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India-Mauritius Energy Cooperation Agreement- जानिए इस समझौते के मुख्य बिंदु एवं महत्व

India-Mauritius Energy Cooperation Agreement- जानिए इस समझौते के मुख्य बिंदु एवं महत्व

India-Mauritius Energy Cooperation Agreement

संदर्भ: 

हाल ही में भारत और मॉरीशस ने 20 अगस्त 2026 को मॉरीशस की राजधानी पोर्ट लुईस (Port Louis) में तेल और गैस क्षेत्र में दीर्घकालिक सहयोग के लिए एक ऐतिहासिक सरकारी-से-सरकारी (G2G) समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए.

भारत-मॉरीशस ऊर्जा सहयोग समझौता 2026: (India-Mauritius Energy Cooperation Agreement) मुख्य बिंदु:

  • तेल और गैस आपूर्ति हेतु 5-वर्षीय दीर्घकालिक अनुबंध (5-Year Fuel Supply Pact):
    • प्रतिभागी संस्थाएं: भारत की ओर से सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनी इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन (IOC) तथा मॉरीशस की स्टेट ट्रेडिंग कॉर्पोरेशन (STC) के बीच एक पृथक वाणिज्यिक बिक्री और खरीद समझौते पर हस्ताक्षर किए गए.
    • अवधि: यह आपूर्ति व्यवस्था अगले 5 वर्षों तक लागू रहेगी. 
    • कवर किए गए उत्पाद: भारत इसके तहत मॉरीशस की शत-प्रतिशत आयात आवश्यकताओं को पूरा करते हुए पेट्रोल, डीजल, मरीन गैस ऑयल (MGO) और एविएशन टर्बाइन फ्यूल (ATF) की निरंतर आपूर्ति सुनिश्चित करेगा.
    • लाभ: वैश्विक अनिश्चितता (जैसे पश्चिम एशिया संकट और होर्मुज जलडमरूमध्य में बाधाएं) के दौर में यह सौदा मॉरीशस को मूल्य स्थिरता (Price Stability) और आपूर्ति निश्चितता प्रदान करेगा.
  • स्वच्छ और नवीकरणीय ऊर्जा सहयोग (Renewable & Green Energy Focus):
  • व्यापक ढांचा: जी2जी एमओयू (G2G MoU) केवल पारंपरिक ईंधनों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह पेट्रोलियम, गैस, जैव ईंधन (Biofuels) और उभरते स्वच्छ ऊर्जा समाधानों को भी समाहित किया गया है.
  • वैश्विक जैव ईंधन गठबंधन (GBA): मॉरीशस वैश्विक जैव ईंधन गठबंधन का एक संस्थापक सदस्य है. इस समझौते के तहत भारत मॉरीशस को उसके ‘राष्ट्रीय जैव ईंधन नीति ढांचे’ (National Biofuel Policy Framework) को मजबूत करने में मदद करेगा.
  • हरित ऊर्जा अवसंरचना: भारत की तकनीकी सहायता से मॉरीशस में पर्यावरण-अनुकूल परिवहन समाधान (जैसे ई-बसें) और 17.5 मेगावाट क्षमता का फ्लोटिंग सोलर पावर प्लांट (Floating Solar Power Project) विकसित किया जा रहा है ताकि उसकी हरित ऊर्जा (India Mauritius Green Energy) क्षमता सुदृढ़ हो सके. 

भारत-मॉरीशस संबंध (India-Mauritius Relations):

  • ऐतिहासिक संबंध: दोनों देशों के संबंध साझा इतिहास, भाषा, विरासत और रक्त संबंधों पर टिके हैं. मॉरीशस की लगभग 70% आबादी भारतीय मूल की है, जिन्हें ‘गिरमिटिया’ (Indentured Labourers) के रूप में ब्रिटिश काल में वहाँ ले जाया गया था.
  • राजनयिक मान्यता: भारत ने 1948 में (मॉरीशस की स्वतंत्रता 1968 से पहले ही) पोर्ट लुईस में अपना राजनयिक प्रतिनिधि नियुक्त कर दिया था. स्वतंत्रता के बाद भारत ने इसे तुरंत मान्यता दी. 
  • रणनीतिक संबंध:
    • सागर (SAGAR) विजन: भारत के ‘सिक्योरिटी एंड ग्रोथ फॉर ऑल इन द रीजन’ (SAGAR) विजन और ‘नेबरहुड फर्स्ट’ (Neighborhood First) नीति में मॉरीशस एक केंद्रीय स्तंभ है.
    • रणनीतिक उपस्थिति: हिंद महासागर (Indian Ocean) में चीन के बढ़ते प्रभाव का मुकाबला करने के लिए भारत ने मॉरीशस के अगालेगा द्वीप (Agalega Island) पर हवाई पट्टी और समुद्री जेट्टी अवसंरचना का विकास किया है, जो भारत की समुद्री निगरानी क्षमता को बढ़ाता है.
  • सुरक्षा संबंध:
    • तटीय सुरक्षा: भारतीय नौसेना मॉरीशस के राष्ट्रीय तटीय सुरक्षा बल (National Coast Guard) को निरंतर गश्ती पोत, डोर्नियर विमान और हेलीकॉप्टर प्रदान करती है. दोनों देश समुद्री डकैती (Anti-Piracy) और आतंकवाद के खिलाफ मिलकर काम करते हैं.
    • व्हाइट शिपिंग सूचना साझाकरण: समुद्री क्षेत्र में पारदर्शिता बढ़ाने के लिए दोनों सेनाओं के बीच डेटा-साझाकरण (Data-sharing) व्यवस्था काम करती है. साइबर सुरक्षा और डिजिटल बुनियादी ढांचे के संरक्षण के लिए भी दोनों देशों की एजेंसियां तकनीकी रूप से जुड़ी हुई हैं.
  • वित्तीय संबंध:
    • सीईसीपीए (CECPA): वर्ष 2021 में लागू हुआ व्यापक आर्थिक सहयोग और भागीदारी समझौता (CECPA) भारत द्वारा किसी भी अफ्रीकी देश के साथ हस्ताक्षरित पहला मुक्त व्यापार समझौता है.
    • विकास सहायता: भारत ने पिछले एक दशक में मॉरीशस को लगभग 1.1 बिलियन डॉलर की विकासात्मक सहायता दी है, जिसमें पोर्ट लुईस का ‘मेट्रो एक्सप्रेस’ (Metro Express) प्रोजेक्ट और सुप्रीम कोर्ट भवन का निर्माण शामिल है.
    • वित्तीय गेटवे: मॉरीशस ऐतिहासिक रूप से भारत में आने वाले प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) का एक प्रमुख वित्तीय स्रोत और गेटवे रहा है.

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

प्रश्न 1: भारत और मॉरीशस के बीच Energy Cooperation Agreement क्या है?

उत्तर: यह अगस्त 2026 में हस्ताक्षरित एक द्विपक्षीय समझौता है, जिसके तहत भारत मॉरीशस की शत-प्रतिशत पेट्रोलियम आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए 5 साल की निर्बाध ईंधन आपूर्ति की गारंटी देता है.

प्रश्न 2: भारत-मॉरीशस ऊर्जा समझौते का मुख्य उद्देश्य क्या है?

उत्तर: इसका मुख्य उद्देश्य वैश्विक बाजार की अनिश्चितताओं के बीच मॉरीशस की ऊर्जा सुरक्षा (Energy Security) को मजबूत करना तथा मूल्य स्थिरता सुनिश्चित करना है.

प्रश्न 3: इस समझौते में Renewable Energy को क्यों महत्व दिया गया है?

उत्तर: क्योंकि दोनों देश कार्बन उत्सर्जन कम करने और सतत आर्थिक विकास के लिए प्रतिबद्ध हैं, जिसमें जैव ईंधन (Biofuels) और सौर ऊर्जा का विस्तार शामिल है.

प्रश्न 4: भारत और मॉरीशस Energy Security के लिए कैसे सहयोग करेंगे?

उत्तर: इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन (IOC) पाँच वर्षों तक मॉरीशस को पेट्रोल, डीजल और जेट ईंधन की निरंतर आपूर्ति करके उसकी ऊर्जा सुगमता सुनिश्चित करेगा. 

प्रश्न 5: क्या समझौते में Solar और Green Energy शामिल हैं?

उत्तर: हाँ, इसमें दीर्घकालिक सहयोग के तहत जैव ईंधन (Biofuels), सौर ऊर्जा अवसंरचना और 17.5 मेगावाट की फ्लोटिंग सोलर परियोजनाओं को शामिल किया गया है. 

प्रश्न 6: भारत-मॉरीशस Energy Partnership से दोनों देशों को क्या लाभ होगा?

उत्तर: मॉरीशस को ईंधन की निश्चितता और आर्थिक स्थिरता मिलेगी, जबकि भारत को हिंद महासागर क्षेत्र (IOR) में एक दीर्घकालिक बाजार और रणनीतिक बढ़त मिलेगी. 

प्रश्न 7: मॉरीशस के Energy Sector में भारत की क्या भूमिका होगी?

उत्तर: भारत पारंपरिक रिफाइंड पेट्रोलियम उत्पादों के मुख्य आपूर्तिकर्ता के साथ-साथ वहाँ नवीन हरित ऊर्जा ग्रिड स्थापित करने में तकनीकी मार्गदर्शक की भूमिका निभाएगा.

प्रश्न 8: भारत-मॉरीशस ऊर्जा समझौता कब हुआ?

उत्तर: यह ऐतिहासिक सरकारी-से-सरकारी (G2G) समझौता 20 अगस्त 2026 को मॉरीशस के पोर्ट लुईस में संपन्न हुआ.

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