़ाना. |
| धर्म गार्जियन (Dharma Guardian) | थल सेना (Army) | आतंकवाद विरोधी अभियानों और शहरी युद्ध कौशल का आदान-प्रदान. |
| वीर गार्जियन (Veer Guardian) | वायु सेना (Air Force) | इसमें पहली बार जापानी लड़ाकू विमान भारत में युद्धाभ्यास करेंगे. |
| मालाबार (MALABAR) | बहुपक्षीय नौसेना (Naval Exercise) | क्वाड देशों की नौसेनाओं के साथ हिंद महासागर में आक्रामक शक्ति प्रदर्शन. |
जापान का भारत के लिए महत्व:
- चीन का मुकाबला (Countering China): दक्षिण चीन सागर और वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) पर बीजिंग की आक्रामक सैन्य गतिविधियों को संतुलित करने के लिए दोनों का साथ आना आवश्यक है.
- स्वतंत्र और खुला हिंद-प्रशांत (Free and Open Indo-Pacific): वैश्विक व्यापार की जीवन रेखा ‘समुद्री संचार मार्गों’ (SLOCs) को सुरक्षित रखने और अंतरराष्ट्रीय समुद्री कानूनों (UNCLOS) को बनाए रखने के लिए यह साझेदारी केंद्रीय है.
- मेक इन इंडिया (Make in India): जापान की उन्नत रक्षा तकनीक और भारत की विनिर्माण क्षमता मिलकर स्वदेशी रक्षा उत्पादन (Defence Manufacturing) को आत्मनिर्भर बना सकती है.
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)
प्रश्न 1: India Japan Maritime Security Cooperation Agreement क्या है?
उत्तर: यह 20 अगस्त 2026 को हस्ताक्षरित एक समझौता ज्ञापन (MoA) है, जो दोनों नौसेनाओं के बीच सूचना साझाकरण, जहाज मरम्मत और परिचालन सहयोग को मजबूत करता है.
प्रश्न 2: India और Japan के बीच Maritime Security Cooperation क्यों महत्वपूर्ण है?
उत्तर: हिंद-प्रशांत क्षेत्र (Indo-Pacific Region) में चीन की बढ़ती आक्रामक सैन्य चुनौतियों का मुकाबला करने और समुद्री व्यापारिक मार्गों की सुरक्षा के लिए यह आवश्यक है.
प्रश्न 3: India-Japan Agreement में किन क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने की बात है?
उत्तर: इसमें मुख्य रूप से रीयल-टाइम इंटेलिजेंस शेयरिंग, लॉजिस्टिक्स सपोर्ट, मानवरहित ड्रोन प्रणाली और अत्याधुनिक संचार एंटीना (UNICORN) के क्रियान्वयन पर सहमति बनी है.
प्रश्न 4: Maritime Security के क्षेत्र में India और Japan कैसे सहयोग करेंगे?
उत्तर: दोनों देश संयुक्त कार्य समूह (Working Group) के जरिए परिचालन कूटनीति, नौसैनिक जहाजों के पारस्परिक दौरों और रसद के आदान-प्रदान द्वारा सहयोग करेंगे.
प्रश्न 5: Indo-Pacific में India-Japan Partnership का क्या महत्व है?
उत्तर: यह साझेदारी वैश्विक तनावों के बीच नियम-आधारित अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था सुनिश्चित करने और एक स्वतंत्र, खुले व समृद्ध हिंद-प्रशांत की नींव रखने के लिए महत्वपूर्ण है.
प्रश्न 6: क्या India और Japan Naval Exercises भी करते हैं?
उत्तर: हाँ, दोनों देश ‘JIMEX’ (द्विपक्षीय नौसेना अभ्यास) और अमेरिका व ऑस्ट्रेलिया के साथ मिलकर ‘मालाबार’ (MALABAR) जैसे बड़े नौसैनिक अभ्यास करते हैं.
प्रश्न 7: India-Japan Maritime Cooperation से समुद्री सुरक्षा को क्या फायदा होगा?
उत्तर: इससे हिंद महासागर और दक्षिण चीन सागर में समुद्री डकैती विरोधी अभियानों, आपदा राहत मिशनों और अवैध जहाजरानी की निगरानी की क्षमता दोगुनी हो जाएगी.
प्रश्न 8: इस Agreement का China और Indo-Pacific Region पर क्या प्रभाव हो सकता है?
उत्तर: यह समझौता क्षेत्र में चीन के आधिपत्य (Hegemony) को रोकेगा और छोटे तटीय देशों को सुरक्षा की गारंटी देकर क्षेत्रीय शक्ति संतुलन (Balance of Power) बनाए रखेगा.
