प्रादेशिक सेना ने “Terrier Cyber Quest 2026” शुरू किया, जानिए क्या है यह क्वेस्ट?
संदर्भ:
हाल ही में भारतीय सेना की प्रादेशिक सेना (Territorial Army) ने 21 अगस्त 2026 को राष्ट्रीय सुरक्षा और डिजिटल सुरक्षा समाधानों पर केंद्रित राष्ट्रीय स्तर के हैकाथॉन ‘टेरियर साइबर क्वेस्ट 2026’ (Terrier Cyber Quest 2026 – TCQ 3.0) के तीसरे संस्करण की आधिकारिक घोषणा की।
टेरियर साइबर क्वेस्ट 2026 (Terrier Cyber Quest 2026) के मुख्य बिंदु:
- आयोजक: इस हैकाथॉन का आयोजन प्रादेशिक सेना द्वारा प्रसिद्ध साइबर सुरक्षा गैर-लाभकारी संगठन ‘साइबरपीस’ (CyberPeace) के सहयोग से किया जा रहा है।
- पंजीकरण सीमा: इस राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिता (Cyber Quest 2026 India) के लिए पंजीकरण की अंतिम तिथि 31 अगस्त 2026 तक है।
- चयन चरण: प्रारंभिक ऑनलाइन स्क्रीनिंग और शॉर्टलिस्टिंग चरण 1 से 10 सितंबर 2026 तक आयोजित किया जाएगा। [1, 2]
- ग्रैंड फिनाले और वेन्यू: शॉर्टलिस्ट किए गए फाइनलिस्ट 6 से 8 अक्टूबर 2026 तक नई दिल्ली में व्यक्तिगत रूप से प्रतिस्पर्धा करेंगे। इसका भव्य समापन व पुरस्कार समारोह 9 अक्टूबर 2026 को आयोजित होगा।
- मुख्य उद्देश्य: इसका प्राथमिक उद्देश्य रक्षा क्षेत्र (Defence), साइबर सुरक्षा (Cybersecurity) और सूचना डोमेन में उभरती चुनौतियों से निपटने के लिए स्वदेशी एवं नवीन तकनीकी समाधान विकसित करना है।
- मुख्य क्षेत्र: यह मुख्य रूप से आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), मशीन लर्निंग, खतरा प्रबंधन (Threat Mitigation), ड्रोन तकनीक और डिजिटल जागरूकता जैसे महत्वपूर्ण तकनीकी क्षेत्रों पर केंद्रित है।
- तीन प्रतिस्पर्धी ट्रैक: यह हैकाथॉन मुख्य रूप से निम्नलिखित तीन घटक श्रेणियों (Tracks) में आयोजित किया जा रहा है:
- बग हंटिंग (Bug Hunting): यह एक उच्च-स्तरीय साइबर सुरक्षा चुनौती है। ऑनलाइन कैप्चर-द-फ्लैग (CTF) क्वालिफायर से शुरू होकर यह लाइव सैंडबॉक्स फाइनल तक चलेगी, जहाँ प्रतिभागी काल्पनिक महत्वपूर्ण अवसंरचना (Critical Infrastructure) की सुरक्षा कमजोरियों की पहचान करेंगे।
- एआई कवच (AI Kavach): यह पूर्णतः एआई और मशीन लर्निंग पर आधारित ट्रैक है। इसका लक्ष्य भविष्य के खतरों की भविष्यवाणी (Predictive Threat Intelligence), स्वचालित सुरक्षा तंत्र और विसंगति पहचान (Anomaly Detection) के लिए स्वदेशी सुरक्षा एल्गोरिदम विकसित करना है।
- क्रिएटर्स चैलेंज (Creators Challenge): डिजिटल मीडिया और कथा-वाचन (Storytelling) पर आधारित इस ट्रैक का लक्ष्य इन्फ्लुएंसर्स और कम्युनिकेटर्स के माध्यम से डीपफेक (Deepfake), फिशिंग (Phishing), ऑनलाइन वित्तीय धोखाधड़ी और भ्रामक सूचनाओं के विरुद्ध प्रभावी डिजिटल जागरूकता अभियान तैयार करना है।
प्रादेशिक सेना (Territorial Army) क्या है?
- परिचय: प्रादेशिक सेना (Territorial Army – TA) भारतीय सेना की एक विशिष्ट स्वैच्छिक नागरिक बल (Voluntary Citizen’s Force) इकाई है। यह उन नागरिकों को सैन्य प्रशिक्षण प्रदान करती है जो पहले से ही नागरिक व्यवसायों में कार्यरत हैं, ताकि वे देश की आवश्यकता के समय रक्षा सेवाओं में योगदान दे सकें।
- स्थापना: भारत में आधुनिक प्रादेशिक सेना का औपचारिक गठन प्रादेशिक सेना अधिनियम, 1948 के पारित होने के बाद 9 अक्टूबर 1949 को भारत के पहले गवर्नर-जनरल सी. राजगोपालाचारी द्वारा किया गया था। इसीलिए प्रतिवर्ष 9 अक्टूबर को ‘प्रादेशिक सेना दिवस’ मनाया जाता है।
- नियंत्रण: प्रादेशिक सेना सीधे भारत सरकार के रक्षा मंत्रालय (Ministry of Defence) और थल सेनाध्यक्ष के प्रशासनिक व परिचालन नियंत्रण के अधीन कार्य करती है।
- मुख्य कार्य:
- दोहरी भूमिका: इसके कर्मी ‘अंशकालिक’ (Part-time) सैनिक होते हैं। वे वर्ष में केवल दो महीने के अनिवार्य सैन्य प्रशिक्षण या सक्रिय तैनाती के दौरान सैन्य अनुशासन में रहते हैं, जबकि शेष समय अपने नागरिक व्यवसायों (जैसे डॉक्टर, इंजीनियर, सीए) को जारी रखते हैं।
- नियमित सेना को सहयोग: युद्ध या राष्ट्रीय आपातकाल के समय नियमित भारतीय सेना (Regular Indian Army) को स्थिर और सुरक्षात्मक कार्यों से मुक्त करना ताकि अग्रिम मोर्चे पर बल एकाग्रता बढ़ सके।
- आंतरिक सुरक्षा: स्थानीय नागरिक प्रशासन को प्राकृतिक आपदाओं (जैसे बाढ़, भूकंप) के प्रबंधन और महत्वपूर्ण सार्वजनिक सेवाओं (जैसे रेलवे, तेल आपूर्ति) को दंगों या हड़ताल के दौरान अक्षुण्ण बनाए रखने में सहायता करना।
- तटीय और पारिस्थितिकी रक्षक: इसके अंतर्गत विशेष ‘पारिस्थितिकी कार्य बल’ (Ecological Task Force) इकाइयां काम करती हैं, जो देश के संवेदनशील क्षेत्रों में वनीकरण और पर्यावरण संरक्षण का कार्य करती हैं।
- योगदान: नियमित सेना के पास पारंपरिक कॉम्बैट ट्रेनिंग होती है, लेकिन देश के नागरिक टेक-इकोसिस्टम में उत्कृष्ट कोडर, एआई विशेषज्ञ और एथिकल हैकर मौजूद हैं।
- प्रादेशिक सेना इन असैन्य साइबर विशेषज्ञों को ‘टेरियर साइबर क्वेस्ट’ जैसे माध्यमों से जोड़कर सीधे राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए एक मजबूत साइबर रक्षा क्षमता (Cyber Defence Capability India) विंग तैयार कर रही है, जो भविष्य के हाइब्रिड खतरों को नाकाम करने में सक्षम है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)
प्रश्न 1: Terrier Cyber Quest 2026 क्या है?
उत्तर: यह प्रादेशिक सेना और ‘साइबरपीस’ द्वारा आयोजित एक राष्ट्रीय स्तर का हैकाथॉन (TCQ 3.0) है, जो रक्षा और साइबर सुरक्षा के लिए स्वदेशी तकनीकी समाधान विकसित करता है।
प्रश्न 2: Territorial Army ने Terrier Cyber Quest क्यों शुरू किया?
उत्तर: सैन्य और असैन्य तकनीकी प्रतिभाओं को एक साथ लाकर राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और साइबर खतरों के विरुद्ध स्वदेशी सुरक्षा प्रणाली विकसित करने हेतु इसे शुरू किया गया है।
प्रश्न 3: Terrier Cyber Quest 2026 का उद्देश्य क्या है?
उत्तर: इसका उद्देश्य प्रेडिक्टिव थ्रेट इंटेलिजेंस, एआई-संचालित सुरक्षा उपकरणों (AI Kavach), बग हंटिंग और डीपफेक जैसी भ्रामक सूचनाओं के खिलाफ डिजिटल जागरूकता बढ़ाना है।
प्रश्न 4: Territorial Army की Cyber Security में क्या भूमिका है?
उत्तर: प्रादेशिक सेना नागरिक क्षेत्र के शीर्ष तकनीकी विशेषज्ञों और कोडर को सेना के साथ जोड़कर देश की महत्वपूर्ण डिजिटल अवसंरचनाओं की सुरक्षा के लिए एक विशेष विंग का काम करती है।
प्रश्न 5: Cyber Quest से भारत की Cyber Defence Capability कैसे मजबूत होगी?
उत्तर: यह विदेशी सॉफ्टवेयर प्रणालियों पर निर्भरता कम करके पूरी तरह से भारत में निर्मित (Indigenous) सुरक्षित प्रणालियों और एआई-सुरक्षा एल्गोरिदम को बढ़ावा देता है।
प्रश्न 6: क्या इस पहल में Cyber Warfare पर भी ध्यान दिया जाएगा?
उत्तर: हाँ, इसमें काल्पनिक महत्वपूर्ण राष्ट्रीय अवसंरचना (Critical Infrastructure) पर होने वाले वास्तविक समय के साइबर हमलों को लाइव सैंडबॉक्स में रोकने का सैन्य अभ्यास शामिल है।
प्रश्न 7: Terrier Cyber Quest भारत के लिए क्यों महत्वपूर्ण है?
उत्तर: यह डिजिटल संप्रभुता सुनिश्चित करने, वित्तीय और पावर ग्रिड प्रणालियों को सुरक्षित रखने तथा एआई के दौर में उभरते साइबर फ्रॉड से निपटने के लिए गेम-चेंजर है।र्वजनिक समारोह में प्रदान किया जाएगा. प्रदान करता है।
